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सोशल मीडिया:फेसबुक बच्चों और लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा; कंपनी की पूर्व डेटा प्रमुख होगेन ने अमेरिका की सीनेट में दी गवाही

18 दिन पहलेलेखक: सिसिलिया कंग
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फ्रांसिस होगेन और मार्क जकरबर्ग - Dainik Bhaskar
फ्रांसिस होगेन और मार्क जकरबर्ग

फेसबुक की चर्चित पूर्व डेटा वैज्ञानिक फ्रांसिस होगेन ने कहा है कि फेसबुक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, लोकतंत्र और समाज के लिए बड़ा खतरा है। ये भेदभाव पैदा करता है। चुने गए जनप्रतिनिधियों को इस पर काबू करना चाहिए। क्योंकि फेसबुक कंपनी जानती है कि उसके इंटाग्राम जैसे एप सुरक्षित नहीं हैं लेकिन इसके बावजूद कंपनी सुधार के लिए कोई कार्रवाई नहीं करती है।

अमेरिकी सीनेट में लगभग तीन घंटे तक चली अपनी गवाही में फ्रांसिस ने कहा कि फेसबुक बच्चों को जानबूझकर अपने एप की लत लगाने की कोशिशों में रहती है। सीनेट की इस गवाही का नेतृत्व करने वाले कनेक्टिकट के डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेन्थल ने कहा कि फ्रांसिस की ओर से मुहैया कराई गई जानकारी बहुत ही सनसनीखेज है।

उन्होंने कंपनी की उन आंतरिक बातों का खुलासा किया है जिसके बारे में फेसबुक हमेशा से पर्दा डाले रखती थी। फ्रांसिस ने अपनी गवाही में भी दोहराया कि फेसबुक की ‘प्रॉफिट-ओवर-सेफ्टी’ (सुरक्षा पर लाभ को तरजीह देने) की रणनीति सबसे अधिक जिम्मेदार है।
होगेन का आरोप: चीन-ईरान ने अपने पक्ष में किया इस्तेमाल

  • म्यांमार और इथोपिया में गृहयुद्ध के दौरान झूठी सूचनाएं चलीं। फेसबुक ने माना था नफरत फैलाने वाले पोस्ट पर रोक नहीं लग पाई।
  • चीन- ईरान मामले में ऐसा ही हुआ। एकाधिकारवादी सरकारों ने फेसबुक का पक्ष में इस्तेमाल किया।
  • फेसबुक ने आतंक रोधी अपने सेल में सोची समझी रणनीति के तहत स्टाफ को कम किया।

जकरबर्ग बोले: हमने सुरक्षा से कभी समझौता नहीं किया

फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कहा है कि इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है कि सोशल मीडिया का एक एप बच्चों को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा फेसबुक कभी फायदे को सुरक्षा के मुकाबले में तवज्जो नहीं देती है। फेसबुक कर्मचारियों को लिखे ब्लॉग में उन्होंने कहा है, हम जानबूझकर ऐसे कंटेंट को आगे नहीं बढ़ाते जो लोगों को नुकसान पहुंचाए।

भास्कर EXPLAINER

सोशल मीडिया पर कम निर्भर रहें

काजिम रिजवी व मोहित, साइबर एक्सपर्ट और सत्या मुले, साइबर लीगल एक्सपर्ट

फेसबुक, वाट्सएप व इंस्टाग्राम सोमवार रात करीब सवा नौ बजे से छह घंटे तक ठप रहे। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, बार्डर गेटवे प्रोटोकॉल, डीएनएस इस दिक्कत की मुख्य वजह हो सकती है, हालांकि मूल में मानवीय गलती है।

क्या है बार्डर गेटवे प्रोटोकॉल?
इंटरनेट नेटवर्कों का जाल है और बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (बीजीपी) सभी नेटवर्कों को आपस में जोड़े रखता है। असल में, इसी प्रोटोकॉल की वजह से इंटरनेट काम करता है। जैसे ही हम किसी वेबसाइट को खोलते हैं, तो बीजीपी ही नेटवर्क के जाल में उस वेबसाइट को तेजी से खोलने का रास्ता पता करता है। जब बीजीपी काम नहीं करता तो इंटरनेट रूटर समझ ही नहीं पाता कि उसे क्या करना है, इससे इंटरनेट काम नहीं कर पाता। फेसबुक, इंस्टाग्राम या वाट्सएप के मामले में जब हम उसे खोलना चाह रहे थे और बीजीपी में दिक्कत थी तब फेसबुक, इंस्टाग्राम व वाट्सएप दूसरे नेटवर्क को यह नहीं बता पा रहे थे कि वह इंटरनेट पर मौजूद हैं।

बीजीपी में दिक्कत क्यों आई?
वेबसाइट डोमेन नेम से खुलती है लेकिन हम उसके आईपी एड्रेस से पहुंचते हैं। इंटरनेट पर डोमेन नेम सर्वर (डीएनएस) नामक सिस्टम है जो डोमेन नेम को आईपी एड्रेस में बदल देता है। लेकिन यदि किसी वेबसाइट में राउटिंग बदलाव किए जाएं जैसे कि फेसबुक के मामले में किया गया, इससे डीएनएस सर्वर बंद हो गया क्योंकि एड्रेस खो गए और बीजीपी भी उसका रास्ता नहीं ढूंढ़ पाया और ठप हो गया।

क्या ये किसी साइबर हमले या हैकिंग थी?
फेसबुक ने साइबर हमले या हैकिंग को खारिज किया है। उसका कहना है दिक्कत फॉल्टी कॉन्फिग्रेशन चेंज से हुई। ट्रैफिक राउटिंग में गड़बड़ी से यह समस्या पैदा हुई, यह एक मानवीय गलती थी। डेटा सेंटर्स में नेटवर्क ट्रैफिक को कोर्डिनेट करने वाले रूटर में कॉन्फिग्रेशन बदलाव से मशीनों के बीच कनेक्शन बंद हो गया। मुख्य सर्वर को रीसेट करना पड़ा जिसमें करीब छह घंटे का समय लग गया।

भविष्य में भी ऐसा हो सकता है?
आमतौर पर विश्व भर में सेवाएं देने वाली वेबसाइट पर सतर्कता से निगरानी की जाती है। लेकिन इसके हार्डवेयर को लोग ही ओपरेट करते हैं और मानवीय भूल होने की संभावना कभी भी रहती है। इसलिए भविष्य में भी ऐसा हो सकता है। ऐसा न हो, इसके लिए बेहद सख्त प्रयास किए जाते हैं और सालों तक संभव है कि सेवाएं पूरी तरह ठप होने की घटना न हो लेकिन यह सुनिश्चित करा नामुमकिन है। 2011 में भी फेसबुक में एक बार ऐसा हो चुका है तब 24 घंटे तक सेवाएं ठप रही थीं।

इस घटना से क्या सीख मिली है?
एम्बुलेंस कॉलिंग, वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट, स्लॉट बुकिंग या किसी बुरे वक्त में अपने प्रियजन व मित्रों को संदेश देने के लिए यदि हम वाट्सएप व फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न करें तो बेहतर होगा। इस पर निर्भर न रहें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लोक कल्याण और संकट प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों से दूर रखा जाना चाहिए क्योंकि यदि सेवाएं कई-कई घंटों के लिए बंद होंगी तो न हम नुकसान के आकलन की स्थिति में होंगे और न इस परिस्थिति से निपटने की स्थिति में होंगे।