चीन में 43 साल में सबसे कम जन्मदर:सरकार 3 बच्चों के परिवार को मंजूरी दे चुकी पर सिंगल मदर्स को भत्ते नहीं

6 महीने पहले
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चीन में बच्चों के पोषण के लिए साढे़ 3 लाख रुपए सालाना भत्ता। - Dainik Bhaskar
चीन में बच्चों के पोषण के लिए साढे़ 3 लाख रुपए सालाना भत्ता।

शंघाई में रहने वाली 37 साल की झांग (परिवर्तित नाम) जब अपने चार साल के बच्चे के भत्ते लेने के लिए सरकारी केंद्र में पहुंची तो वहां उससे शादी का प्रमाण पत्र मांगा गया। लेकिन सिंगल मदर होने के कारण झांग के पास ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं था। लिहाजा उसे खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

चीन में सरकार की ओर से बच्चे के वयस्क होने तक सरकार की ओर से हर बच्चे के लिए लगभग साढ़े तीन लाख रुपए दिए जाते हें। लेकिन झांग जैसी सिंगल मदर्स को ये भत्ता नहीं मिल पा रहा है। जबकि चीन सरकार घटती आबादी को लेकर चिंता में है। 2021 में चीन 1.2 करोड़ बच्चे पैदा हुए। ये चीन में 1978 के बाद सबसे कम जन्मदर है। चीन की शादीशुदा महिलाओं की फर्टिलिटी रेट दुनिया में सबसे कम 1.3 है। चीन ने मई, 2021 में ही अपनी दशकों पुरानी एक बच्चे की नीति में बदलाव कर एक परिवार में तीन बच्चों की मंजूरी प्रदान की है।

सरकार अधिक दिनों के मातृत्व अवकाश और सब्सिडी दे रही है लेकिन सिंगल मदर्स के लिए कोई गुजारा भत्ता नहीं दिया जा रहा है। जबकि चीन में तलाकशुदा और विधवाओं को बच्चों के लिए गुजारा भत्ता दिया जाता है। अविवाहित माताएं 2016 के बाद अपने बच्चों का होकोऊ प्रमाण-पत्र पा सकती हैं जिससे कि उन्हें स्कूल में प्रवेश मिल पाता है। इससे पूर्व बच्चों के होकोऊ प्रमाण-पत्र के लिए माता-पिता का नाम होना जरूरी होता था।

रेनबो लॉयर्स लड़ रहे हैं सिंगल मदर्स के हकों की लड़ाई

चीन में एक एनजीओ रेनबो लॉयर्स सिंगल मदर्स के भत्तों के लिए संघर्ष कर रहा है। एनजीओ ने हाल ही में एक ऑनलाइन सर्वे कराया जिसमें चीन की दो हजार से ज्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया। इसमें हर दस में से नौ महिलाओं ने कहा कि सिंगल मदर्स को विवाहित महिलाओं के समान ही भत्ते मिलने चाहिए। उधर, चीन में पिछले साल आठ लाख ही शादियां हुईं ये आंकड़ा भी सात साल में सबसे कम है।