अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री संकट में:भारतीय टेलेंट के बिना पूरा नहीं हो रहा कंपनियों का टारगेट, साइंस डिग्री होल्डर्स को मिल सकती है छूट

न्यूयॉर्कएक महीने पहले
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अमेरिका में विदेशी प्रोफेशनल को रोकने की नीति के तहत ग्रीन कार्ड वीजा सीमित करने के नुकसान दिखने लगे हैं। प्रोफेशनल्स की कमी के चलते अमेरिकी डिफेंस और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री खोखली होती जा रही है। अमेरिका एक्सपर्ट्स को डर है कि कहीं टेलेंट की कमी के चलते अमेरिका, टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपना वर्चस्व न खो दे। ऐसे में अमेरिकी संसद, स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए डिग्री धारकों को ग्रीन कार्ड की सीमा से छूट देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। जिससे अमेरिकी का चीन पर विज्ञान और तकनीकी का दबदबा बना रहे। 50 से अधिक पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा अफसरों ने संसद को पत्र लिख है। उन्होंने पत्र में कहा कि पेशेवरों की कमी के चलते कुछ अहम रक्षा उद्योग और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री अरबों के निवेश के बाद अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है। अमेरिकी राज्य एरिजोना में इंजीनियरों की काफी कमी है, जिसके चलते ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी अपना टारगेट पूरा नहीं कर सका।

अमेरिका को साइंस-टेक्नोलॉजी का टेलेंट देता है भारत
इस प्लांट पर करीब 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनियों को काम आउटसोर्स करना पड़ रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए किए जा रहे संशोधन का सबसे ज्यादा फायदा भारतीयों को मिल सकता है। भारत उन 2 देशों में से एक है, जो साइंस-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका को टेलेंट देता है।

अमेरिकी कांग्रेस को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘चीन सबसे अहम तकनीकी और जियो पॉलिटिक्स प्रतियोगी है। जिसका अमेरिका ने हाल के दिनों में सामना किया है। दुनिया की स्टेम प्रतिभा के बिना अमेरिका के लिए लड़ाई कठिन होगी। पत्र में कहा गया है प्रस्तावित कानून के हिस्से के रूप में स्टेम पीएचडी स्नातकों को मौजूदा ग्रीन कार्ड कैप से छूट दी जाए। स्टेम मास्टर डिग्री स्नातकों को भी छूट दी जाए, बशर्ते वे सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा-संबंधित उद्योगों में ही काम करें।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह बिल चीन के साथ प्रतिस्पर्धी बने रहने की अमेरिकी रणनीति का केंद्र होना चाहिए। स्टेम प्रतिभा के बिना राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया जा सकता है। अमेरिका सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में चीन से बहुत पीछे है।

अमेरिका में सेमीकंडक्टर का उत्पादन घटा
1990 में अमेरिका ने दुनिया के लगभग 40% सेमीकंडक्टर बनाए। जबकि, आज देश केवल 10% सेमीकंडक्टर बनाता है। इस बीच, चीन न केवल दशक के भीतर सेमीकंडक्टर बाजार पर हावी होने का इरादा रखता है, बल्कि इससे चिप्स की वैश्विक आपूर्ति को भी खतरा है। जिनमें से तीन-चौथाई से अधिक पहले से ही पूर्वी एशिया में उत्पादित होते हैं।
डायनेमिक रैंडम-एक्सेस मेमोरी चिप्स की स्थिति और भी अधिक जोखिम भरी है, जिनमें से वर्तमान में 93% ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन में बनते हैं। लीडिंग-एज लॉजिक चिप्स के मामले में अमेरिका कोई उत्पादन नहीं करता है।
कनाडा जा रहे प्रोफेशनल
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी बताते हैं कि इस प्रावधान को अमेरिकी प्रतिस्पर्धा अधिनियम में शामिल किए जाने के बाद भारत को बहुत कुछ हासिल होगा। वर्तमान में, रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में 50% उन्नत डिग्री धारक विदेशी हैं। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में यह आंकड़ा 63% है। दूसरी तरफ, अप्रवासियों पर सख्ती के चलते अमेरिका में रहने वाले प्रोफेशनल कनाडा जैसे देश का रुख कर रहे हैं। 2017 और 2019 के बीच इस ट्रेंड में 128% की बढ़त देखी गई है।