श्रीलंका / कोलंबो बंदरगाह को मिलकर विकसित करेंगे भारत-जापान, 49% प्रोजेक्ट पर होगा दोनों का हिस्सा



कोलंबो बंदरगाह। -फाइल कोलंबो बंदरगाह। -फाइल
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कोलंबो बंदरगाह। -फाइलकोलंबो बंदरगाह। -फाइल

  • श्रीलंका में चीन अभी हम्बनटोटा पोर्ट को विकसित कर रहा
  • चीन को कर्ज के बदले श्रीलंका अपना बंदरगाह 99 साल के लिए लीज पर देगा

Dainik Bhaskar

May 28, 2019, 04:01 PM IST

कोलंबो. चीन दुनियाभर में अपनी बेल्ट एंड रोड परियोजना का प्रसार कर रहा है। श्रीलंका में भी उसने परियोजना के तहत हम्बनटोटा पोर्ट को विकसित करने के लिए 1 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज दिया है। हालांकि, कर्ज न चुका पाने की स्थिति में श्रीलंका ने बदले में उसे 99 साल के लिए बंदरगाह लीज पर दिया है। अब चीन की इस कूटनीति से निपटने के लिए भारत, जापान और श्रीलंका कोलंबो बंदरगाह को मिलकर विकसित करेंगे। तीनों देश जल्द ही इसके लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगे।

 

अमेरिकी वेबसाइट ब्लूमबर्ग ने एक भारतीय अफसर के हवाले से दावा किया है कि कोलंबो बंदरगाह के पूर्वी हिस्से को भारत-जापान मिलकर विकसित करेंगे। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भारत श्रीलंका को आसान कर्ज मुहैया कराएगा। श्रीलंका 51% प्रोजेक्ट को नियंत्रित करेगा, जबकि भारत और जापान का बचे हुए 49% प्रोजेक्ट को नियंत्रित करेंगे।

 

जापान 40 साल के लिए कर्ज देगा

श्रीलंका के एक अफसर ने भी पुष्टि करते हुए कहा कि समझौता तय होने के बाद जापान 40 साल के लिए कर्ज देगा। इसके ऊपर कर्ज चुकाने के लिए 10 साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। जापान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता नत्सुको सकाता के मुताबिक, जापान 1980 से ही इस प्रोजेक्ट का समर्थन कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि समझौते को लेकर दोनों क्या कदम उठा रहे हैं।

 

श्रीलंका भारत को शिपिंग के क्षेत्र में साझेदार की तरह देख रहा

दो महीने पहले श्रीलंका के पोर्ट मिनिस्टर सगल रत्नायक ने संसद में बताया था कि बंदरगाहों के निर्माण के लिए जापान से क्रेन ली जा रही हैं। उन्होंने संकेत दिए थे कि श्रीलंका भारत को शिपिंग के क्षेत्र में साझेदार की तरह देख रहा है। चीन को हम्बनटोटा पोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव देने से पहले श्रीलंका ने भारत से ही निवेश पाने की कोशिश की थी। हालांकि, उस दौरान दोनों सरकारें सफल नहीं हो पाई थीं।

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