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हॉन्गकॉन्ग 23 साल पहले ब्रिटेन से अलग हुआ था :हॉन्गकॉन्ग को आज ही के दिन चीन को सौंपा गया था; तब यहां के लोगों को ज्यादा आजादी मिली, जो सुरक्षा कानून से खतरे में

हॉन्गकॉन्ग14 दिन पहले
23 साल पहले 1 जुलाई 1997 को ब्रिटेन ने हॉन्गकॉन्ग चीन को सौंपा था। इस मौके पर गोल्डन बाउहिनिया स्क्वायर पर कार्यक्रम हुआ।
  • ब्रिटेन ने 1997 में 1 जुलाई को एक देश दो व्यवस्था के तहत हॉन्गकॉन्ग को चीन को सौंपा था
  • हॉन्गकॉन्ग को 50 साल तक विदेश और रक्षा मामलों को छोड़कर राजनीतिक और आर्थिक आजादी मिली थी
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ब्रिटेन ने 1997 में 1 जुलाई को हॉन्गकॉन्ग को चीन को सौंपा था। आज हॉन्गकॉन्ग को ब्रिटेन से अलग हुए 23 साल हो गए हैं। इस मौके पर चीन ने हॉन्गकॉन्ग में ‘एंटी प्रोटेस्ट’ लॉ लागू किया है, जो आज से प्रभावी हो जाएगा। इस मौके पर एक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें हॉन्गकॉन्ग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरी लेम समेत कई लोग शामिल हुए। 

1841 के बाद से 1997 तक हॉन्गकॉन्ग ब्रिटेन के कब्जे में था। इसे चीन को वन कंट्री टू सिस्टम समझौते के तहत सौंपा गया था। इसके तहत हॉन्गकॉन्ग के लोगों को विशेषाधिकार मिले थे, जो चीन के लोगों को हासिल नहीं थी।

ब्रिटेन ने एक देश दो व्यवस्था के तहत हॉन्गकॉन्ग को चीन को सौंपा था। इस समझौते के तहत हॉन्गकॉन्ग को ऐसी आजादी मिली है, जो मेनलैंड चाइना को नहीं मिली है। जैसे कि हॉन्गकॉन्ग में अभिव्यक्ति की आजादी और स्वतंत्र न्यायपालिका है, जो चीन में नहीं है। इन आजादी के चलते ही हॉन्गकॉन्ग को विशेष दर्जा हासिल है।

हॉन्गकॉन्ग में 1 जुलाई से नया सुरक्षा कानून प्रभावी हो गया। कहा जा रहा है कि इस कानून से शहर की आजादी को खतरा है। आलोचकों का कहना है कि इससे शहर की पहचान खत्म हो जाएगी।

हॉन्गकॉन्ग के लोगों को राजनीतिक और आर्थिक आजादी मिली थी

नए सुरक्षा कानून आने के बाद वहां के लोगों को अब अपनी आजादी खत्म होने का डर सताने लगा है। हालांकि, जब ब्रिटेन ने चीन को हॉन्गकॉन्ग सौंपा था, 50 सालों तक विदेश और रक्षा मामलों को छोड़कर राजनीतिक और आर्थिक आजादी मिली थी।

कार्यक्रम में हॉन्गकॉन्ग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरी लेम और अन्य लोग मौजूद थे। चीन के नेताओं का कहना है कि नए कानून से शहर में स्थिरता आएगी। साथ ही देशद्रोह और आतंकवाद जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों को सजा मिल सकेगी।

लोगों से प्रदर्शन करने का अधिकार छीन जाएगा

वहीं, नए सुरक्षा कानून के आने के बाद आलोचकों का कहना है कि यह कानून हॉन्गकॉन्ग की आजादी को खत्म कर देगा। वहीं, देश के नेताओं का कहना है कि इस कानून से यहां स्थिरता आएगी। लोग अब प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। कानून के तहत हॉन्गकॉन्ग में देशद्रोह, आतंकवाद, विदेशी दखल और विरोध करने जैसी गतिविधियों के लिए दोषी व्यक्ति को अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान होगा।

चीन के नए सुरक्षा कानून का हॉन्गकॉन्ग के लोग और अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देश विरोध कर रहे हैं। वहीं, चीन ने विदेशी हस्तक्षेप पर कहा कि यह हमारा आंतरिक मामला है, कोई और इसमें टांग न अड़ाए।

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आलोचकों ने कहा- यह कानून हॉन्गकॉन्ग की स्वतंत्रता कमजोर करेगा, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों ने इसका विरोध किया था

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