कंबोडिया / चमगादड़ का मल इकट्ठा करते वक्त चट्‌टानों में फंसा युवक, 4 दिन बाद बचाया गया

सुम बोरा। सुम बोरा।
He was collecting bat droppings - guano - which is used as fertilizer
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सुम बोरा।सुम बोरा।
He was collecting bat droppings - guano - which is used as fertilizer

  • उत्तर पश्चिमी प्रांत बट्टमबांग के चकेरी पर्वत के जंगलों के गुफा की चट्‌टानों में फंसा था युवक
  • वह 4 से लेकर 7 अगस्त तक फंसा रहा, उसने बताया- अगर मेरे पास चाकू होता तो आत्महत्या कर लेता
  • यहां के किसान अतिरिक्त कमाई के लिए चमगादड़ के मल से उर्वरक बनाते हैं

दैनिक भास्कर

Aug 11, 2019, 06:43 PM IST

नॉम पेन्ह.  गुफा में चट्‌टानों के बीच फंसे कंबोडिया के 28 साल के युवक सुम बोरा की हालत अब ठीक है। वह चार दिन तक चट्‌टानों के बीच रहा था। उसे रैपिड रेस्क्यू कंपनी 711 के 200 जवानों की बचाव टीम ने चट्‌टानों को काटकर निकाला था।

 

दरअसल सुम उर्वरक बनाने के लिए चमगादड़ का मल एकत्रित करने 4 अगस्त को गुफा में घुसा था। टॉर्च की फ्लैश लाइट ठीक करते वक्त वह फिसलकर दो चट्टानों के बीच फंस गया था। तीन दिन तक घर नहीं आने पर सुम बोरा के भाई ने उसे चौथे दिन उत्तर पश्चिमी प्रांत बट्टमबांग के चकेरी पर्वत के जंगलों में स्थित गुफा की चट्‌टानों में फंसा पाया था। इसकी जानकारी बचाव अधिकारियों की दी। इसके बाद बचाव अभियान शुरू हुआ। 7 अगस्त को उसे रेक्स्यू किया गया। अस्पताल जाते हुए सुम बोरा ने कहा, "मैंने जीवित रहने की आस छोड़ दी थी। अगर मेरे पास चाकू होता तो आत्महत्या कर लेता।"

 

200 बचावकर्मियों ने बचाया

बचाव अभियान के मेजर सरेथ विसेन के मुताबिक, सुम बोरा को लगभग 200 बचावकर्मियों ने बुधवार शाम 6 बजे चट्टानों को काटकर निकाला। वह काफी कमजोर हो गया था। उसे प्रांतीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

 

बचाव अभियान

 

 

प्रधानमंत्री की सुरक्षा करती है रैपिड रेस्क्यू कंपनी 711
रैपिड रेस्क्यू कंपनी 711 एक्सपर्ट्स की टीम है। यह प्रधानमंत्री हुन सेन के विशेष सैन्य बॉडी गार्ड ब्रिगेड से जुड़ी है। कंपनी 711 के जवानों ने ही जून में सिहानौकविले में एक 7 मंजिला इमारत ढह जाने के बाद बचाव ऑपरेशन चलाया था। इस घटना में 24 लोगों की मौत हो गई थी।

 

सबसे गरीब देशों में से एक है कंबोडिया
यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट के अनुसार, कंबोडिया दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है। उसकी 35% आबादी गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर कर रही है। देश की जनसंख्या 15 करोड़ है। इस कारण यहां बहुत से किसान चमगादड़ों का मल एकत्रित करते हैं, जिसका इस्तेमाल उर्वरक में होता है। इससे इन किसानों की कुछ कमाई हो जाती है।

 

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