झड़प पर चीन के सरकारी मीडिया का तेवर:ग्लोबल टाइम्स ने लिखा- सैन्य टकराव दोनों देशों के हितों में नहीं, हम लंबी जंग के लिए पूरी तरह तैयार और एडवांटेज भी हमारे पास ही है

बीजिंग3 वर्ष पहले
यह फोटो 15 अक्टूबर 2016 की है। गोवा में आयोजित ब्रिक्स समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहुंचे थे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच आतंकवाद समेत कई मुद्दों को लेकर बातचीत हुई थी।
  • ग्लोबल टाइम्स ने टकराव का ठीकरा भारत पर ही फोड़ा, लिखा- तनाव की वजह भारतीय सेनाओं का घमंड और दुस्साहस
  • एडिटोरिटल में लिखा- भारत को दो गलतफहमियां हैं, उन्हीं की वजह से दोनों देशों की सीमा पर ऐसे हालात बने
  • चीनी सेना ने मारे गए अपने सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया ताकि दोबारा किसी तरह का टकराव न शुरू हो

लद्दाख की गालवन घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच हुए टकराव का ठीकरा पड़ोसी देश ने भारत के सिर ही फोड़ा है। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि चीन और भारत की सीमा पर लगातार तनाव की वजह भारतीय सेनाओं का घमंड और दुस्साहस है। सैन्य टकराव दोनों देशों के हितों में नहीं है, हम लंबी जंग के लिए पूरी तरह तैयार और एडवांटेज भी हमारे पास ही है। 

ग्लोबल टाइम्स ने अपने एडिटोरियल में लिखा है कि बॉर्डर के करीब भारतीय सेना इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रही है। उसने चीन के हिस्से में भी कुछ निर्माण किए हैं। इसके चलते ही दोनों पक्षों के बीच टकराव हो रहा है, क्योंकि चीन की सेना भारतीय सेना के निर्माण को रोकने की कोशिश कर रही है।

गलतफहमियों ने भारतीय सोच को प्रभावित किया

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा- पिछले कुछ साल से भारत ने दो गलतफहमियों के चलते सीमाई मुद्दों पर सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इनमें पहला है कि अमेरिका के बढ़ते दबाव के चलते चीन भारत के साथ खटास भरे रिश्ते नहीं चाहता है और ऐसे में वह भारतीय उकसावे का जवाब देने की इच्छा भी नहीं रखता है।

दूसरा कुछ लोगों की गलतफहमी है कि भारत की सेना की ताकत चीन से ज्यादा है। इन गलतफहमियों ने भारतीय सोच को प्रभावित किया है और चीन को लेकर भारत की नीतियों पर दबाव डाला है। चीन और भारत की ताकत के बीच का अंतर साफ है।

दोनों ओर से सैनिकों की मौत हुई
गालवन वैली में भारत और चीन की सेना के बीच इस बार जो झड़प हुई है। उसमें दोनों ओर से सैनिकों की मौत हुई। इससे यह साफ हो रहा है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर पैदा हुए हालात नियंत्रण में नहीं हैं। इस घटना के बाद से अभी तक दोनों सेनाओं ने संयम बरता है। यह दिखाता है कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए तनाव को कम करना चाहते हैं। उधर, चीनी सेना के इस झड़प में मारे गए अपनी सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया है ताकि दोनों तरफ की सेनाओं के बीच दोबारा किसी तरह के टकराव न शुरू हो।

गालवन घाटी में तनाव को कम होते देखना चाहते 
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि हम गालवन घाटी में तनाव को कम होते देखना चाहते हैं। हमें उम्मीद है कि भारत लद्दाख सीमा पर तैनात सैनिकों और इंजीनियरों का बेहतर प्रबंधन करेगा। साथ ही, दोनों सेनाओं के अफसरों के बीच हुई हाई लेवल मीटिंग में जो आम सहमति बनी थी उस पर अमल करेगा। अगर हालात शांत हो जाते हैं तो यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित होगा। हालांकि, इसके लिए दोनों देशों की सेनाओं को कोशिशें करनी होंगी।

चीन की जनता को सेना पर भरोसा करने के लिए कहा
ग्लोबल टाइम्से ने कहा- भारत के साथ सीमा विवाद के मुद्दे पर चीन की जनता को सरकार और पीपल्स लिबरेशन आर्मी पर भरोसा करना चाहिए। सीमा विवाद से निपटने के दौराव वे चीन की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों को बनाए रखेंगे। चीन के पास अपनी जमीन के हर एक इंच की सुरक्षा करने की ताकत और समझदारी है और वह अपने खिलाफ किसी रणनीतिक चाल को कामयाब नहीं होने देगा।