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मान गए इमरान:20 दिन बाद ISI चीफ के नाम को मंजूरी दी, बाजवा के चहेते नदीम अंजुम होंगे खुफिया एजेंसी के नए मुखिया

इस्लामाबाद7 महीने पहले

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर ताकतवर फौज के आगे हथियार डाल दिए। मंगलवार को खान ने खुफिया एजेंसी ISI के चीफ के पद पर लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद अंजुम के नाम को मंजूरी दे दी। आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने 6 अक्टूबर को इमरान के पास अंजुम का नाम भेजा था। इमरान अपने चहेते जनरल फैज हमीद को ही ISI चीफ बनाए रखना चाहते थे, लेकिन फौज के सामने 20 दिन बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया। खान ने मंगलवार को नदीम की नियुक्ति वाली फाइल पर सिग्नेचर कर दिए।

बाजवा और इमरान की मुलाकात
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जनरल बाजवा ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उनसे नए ISI चीफ के तौर पर जनरल नदीम के नाम को मंजूरी देने को कहा। इसके कुछ देर बाद इमरान ने फाइल पर दस्तखत कर दिए। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब प्रधानमंत्री किसी और को ISI की बागडोर देना चाहते थे और आर्मी चीफ किसी और का नाम आगे बढ़ा रहे थे।

पीएम और आर्मी चीफ के बीच चल रही इस रस्साकशी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। मीडिया में लगातार इस तरह की खबरें आ रहीं थीं कि जिस फौज ने इमरान को कुर्सी तक पहुंचाया, खान अब उससे ही जोर आजमाइश कर रहे हैं।

काबुल से शुरू हुई मुश्किल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISI चीफ जनरल फैज हमीद पिछले महीने आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा से मंजूरी लिए बगैर काबुल गए थे। वहां तालिबान नेताओं के साथ सेरेना होटल में टी-पार्टी अटैंड की थी। आरोप है कि उन्होंने वहां तालिबान की हुकूमत कायम करने में मदद की थी। जनरल फैज इमरान खान की पसंद थे और अगले साल आर्मी चीफ बनने वाले थे। बताया जाता है कि उनकी काबुल यात्रा से जनरल बाजवा के अलावा अमेरिका भी काफी नाराज था।

DG ISI की नियुक्ति का विशेषाधिकार प्रधानमंत्री के पास होता है, यानी इमरान ने ही फैज को DG ISI बनाया था और उन्होंने ही हटा दिया। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री आर्मी चीफ की सलाह पर यह फैसला लेता है। लिहाजा, यह कहा जा सकता है बाजवा की सलाह पर ही जनरल हमीद को हटाया गया। हालांकि, इमरान फैज को हटाने के पक्ष में नहीं थे।

कैसे फंसे हमीद
तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल के साथ ही करीब-करीब पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। दुनिया को पहले ही शक था कि पाकिस्तान फौज और ISI तालिबान की पूरी मदद कर रही है। सितंबर की शुरुआत में जनरल फैज हमीद चुपचाप काबुल पहुंचे। यहां एक ही फाइव स्टार होटल है। इसका नाम सेरेना होटल है। यहां वे तालिबान के आला नेताओं के साथ हाथ में चाय का प्याला लेकर कहकहे लगा रहे थे। संयोग से इसी होटल में ब्रिटेन की एक महिला जर्नलिस्ट मौजूद थी। उसने न सिर्फ फैज के फोटो लिए, बल्कि कुछ सवाल भी किए। इसके जवाब में फैज ने सिर्फ इतना कहा- ऑल इज वेल।

बस यहीं से यह खबर आग की तरह फैल गई। बाजवा और अमेरिका हमीद पर बिफर गए। इमरान पर उन्हें हटाने का दबाव बढ़ता चला गया।