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भास्कर ओरिजीनल:क्वाड देशों के प्रमुखों ने चीन से निपटने के रास्ते तलाशे, वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन के जरिए चीन को चुनौती देगा क्वाड

23 दिन पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली
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चीन दुनिया में मैन्युफैक्चरिंग का हब कहा जाता है। दुनिया की तमाम कंपनियां अपने उत्पादों का निर्माण वहां करती हैं। यह चीन की सबसे बड़ी ताकत है। इसी के दम पर वह मनमानी कार्रवाई भी करता है। लिहाजा, क्वाड (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) देशों ने वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन से चीन को चुनौती देने की तैयारी की है।

कोरोना के बाद अमेरिका में हुई क्वाड की पहली व्यक्तिगत शिखर बैठक में इस विकल्प पर विचार किया गया है। इस तरह के अन्य विकल्पों पर भी बात हुई। मुख्य रूप से चीन की सामरिक, व्यावसायिक और विस्तारवादी चुनौती के ही मद्देनजर गठित क्वाड की यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बुलाई थी।

इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई तथा जापानी समकक्षों क्रमश: स्कॉट मॉरिसन व योशीहिदे सुगा ने भी हिस्सा लिया। बताया जाता है कि इसमें सेमीकंडक्टर और नेक्स्ट जनरेशन टेलीकाॅम टेक्नाेलाॅजी के क्षेत्र में चीन काे टक्कर देने के उपाय तलाशने पर भी सहमति बनी है। आने वाले दिनाें में क्वाड देशाें के अधिकारी इसकी याेजना तैयार करेंगे।

क्वाड नेताओं ने जलवायु परिवर्तन, संवेदनशील अधाेसंरचना और महामारी में सहयाेग का जिक्र भी किया। हालांकि बाइडेन, माेदी सहित किसी नेता ने अपने भाषणाें में चीन का जिक्र नहीं किया,पर क्वाड के हर एजेंडे के पीछे चीन से निपटने की तैयारियाें की झलक दिखी है।

भारत अगले महीने 80 लाख वैक्सीन निर्यात करेगा
प्रधानमंत्री मोदी ने वैक्सीन निर्यात फिर शुरू करने का वादा किया। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया कि जाॅनसन एंड जाॅनसन की 80 लाख डाेज अगले महीने एशिया प्रशांत देशाें काे दी जाएंगी। अक्टूबर अंत तक यह तैयार हाे जाएंगी।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘क्वाड की एक अरब वैक्सीन निर्माण और वितरण की पहली प्रमुख पहल सही राह पर है। अमेरिका ने 2022 के अंत तक भारत निर्मित एक अरब वैक्सीन के दुनिया में वितरण की घाेषणा की थी।’

विशेषज्ञ बोले- चीन से सीधे टकराव के बिना चेतावनी
क्वाड की इस बैठक काे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ एशिया में अमेरिकी प्रभाव के सबसे अहम माैके के रूप में देख रहे हैं। ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पाॅलिसी इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विश्लेषक मैल्कम डेविस ने कहा, ‘क्वाड एशिया का नाटाे नहीं है। लेकिन यह साफ ताैर पर सुरक्षा में सहयाेग की दिशा में बढ़ रहा है। यह एशिया प्रशांत क्षेत्र में बहुत अहम भूमिका वाला संगठन बन गया है।’ वहीं, ट्रम्प प्रशासन में दक्षिण और मध्य एशिया नीति की प्रमुख रहीं लीसा कर्टिस का कहना है, ‘जाे भी चीन के खिलाफ मददगार दिखाई देगा, भारत उसका स्वागत करेगा।’

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