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  • In India, Facebook Twitter Is Full Of Misleading Claims Of Treatment Of Corona, Due To Low Revenue Of Advertising, Fact Checking Is Negligible

ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म की रिपोर्ट में खुलासा:भारत में फेसबुक-ट्विटर पर कोरोना के इलाज के भ्रामक दावों की भरमार, विज्ञापन का कम रेवेन्यू मिलने से फैक्ट चेकिंग नहीं के बराबर

वॉशिंगटन11 दिन पहले
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भारत और अमेरिका में विज्ञापन कीमतों में अंतर है। यहां उतना पैसा नहीं मिलता। इसलिए कंपनी स्टाफ में निवेश करने में रुचि नहीं रखती और पोस्ट फिल्टर नहीं हो पातीं।  - Dainik Bhaskar
भारत और अमेरिका में विज्ञापन कीमतों में अंतर है। यहां उतना पैसा नहीं मिलता। इसलिए कंपनी स्टाफ में निवेश करने में रुचि नहीं रखती और पोस्ट फिल्टर नहीं हो पातीं। 

भारत में फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कोरोना के इलाज के भ्रामक दावों की भरमार है। ऐसे दावे हिंदी भाषा में अधिक हैं, क्योंकि इन कंपनियों के पास हिंदी भाषा से जुड़ी फैक्ट चेकिंग का कोई ठोस सिस्टम नहीं है। यह खुलासा ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म की रिपोर्ट में हुआ है।

इसके मुताबिक अप्रैल से मई के बीच 150 ऐसी पोस्ट सामने आईं, जिनमें कोरोना से इलाज के देशी तरीके बताए गए थे। बड़ी बात यह है कि इन्हें 10 करोड़ से अधिक लोग फॉलो कर रहे थे। इन पर निगरानी का आलम यह है कि जून तक ऐसी 150 में से बमुश्किल 10 पोस्ट को या तो हटाया गया या झूठी जानकारी देने का लेबल लगाया गया। इसी तरह ट्विटर पर भी एक हफ्ते में 60 से अधिक दावे सामने आए, जिन्हें 35 लाख लोगों ने फॉलो किया।

फैक्ट चेक साइट ऑल्ट न्यूज के प्रतीक सिन्हा के अनुसार फेसबुक और अन्य कंपनियों को गलत सूचनाओं से लड़ने के लिए अधिक स्टाफ की जरूरत है। लेकिन मुनाफाखोरी के कारण ऐसा नहीं किया गया है। भारत और अमेरिका में विज्ञापन कीमतों में अंतर है। यहां उतना पैसा नहीं मिलता। इसलिए कंपनी स्टाफ में निवेश करने में रुचि नहीं रखती और पोस्ट फिल्टर नहीं हो पातीं।

यूट्यूब : भाप लेने से कभी भी कोरोना न होने के दावे

यूट्यूब पर इलाज के तरीकों का प्रसार खूब होता है। एक वीडियो में स्वामी इंद्रदेवजी महाराज भाप लेने से कभी कोरोना न होने का दावा करते दिखे। यह भी कहा कि पूरा परिवार भाप ले तो बिना मास्क, सैनिटाइजर के यह शरीर को अंदर से सैनिटाइज करेगा। फेफड़े ठीक हो जाते हैं। जबकि डब्लूएचओ ने पिछले साल ही इसे लेकर चेतावनी जारी की थी। कई अध्ययनों में भी इसे खतरनाक बताया गया।

बाबा रामदेव को भी इसी सोशल मीडिया का सहारा

ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक रामदेव कोरोनिल किट से कोरोना के इलाज का दावा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ठीक से सांस न ले पाने वालों के लिए पोस्ट उनके वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं। ऑक्सफोर्ड की रिसर्च फेलो सुमित्रा बद्रीनाथन कहती हैं कि फेसबुक पर रामदेव की मौजूदगी करोड़ों डॉलर का सवाल है। इसलिए फेसबुक उनके भ्रामक पोस्ट भी हटा नहीं रहा है।

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