शोध- जल्दी भूल जाते हैं इंटरनेट से हासिल जानकारी को:गूगल सर्च करने वाले खुद को स्मार्ट मानते हैं, पर इसे अपना ज्ञान मानने के बारे में भूल करते हैं

7 महीने पहले
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गूगल पर मिले ज्ञान को लोग ज्यादा समय तक के लिए याद नहीं रख सकते। - Dainik Bhaskar
गूगल पर मिले ज्ञान को लोग ज्यादा समय तक के लिए याद नहीं रख सकते।

किसी भी जानकारी को सर्च इंजन गूगल पर खोज कर शेखी जताने वाले लोग खुद को दूसरे लोगों से ज्यादा स्मार्ट समझाते हैं। अमेरिका की टैक्सस यूनिवर्सिटी के एक शोध के अनुसार गूगल पर सर्च करने वाले कॉन्फिडेंस से पेश आते हैं। शोधनकर्ताओं ने कुछ लोगों काे जवाब देने के लिए कुछ सवाल दिए। कुछ लोगों ने अपनी मैमोरी और कुछ ने इंटरनेट सर्च इंजन गूगल का इस्तेमाल किया।

इनमें से गूगल करके जवाब देने वाले लोग खुद को ज्यादा आत्मविश्वासी मान रहे थे। शोध का नेतृत्व करने वाले एडरिन वार्ड का कहना है कि जिन लोगों ने गूगल कर सवालों के जवाब खोजे थे वो कुछ देर बाद या फिर अगले दिन उन्हीं सवालों के जवाब अपनी मैमोरी के आधार पर देने में विफल रहे।

वार्ड का कहना है कि अक्सर लोग जब इंटरनेट पर सर्च करके कुछ बातों के बारे में जानकारी लेते हैं तो वे ये मानने लगते हैं कि उन्हें ये बात अपनी मेमाेरी के आधार पर पता चली है। इसे मनोवैज्ञानिक तौर पर भ्रम की स्थिति कहते हैं जबकि व्यक्ति ये मानने लगता है कि इंटरनेट से पता चली जानकारी अथवा ज्ञान उसका खुद का है।

दरअसल वे गूगल पर मिले ज्ञान को केवल पढ़ रहे होते हैं। असल जानकारी तो सर्च इंजन गूगल की मैमोरी में ही होती है। इसे वैज्ञानिक तौर पर आंतरिक और बाहरी ज्ञान कहा जाता है। ये काफी कुछ ऐसा है कि कोई छात्र अपने शिक्षक के ज्ञान को अपना ही ज्ञान मानने लगे केवल इस तर्क के आधार पर कि वह उनकी क्लास में जाता है।

इस गलतफहमी से निर्णय की क्षमता पर असर
शोध में सामने आया कि इंटरनेट की जानकारियों को अपनी ज्ञान मानने की गलतफहमी से लोगों की निर्णय करने की क्षमता पर भी विपरीत असर पड़ता है। हर बात पर गूगल पर निर्भरता से दिमाग की नैसर्गिक निर्णय करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है।