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अमेरिका / ट्रम्प प्रशासन में भारतीयों का एच-1बी वीजा आवेदन सबसे ज्यादा रद्द हुआ, इस साल यह दर 24% पहुंची



वीजा संबंधी जानकारी यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) जारी करती है। वीजा संबंधी जानकारी यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) जारी करती है।
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वीजा संबंधी जानकारी यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) जारी करती है।वीजा संबंधी जानकारी यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) जारी करती है।

  • नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के मुताबिक- ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय कंपनियों को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया
  • एच-1 बी वीजा उन कंपनियों द्वारा विदेशी लोगों को दिया जाता है, जिन्हें विशिष्ट योग्यता वाले कर्मचारी की आवश्यकता होती है

Dainik Bhaskar

Nov 06, 2019, 08:59 PM IST

वॉशिंगटन. ट्रम्प प्रशासन की सख्त नीतियों के कारण अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों का एच-1बी वीजा आवेदन सबसे ज्यादा रद्द किया गया। यह बात अमेरिकी थिंक टैंक नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आई। इसके मुताबिक, वीजा रद्द करने की दर 2015 में जहां 6% थी, वहीं वर्तमान वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में यह दर 24% पर पहुंच गई है। यह रिपोर्ट यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है।

 

एच-1 बी वीजा गैर-आव्रजक वीजा है। यह वीजा अमेरिकी कंपनियां द्वारा उन विदेशी कर्मचारियों को जारी किया जाता है, जिन्हें विशिष्ट योग्यता वाले कर्मचारी की आवश्यकता होती है। तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इस पर निर्भर होती है। अध्ययन में सामने आया कि ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय कंपनियों को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया और यहां की कंपनियों का एच-1बी वीजा आवेदन सबसे ज्यादा रद्द किए गए। 

 

इस साल एप्पल के लिए यह दर 2% ही बनी रही

उदाहरण के रूप में, 2015 में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और गूगल में दायर एच-1बी वीजा आवेदनों में केवल 1% आवेदन खारिज होता था। वहीं, 2019 में यह दर बढ़कर क्रमश: 6, 8, 7 और 3% हो गई। हालांकि, एप्पल के लिए यह दर 2% ही बनी रही। इस अवधि में, टेक महिंद्रा के लिए यह वीजा रद्द करने की दर 4% से बढ़कर 41% हो गई, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए 6% से बढ़कर 34%, विप्रो के लिए 7 से बढ़कर 53% और इंफोसिस के लिए 2% से बढ़कर 45% पर पहुंच गई। 

 

ट्रम्प ने 2017 में ‘बाई अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन’ आदेश जारी किया था

आईटी सेवाएं या पेशेवर मुहैया कराने वाली कम से कम 12 कंपनियों के लिए आवेदन रद्द करने की दर 2019 की पहली तीन तिमाही में 30% से अधिक रही। इन कंपनियों में एक्सेंचर, कैपजेमिनी आदि शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर कंपनियों के लिए यह दर 2015 में महज 2 से 7% के बीच थी। ट्रम्प ने 2017 में ‘बाई अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन’ नामक कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य अमेरिकी सामान को अधिक से अधिक खरीदने और अमेरिकी लोगों को नौकरी में प्राथमिकता देना था। 

 

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