मजाक / भारतीय छात्र ने टिम कुक से पूछा- टिम एपल कैसे हैं; जवाब मिला- आपका मतलब समझ गया



टिम कुक (बाएं) और पलाश तनेजा। टिम कुक (बाएं) और पलाश तनेजा।
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टिम कुक (बाएं) और पलाश तनेजा।टिम कुक (बाएं) और पलाश तनेजा।

  • एपल की वर्ल्डवाइड कॉन्फ्रेंस में सोमवार को दिल्ली के पलाश तनेजा ने यह सवाल किया था
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मार्च में टिम कुक को गलती से टिम एपल कहा था, पलाश ने इस पर मजाक किया
  • पलाश दुनियाभर के उन 13 छात्रों में शामिल थे जिन्हें टिम कुक को अपने प्रोजेक्ट दिखाने का मौका मिला

Jun 05, 2019, 04:29 PM IST

कैलिफॉर्निया. एपल की वर्ल्डवाइड कॉन्फ्रेंस में सोमवार को एक भारतीय छात्र के सवाल ने लोगों को खूब हंसाया। एपल के सीईओ टिम कुक से दिल्ली के पलाश तनेजा (18) ने पूछा कि टिम एपल आप कैसे हैं? यह सुनते ही लोग जोरों से हंसने लगे। कुक ने भी उसी अंदाज में जवाब देते हुए कहा- हां, मैं अच्छा हूं और समझ गया कि आप क्या कहना चाहते हैं। इस साल मार्च में एक मीटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गलती से कुक को टिम एपल कह दिया था। लेकिन, पलाश ने गलती से नहीं बल्कि मजाक करने के लिए जानबूझकर ऐसा कहा।

कुक ने पलाश के प्रोजेक्ट की तारीफ की

  1. टिम कुक ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट तैयार करने वाले दुनियाभर के 13 छात्रों से मुलाकात की थी। इनमें भारत से सिर्फ पलाश थे। पलाश ने न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने कुक को न्यूरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग पर आधारित अल्गोरिदम का प्रोजेक्ट दिखाया जो यू-ट्यूब वीडियो की भाषा बदल सकता है।

  2. पलाश ने बताया कि उनके प्रोजेक्ट का प्रमुख मकसद लैंग्वेज को आसान बनाना है। भाषा की बाधा खत्म करने के लिए पलाश ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। यह प्रोजेक्ट 50 भाषाओं को ट्रांसलेट कर सकता है।

  3. टिम कुक ने पलाश के आइडिया की तारीफ की और इसके कामयाब होने की उम्मीद जताई। कुक चाहते हैं कि कोडिंग (कंप्यूटर प्रोग्रामिंग) स्कूलों में दूसरी भाषा बन जाए।

  4. पलाश ऑस्टिन में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में पढ़ते हैं। कोडिंग के प्रति उन्हें पिता से प्रेरणा मिली थी। उन्होंने पिता को एक्सेल शीट और विजुअल चार्ट पर काम करते हुए देखा था। कोडिंग में उन्होंने पहली कोशिश उस वक्त की थी जब वो 8वीं में पढ़ते थे।

  5. 10वीं की पढ़ाई के दौरान पलाश को डेंगू हो गया था। उस वक्त अस्पताल में बेड मिलने में दिक्कत हुई थी। तब आइडिया आया कि अस्पतालों में बेड मैनेज करने के लिए ऐप बनाया जाए। उन्होंने ऐसा टूल बनाया जो मशीन लर्निंग के जरिए डेंगू फैलने का अनुमान लगा सकता है। पलाश एजुकेशन से जुड़ा ऐप भी बना चुके हैं।

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