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पूर्व आईआईटीयन का इनोवेशन:कोरोना समेत सभी वायरस को खत्म कर देता है ‘हेकोल’ कपड़ा, डीआरडीओ व इसरो ने की डील, यूएन और रेलवे ने भी मास्क बनवाए

5 महीने पहलेलेखक: दुबई से भास्कर के लिए शानीर सिद्दीकी
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दीप्ति, हेकोल से बने हेडगियर के साथ। - Dainik Bhaskar
दीप्ति, हेकोल से बने हेडगियर के साथ।

क्या संभव है कि कोई कपड़ा 99% यूवी रेज रोक सके, 95% प्रदूषण को फिल्टर करने के अलावा वायरस व बैक्टीरिया को मार दे। ऐसा ही इनोवेशन आईआईटी मद्रास की पूर्व छात्रा और 23 देशों में काम कर चुकीं दीप्ति नथाला ने किया है। उन्होंने ‘हेकोल’ (हेल्दी कवर फॉर ऑल) कपड़ा विकसित किया है। यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है। डीआरडीओ व इसरो ने भी इन्हें उत्पाद बनाने को कहा है। दुबई एक्सपो में इन्हें सराहा गया है, इस इनोवेशन संघर्ष की कहानी, दीप्ति के शब्दों में...

मध्य पूर्व और अमेरिका के देशों में करीब एक दशक तक काम करने के बाद मैं 2018 में हैदराबाद लौट आई। तब महसूस किया कि लंबे समय तक विदेश में रहने के बाद शरीर भारतीय पर्यावरण के अनुकूल नहीं रह गया है। शहर में ड्राइव के दौरान अक्सर सिरदर्द और त्वचा में समस्या होने पर लगा कि प्रदूषण से बचाव जरूरी है। रिसर्च के दौरान पता चला कि महिलाएं जो स्कार्फ लपेटती हैं, वो प्रदूषण, वायरस रोकने में कारगर नहीं है। फिर हमने कपड़े को ‘बॉडीगार्ड मॉलिक्यूल’ से बांधने की प्रक्रिया मालूम की।
मैं नई नैनो टेक्नोलॉजी को कपड़े से जोड़ना चाह रही थे, रिसर्च में 80 बार फेल हुई, पर मुझे भरोसा था कि यह संभव है, ऐसा ही हुआ। 2019 में डिब्बू सॉल्युशंस लॉन्च की। पहले उत्पाद लोकल लेवल पर बेचे। पर महामारी के दौरान केंद्र के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने सिर्फ मास्क बनाने पर फोकस करने को कहा। हमें भारतीय रेलवे, यूनाइटेड नेशंस, पर्यटन व खनन मंत्रालय से भी ऑर्डर मिले।
सेना के अनुसंधान विभाग डीआरडीओ ने उन सैनिकों के लिए कपड़े बनाने को कहा है, जिनकी तैनाती करगिल जैसे ऊंचाई वाले मोर्चों पर होती है। उन्हें यूवी किरणों से स्किन की बीमारी का खतरा रहता है। हेकोल सामान्य सर्दी के साथ कोरोना और एच1एन1 जैसे वायरसों पर भी प्रभावी है। जर्मनी के एच1एन1 वायरस इनहिबिशन टेस्टेड एट ब्यूरो वेरिटास ने इसे सर्टिफाइड किया। एनएबीएल, बीटीआरए और नेल्सन लैब्स पहले ही इसे प्रमाणित कर चुकी हैं।
हमारे उत्पाद वायरस रोकने के साथ उन्हें खत्म भी करते हैं। नेनो प्रोडक्ट को कपड़े के साथ मिलाने से उसकी लाइफ 6 हजार वॉश तक रहती है। दुनियाभर में ऐसे उत्पाद लगभग 60 से 100 वॉश तक ही चलते हैं। दुनिया का यह पहला प्रोडक्ट है जो यूवी रेज, प्रदूषण व वायरस पर एक साथ काम करता है। 8 साल की उम्र में मां को खो दिया था। इसलिए संघर्ष तो बचपन से ही था।
2007 से 2017 तक मल्टीनेशनल्स के लिए 23 देशों में काम किया। पर इसमें जुनून नहीं था। इसलिए लौट आई। समाज और रिश्तेदारों से अवांछित टिप्पणियां झेलीं। अकेली लड़की बड़े फैसले ले, तो शोर बहुत होता है। कहीं से मदद नहीं मिली, पेटेंट भी खुद के खर्चे पर करवाया। हाल में दुबई में निवेश के लिए पिचिंग की है। तेलंगाना सरकार ने भी हमारे उत्पादों को शोकेस किया है। कंपनी की वैल्यू 100 करोड़ रु. आंकी गई है। उम्मीद है, जल्द खासा निवेश जुटा लेंगे।’
-दीप्ति

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