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अमेरिका से तस्वीरें:जॉर्ज फ्लॉयड का अंतिम संस्कार, 10 वें दिन भी इस अश्वेत को इंसाफ दिलाने के लिए देश में विरोध प्रदर्शन जारी

वॉशिंगटन2 महीने पहले
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यह नाइंसाफी के खिलाफ मुहिम है। इसको मंजिल तक पहुंचाना है। जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद जो नारे लगाए जा रहे हैं, उनमें से कुछ का अर्थ यही है। यह तस्वीर ब्रिटेन के बर्मिंघम की है। यहां भी जॉर्ज के लिए इंसाफ मांगा गया। एक बैनर पर लिखा था- हमारी जिंदगी के अंत की शुरुआत उसी दिन हो जाएगी जिस दिन हम जरूरी बातों या अधिकारों को लेकर चुप्पी साध लेंगे।
  • जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों मौत 25 मई को हुई थी, दोषी अफसर बर्खास्त और गिरफ्तार
  • शुरुआती हफ्ते में विरोध प्रदर्शन के अलावा हिंसा, आगजनी और लूटपाट हुई, अब शांतपूर्ण विरोध
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अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हत्या के 10वें दिन अमेरिका में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हालांकि, अब ये शांतिपूर्ण हैं। गुरुवार को फ्लॉयड का अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान हजारों लोग मौजूद रहे। जॉर्ज की पत्नी रॉक्सी और 6 साल की बेटी गियाना भी अंतिम संस्कार में शामिल हुईं। पुलिस अब बहुत जरूरी होने पर ही सख्ती दिखा रही है। ज्यादातर जगहों पर उसने सब्र और गुजारिश से काम लिया, ताकि हिंसा न भड़के। यहां विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें....

जॉर्ज की मौत के बाद अमेरिका में अब भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। न्यूयॉर्क में गुरुवार सुबह से देर रात तक प्रदर्शन जारी रहे। इस दौरान जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो कुछ प्रदर्शनकारी गाड़ियों के सामने खड़े हो गए। हालांकि, किसी तरह की हिंसा नहीं हुई।
जॉर्ज की मौत के बाद करीब एक हफ्ते तक विरोध प्रदर्शनों में हिंसा भी हुई। लेकिन, अब पूरी तरह शांतिपूर्ण विरोध हो रहा है। यह तस्वीर इसकी गवाह है। लास एंजिल्स के पुलिस चीफ खुद प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने जॉर्ज के साथ हुई भयावह घटना और उसकी मौत पर माफी भी मांगी।
तस्वीर डेट्रॉयट की है। यहां गुरुवार सुबह से शाम या कहें रात तक रैलियां निकाली गईं। जॉर्ज को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उसके लिए इंसाफ की आवाज बुलंद हुई।
मिशिगन में जॉर्ज को इंसाफ दिलाने की मांग की यह तस्वीर वहां के एक पार्क की है। यहां सुबह से शाम तक लोग जमे रहते हैं।
विरोध का एक रास्ता कला के जरिए भी होकर जाता है। यह तस्वीर डेट्रॉयट की है। यहां कुछ कलाकारों ने दीवारों पर ग्रेफिटी और संदेश के जरिए फ्लॉयड की हत्या की निंदा की और उनके लिए इंसाफ मांगा।
दमन और बर्बरता के जरिए हक और हुकूक की आवाजें ज्यादा देर नहीं दबाई जा सकतीं। तस्वीर मिशिगन की है। एक लड़की इस बैनर के जरिए अमेरिकी सरकार तक यही आवाज पहुंचाना चाहती है कि अश्वेतों के अधिकार और उनकी जड़ों को रोका नहीं जा सकता।
तस्वीर मैनहटन की है। यह महिला यहां के सवबे स्टेशन ब्रिज से विरोध प्रदर्शन स्थल की तरफ जा रही है। यहां कुछ फैक्ट्रियों के कर्मचारी छुट्टी लेकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
जॉर्ज का अंतिम संस्कार हो चुका है। अब उसे इंसाफ दिलाने की मुहिम पहले से तेज हो चुकी है। मामले की जांच के लिए टास्क फोर्स बनाई जा चुकी है। लोगों की मांग है कि मुख्य आरोपी पुलिस अफसर डेरेक चौविन को किसी भी हाल में जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
मिनेसोटा के मिनेपोलिस की यह तस्वीर फिर भावुक करती है। जॉर्ज फ्लॉयड की पत्नी रॉक्सी वॉशिंगटन और 6 साल की बेटी गियाना अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने पहुंचीं। इस दौरान मीडिया कैमरे उन्हें अपनी आंखों में कैद करते रहे। गियाना चुपचाप मां का हाथ थामे इस मंजर को देखती रही।
मिनेपोलिस में जॉर्ज के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए। ज्यादातर लोग हाथ में बुके लेकर आए और फ्लॉयड को अंतिम विदाई दी।
तस्वीर न्यूयॉर्क सिटी की है। यहां जॉर्ज फ्लॉयड के लिए इंसाफ की मांग फिर बुलंद की गई। शहर के अलग-अलग हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने वालों में छात्रों की संख्या ज्यादा थी। इनमें श्वेत और अश्वेत दोनों शामिल थे।
अमेरिका की कुल आबादी में अश्वेतों की संख्या करीब 13 फीसदी है। गुरुवार को जब जॉर्ज का अंतिम संस्कार हुआ तो अश्वेतों ने प्लेकार्ड्स और बैनर लेकर नारेबाजी की। इस दौरान एक अश्वेत का यह आक्रामक अंदाज दिखा।
मिनेपोलिस की यह तस्वीर जॉर्ज फ्लॉयड मेमोरियल सर्विस की है। इस दौरान दुखी लोग सड़कों पर बैठ गए। कुछ के तो आंसू ही नहीं थम रहे थे।
न्यूयॉर्क के न्यू रोशेल में गुरुवार को एक रैली निकाली गई। इसमें जॉर्ज को न्याय दिलाने और आरोपी पुलिस अफसरों को सख्त सजा दिलाने की मांग की गई।
मिनेपोलिस में जॉर्ज के अंतिम संस्कार के पहले एक शोकसभा हुई। इस दौरान कुछ देर के लिए मौन रखा गया। यहां मौजूद लोगों ने जॉर्ज के परिवार को हर्जाने की मांग भी की। हालांकि, जॉर्ज की पत्नी रॉक्सी पहले ही सरकार की तरफ से ऑफर की गई मदद को ठुकरा चुकी हैं।
मिनेसोटा के मिनेपोलिस में जब जॉर्ज का अंतिम संस्कार किया गया तो हजारों लोग मौजूद थे। शोकसभा में भी भारी भीड़ जुटी। मौजूद लोगों में कुछ स्कूल छात्र भी थे।
यह नाइंसाफी के खिलाफ मुहिम है। इसको मंजिल तक पहुंचाना है। जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद जो नारे लगाए जा रहे हैं, उनमें से कुछ का अर्थ यही है। यह तस्वीर ब्रिटेन के बर्मिंघम की है। यहां भी जॉर्ज के लिए इंसाफ मांगा गया। एक बैनर पर लिखा था- हमारी जिंदगी के अंत की शुरुआत उसी दिन हो जाएगी जिस दिन हम जरूरी बातों या अधिकारों को लेकर चुप्पी साध लेंगे।
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