हॉन्गकॉन्ग / घर बनाने से ज्यादा महंगी ‘दो गज जमीन’, अस्थिकलश दफनाने के लिए डेढ़ करोड़ रु. में मिल रहा टुकड़ा



भस्म दफनाने के लिए हॉन्गकॉन्ग में जमीन की कमी। भस्म दफनाने के लिए हॉन्गकॉन्ग में जमीन की कमी।
लॉकर्स में रखे जा रहे अस्थिकलश। लॉकर्स में रखे जा रहे अस्थिकलश।
2016 में एक क्रूज शिप को रेस्त्रां में बदलने के साथ उसमें 48 हजार अस्थिकलशों के लिए भी जगह बनाने का प्रस्ताव था। 2016 में एक क्रूज शिप को रेस्त्रां में बदलने के साथ उसमें 48 हजार अस्थिकलशों के लिए भी जगह बनाने का प्रस्ताव था।
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भस्म दफनाने के लिए हॉन्गकॉन्ग में जमीन की कमी।भस्म दफनाने के लिए हॉन्गकॉन्ग में जमीन की कमी।
लॉकर्स में रखे जा रहे अस्थिकलश।लॉकर्स में रखे जा रहे अस्थिकलश।
2016 में एक क्रूज शिप को रेस्त्रां में बदलने के साथ उसमें 48 हजार अस्थिकलशों के लिए भी जगह बनाने का प्रस्ताव था।2016 में एक क्रूज शिप को रेस्त्रां में बदलने के साथ उसमें 48 हजार अस्थिकलशों के लिए भी जगह बनाने का प्रस्ताव था।

  • जमीन की बढ़ती कीमतों के चलते ज्यादातर लोग अस्थियों को एक पार्क पर बिखेर देते हैं, इसे ग्रीन बुरियल कहा जाता है
  • सरकारी लॉकर में अस्थिकलश रखने के लिए 22 हजार रु. सालाना देने होते हैं, लेकिन यहां भी 4 साल की वेटिंग

Apr 28, 2019, 08:07 AM IST

हॉन्गकॉन्ग. यहां जमीन के भाव आसमान छू रहे हैं। चिता की राख दफनाने के लिए अगर आपको छोटा सा जमीन का टुकड़ा चाहिए तो इसके लिए 1 लाख 80 पाउंड (करीब एक करोड़ 62 लाख रुपए) चुकाने होंगे। इतनी कीमत में पॉश इलाके में प्रति वर्गफीट के हिसाब से जमीन मिल सकती है। जमीन की बढ़ती कीमतों असर यह है कि 4 लाख अस्थिकलश अभी भी दफनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

मृतकों के परिजन के लिए खासी मुश्किल

  1. हॉन्गकॉन्ग फ्यूनरल बिजनेस एसोसिएशन के चेयरमैन क्वोक होई पोंग के मुताबिक- मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए प्रतिवर्ग फीट जमीन की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। लोग चिता की राख को दफनाने की बजाय उसे लॉकर में रखने पर तरजीह दे रहे हैं।

  2. हॉन्गकॉन्ग में कहीं भी दफनाने के लिए प्लॉट की कीमत 5 लाख पाउंड (44.5 लाख रुपए) तक है। शहरी इलाकों में फैले कॉन्क्रीट के जंगल के चलते जगह कब्रिस्तान के लिए काफी कम रह गई है। लिहाजा नए शवों को दफनाना मुश्किल होता जा रहा है। जगह की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक साल में देश में 48 हजार लोगों की मौत हुई। इनमें से 90% का दाह संस्कार किया जा चुका है।

  3. सरकारी लॉकर में अस्थिकलश रखने के लिए सालभर के 2800 हॉन्गकॉन्ग डॉलर (करीब 22 हजार रुपए) चुकाने होते हैं, लेकिन यहां भी जगह के लिए लोगों को चार साल तक इंतजार करना पड़ रहा है। जगह न मिलने के चलते लोगों को प्राइवेट लॉकरों में भस्म का पात्र रखना पड़ रहा है, जहां जगह एक जूते के डिब्बे से ज्यादा नहीं होती।

  4. हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी में सोशल वर्क की प्रोफेसर सेसिला चान कहती हैं- मेरी मां का देहांत पिछले नवंबर में हो गया था। मैंने उनका अंतिम संस्कार करना ही बेहतर समझा। इसके बाद उनकी भस्म को एक पार्क में बिखेर दिया। दफनाने के लिए आसमान छूती कीमत में जमीन खरीदने से बेहतर मुझे यही विकल्प लगा। इस तरह से चिता की राख बिखेरने को स्थानीय लोग ग्रीन बुरियल कहते हैं।

  5. प्राइवेट लॉकरों में भस्म रखने के लिए भी सरकार ने नियम बनाए हैं ताकि इनके ऑपरेटर लोगों से मनमानी कीमत न वसूल सकें। इसके लिए 2017 में एक ऑर्डिनेंस लाया गया था। इसमें निजी ऑपरेटर के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा। लिहाजा कम लोगों को ही प्राइवेट लॉकरों के लिए लाइसेंस मिल पाए हैं।

  6. फ्यूनरल बिजनेस एसोसिएशन के चेयरमैन क्वोक कहते हैं- कुछ लोगों को ही प्राइवेट लॉकर रखने की अनुमति मिली है, इसलिए उसकी कीमतें ज्यादा हैं। मुझे लगता है कि ज्यादातर को लाइसेंस मिलने के बाद इसकी कीमतों में भी 30% का इजाफा होगा। फ्यूनरल पार्लरों में भस्म पात्र रखने के लिए हर महीने 7 हजार रुपए तक चुका रहे हैं।

  7. दफनाने के लिए कम पड़ती जगह के मद्देनजर एक कंसल्टेंसी फर्म 2012 में समुद्र पर तैरते कब्रिस्तान का डिजाइन पेश किया गया था। इसमें 7 लाख 40 भस्म पात्रों के रखने के लिए जगह बनाए जाने की बात कही गई थी। फर्म का कहना है कि सरकार इसके बारे में सोचने के लिए काफी वक्त लगा रही है।

  8. 2016 में भी निवेशकों की तरफ से एक प्रस्ताव आया था, जिसमें एक क्रूज शिप को रेस्त्रां में बदलने के साथ उसमें 48 हजार अस्थिकलशों के लिए भी जगह बनाने का प्रस्ताव था।

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