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अफगान तालिबान की राह पर TTP:पाकिस्तान तालिबान ने कहा- तीसरे देश में ऑफिस खोलने की मंजूरी दे इमरान सरकार, खटाई में पड़ी बातचीत

इस्लामाबाद8 दिन पहले

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इमरान खान सरकार के बीच अफगानिस्तान में जारी बातचीत खटाई में पड़ती नजर आ रही है। करीब एक महीने से दोनों पक्षों के बीच सीजफायर भी मुश्किल में दिखाई दे रहा है। TTP ने पाकिस्तान सरकार के सामने तीन मांगें रखी हैं। इनमें से एक है कि अफगान तालिबान की तर्ज पर पाकिस्तान तालिबान को भी किसी तीसरे देश (पाकिस्तान और अफगानिस्तान छोड़कर) में पॉलिटिकल ऑफिस खोलने की मंजूरी मिले। पाकिस्तान सरकार इस शर्त को किसी भी कीमत पर मानने के लिए तैयार नहीं हो सकती।

9 नवंबर से सीजफायर जारी
पाकिस्तान सरकार और TTP इसी महीने की 9 तारीख को सीजफायर के लिए राजी हुए थे। तब यह तय हुआ था कि दोनों पक्ष तब तक एक दूसरे पर हमले नहीं करेंगे जब तक बातचीत जारी है।

दोनों पक्षों के बीच पहले काबुल और फिर खोस्त में कई दौर की बातचीत हुई। इस बातचीत में अफगानिस्तान तालिबान और खासतौर पर हक्कानी ग्रुप मध्यस्थता कर रहा है। माना जा रहा है कि अफगान तालिबान के पाकिस्तान तालिबान पर बातचीत के लिए दबाव डाला था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच अफगानिस्तान में ही बातचीत हुई। इमरान सरकार स्थायी शांति समझौता चाहती है, लेकिन TTP ने कुछ अहम शर्तें सामने रख दी हैं।

TTP की क्या मांग
पाकिस्तान के अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के मुताबिक, तालिबान पाकिस्तान यानी TTP ने इमरान खान सरकार के सामने तीन मुश्किल मांगें रखी हैं। पहली- किसी तीसरे देश में पॉलिटिकल ऑफिस खोलने दिया जाए। दूसरी- फेडरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइबल एरियाज (फाटा) का मर्जर रद्द किया जाए और तीसरी- पाकिस्तान में शरिया कानून लागू किया जाए।

सरकार की तरफ से बातचीत कर रहे पक्ष का कहना है कि TTP की तीनों में से एक भी मांग नहीं मानी जा सकती। TTP का कहना है कि जब पाकिस्तान इस्लामी देश है तो यहां शरिया कानून लागू करने में क्या दिक्कत है? इसमें परेशानी यह है कि TTP अपने हिसाब से शरियत लागू करना चाहता है जबकि सरकार के मुताबिक, ये संभव नहीं है क्योंकि पाकिस्तान इस्लामिक देश होने के साथ रिपब्लिक भी है।

पाकिस्तान तालिबान का कहना है कि सरकार वादाखिलाफी कर रही है। (फाइल)
पाकिस्तान तालिबान का कहना है कि सरकार वादाखिलाफी कर रही है। (फाइल)

सरकार की शर्तें
बातचीत का आगे बढ़ना मुश्किल नजर आ रहा है। इसकी वजह है कि अगर TTP ने मुश्किल मांगें रखी हैं तो सरकार भी कुछ शर्तें रख रही है। सरकार ने TTP से कहा है- TTP सरकार को चैलेंज न करे। हथियारों समेत सरेंडर और पूर्व में किए गए हमलों के लिए मुल्क से माफी मांगे। तालिबान ने इन तीनों ही मांगों को ठुकरा दिया है। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अगर तालिबान ये तीनों शर्तें मान लेता है तो उसे आम माफी दी जा सकती है।

इमरान सरकार चाहती है कि अफगान तालिबान TTP को मनाने की गारंटी ले। अफगान तालिबान इसके लिए तैयार नहीं है। माना जा रहा है कि बातचीत को सफल बनाने के लिए स्थानीय कबीलों के नेताओं को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।