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पहली बार:न्यूयॉर्क में रैंकिंग प्रणाली से मेयर चुनाव, वोटर रैंक देंगे, ज्यादा वोट पाने वाला प्रत्याशी विजेता

न्यूयॉर्क2 महीने पहलेलेखक: नेट कोह
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अमेरिका के 8 राज्यों के कई शहरों में होते हैं रैकिंग प्रणाली से चुनाव। - Dainik Bhaskar
अमेरिका के 8 राज्यों के कई शहरों में होते हैं रैकिंग प्रणाली से चुनाव।

अमेरिका के न्यूयॉर्क में पहली बार मेयर चुनाव के लिए रैंकिंग प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें वोटरों को किसी एक उम्मीदवार को चुनने की अनिवार्यता नहीं होगी। वोटर अपनी पसंद के आधार पर पांच उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में रख सकेंगे। यह रैंकिंग प्रणाली अंतिम उम्मीदवार के चुनाव में निर्णायक साबित होगी। यह भी हो सकता है कि वोटर सभी उम्मीदवारों को खारिज कर दें। विशेषज्ञ इस प्रणाली को बोझिल बता रहे हैं।

अगर किसी भी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के वोटों का बहुमत नहीं हासिल होता है, तो फैसला तत्काल रनऑफ से होगा। रनऑफ का मतलब यह है कि सबसे कम प्रथम रैकिंग वाले उम्मीदवार को हटा दिया जाएगा। इनके वोट संबंधित वोटरों की दूसरी पसंद की रैकिंग में शामिल किए जाएंगे। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक कि एक उम्मीदवार बाकी वोटों का अधिकतम हासिल नहीं कर लेता।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था जटिल है। यह वोटरों को अधिक फैसले लेने के लिए मजबूर करती है। नतीजतन, कई वोटर ज्यादा उम्मीदवारों की रैकिंग नहीं करेंगे। इससे यह आशंका बनी रहेगी कि अगर वोटर ने पांचों वरीय उम्मीदवारों की रैंकिंग की होती तो नतीजे अलग हो सकते थे।अमेरिका के आठ राज्यों के कई शहरों में रैंकिंग प्रणाली लागू है।

सैन फ्रांसिस्को में अधूरी रैकिंग से बाजी पलट गई थी

विशेषज्ञों का कहना है कि रैकिंग के कारण खराब हुए वोटों का 1% भी निर्णायक हो सकता है। ऐसा ही एक मामला 2018 के सैन फ्रांसिस्को के मेयर चुनाव का है। इसमें प्रत्याशी लंदन ब्रीड 1% वोट से जीत गई थीं, जबकि 9% वोटरों ने ब्रीड या दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार मार्क लेनो की रैकिंग नहीं की थी।

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