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  • In The US, 97% Of Women Are Paying More Attention To Children's Education, 66% Believe That There Is No Support From Husbands.

न्यूयॉर्क टाइम्स से:अमेरिका में 97% महिलाएं बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रहीं, 66% ने माना कि पतियों से कोई सहयोग नहीं मिलता है- सर्वे

वॉशिंगटनएक वर्ष पहलेलेखक: क्लेयर कैन मिलर
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70% महिलाओं का कहना है कि लॉकडाउन के बाद से बच्चों की देखभाल समेत वे ही हर तरह के घरेलू काम में जुटी हुई हैं। - Dainik Bhaskar
70% महिलाओं का कहना है कि लॉकडाउन के बाद से बच्चों की देखभाल समेत वे ही हर तरह के घरेलू काम में जुटी हुई हैं।
  • लॉकडाउन में 20% पतियों का तर्क, घरेलू काम और बच्चों की जिम्मेदारी पत्नियों की ही
  • अप्रैल में लॉकडाउन के बाद 2200 परिवारों से बातचीत कर यह सर्वे किया गया

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के ताजा सर्वे के मुताबिक लॉकडाउन में 97% महिलाओं ने कहा कि वे घरेलू कामकाज के साथ अपने बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं जबकि सिर्फ 3% ने माना कि उनके पति भी इस ओर ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, पुरुष इस बात से साफ इनकार कर रहे हैं।

सर्वे में 20% पतियों ने तर्क दिया कि घरेलू कामकाज या बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी पत्नियों की ही है। अप्रैल में लॉकडाउन के बाद 2200 परिवारों से बातचीत कर यह सर्वे किया गया। 70% महिलाओं का कहना है कि लॉकडाउन के बाद से बच्चों की देखभाल समेत वे ही हर तरह के घरेलू काम में जुटी हुई हैं जबकि 66% महिलाओं ने कहा कि उन्हें इस मामले में पतियों की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला।

67% महिलाएं बच्चों को पढ़ा भी रही हैं जबकि पुरुषों की संख्या 29%

ऐसे दंपती, जो लॉकडाउन में संयुक्त रूप से वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, उनमें यह अंतर कम देखा गया। ऐसे दंपतियों में 67% महिलाएं बच्चों को पढ़ा भी रही हैं जबकि पुरुषों की संख्या 29% है। अमेरिका में एक पुरानी रिसर्च के मुताबिक ‘पुरुष जितना काम करते हैं, उससे ज्यादा आकलन करते हैं जबकि महिलाएं ज्यादा काम करती ही हैं।’ इस तथ्य को लॉकडाउन के पैमाने पर जांचने के लिए यह सर्वे किया गया था।

कोरोना की ज्यादा चिंता से हार्ट और इम्यून सिस्टम को खतरा, खुशी देने वाले काम करें
जेन ई ब्रॉडी: कोरोना के कारण लोगों में खौफ का माहौल पैदा हो गया है। ऐसे में तनाव लंबे समय तक बना रहा तो यह सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि एक हद तक चिंता करना वाजिब है लेकिन इसके बारे में लगातार पढ़ते रहने से  शारीरिक व मानसिक तौर पर बुरा असर पड़ता है। चिंता और घबराहट हार्ट डिसीज, पाचन, कमजोर इम्यून सिस्टम के जोखिम को बढ़ाती है।

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डेविड रोपिक बताते हैं कि इतिहास में ऐसा मौका नहीं आया, जब हर कोई एक ही चीज को लेकर चिंता कर रहा है। ऐसा कोई खतरा नहीं आया, जो 780 करोड़ लोगों की दुनिया में इतनी तेजी से फैला हो। विशेषज्ञ मरीजों को कोविड 19 की चर्चा के बजाए पॉजिटिव सोच लाने के लिए पेंडिंग काम पूरा करने, घर में साफ-सफाई की सलाह दे रहे हैं।

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