अमेरिकी मदद:भारत को यूएस से 1 करोड़ डोज संभव; भारतवंशी सांसद, विशेषज्ञों ने कहा- दी जा रही मदद नाकाफी

6 महीने पहलेलेखक: न्यूयॉर्क (अमेरिका) से भास्कर के लिए मोहम्मद अली
अमेरिका ने भारत समेत दूसरों देशों को 6 करोड़ एस्ट्राजेनेका वैक्सीन देने का वादा किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत की मदद के लिए वैक्सीन, रॉ मेटेरियल समेत अन्य उपकरण भारत भेजने की बात कही है। इस मदद को भारतीय अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने नाकाफी बताया है। इनका कहना है, भारत में महामारी की गंभीरता को देखते हुए, वर्तमान अमेरिकी सहायता पर्याप्त नहीं है। बाइडेन प्रशासन को ‘भारत के लिए भेजे जाने वाली ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर्स और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की सप्लाई को दोगुना करना चाहिए।’ साथ ही इन्होंने यह भी कहा कि भारत में बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण था कि बाइडेन प्रशासन इस संकट में भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मजबूती से खड़ा हो।

अमेरिका ने भारत समेत दूसरों देशों को 6 करोड़ एस्ट्राजेनेका वैक्सीन देने का वादा किया है। हालांकि, व्हाइट हाउस के अफसरों को अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें भारत की हिस्सेदारी कितनी होगी। लेकिन अधिकारियों का अनुमान है कि इसमें 1 करोड़ वैक्सीन भारत भेजी जा सकती हैं। 5 करोड़ निर्माण प्रक्रिया में हैं और वो भी कुछ हफ्तों में दुनियाभर में भेज दी जाएंगी। दूसरी ओर, कई एक्सपर्ट्स ने बताया कि इस अभूतपूर्व संकट के समय दुनिया को 6 करोड़ वैक्सीन भेजना नाकाफी है। हेल्थ गैप की एक्जीक्यूटिव डॉयरेक्टर एशिया रसेल कहती हैं कि 6 करोड़ डोज देना वैसा ही है, जैसे आग बुझाने के लिए बूंद का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिका में लाखों एस्ट्राजेनेका बर्बाद, स्टोरेज में रखी वैक्सीन पर भी खतरा

यूएस में एस्ट्राजेनेका के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं मिली है। लेकिन जरूरत से 55 करोड़ डोज अधिक संग्रहित की जा चुकी हैं। संभवतः इसलिए बाइडेन से मांग की जा रही है कि यह वैक्सीन भारत भेजी जाए, क्योंकि वहां मंजूरी मिल चुकी। जल्द न भेजा गया तो वैक्सीन की शेल्फ लाइफ खत्म हो जाएगी। प्रशासन के संज्ञान में जानकारी आई है कि अक्टूबर-जनवरी के बीच बनी लाखों डोज खराब होने से डर से फेंकी गईं। अभी स्टोरेज में रखी वैक्सीन जनवरी के बाद बनी है, जो जल्द खराब हो सकती है।
लाइसेंस लिए बिना दुनिया वैक्सीन की मांग को पूरा नहीं कर सकतेः रो खन्ना

सिलिकॉन वैली से सांसद रो खन्ना ने इस बात की सराहना की है कि वैक्सीन बनाने के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स कानून में छूट देना एक सही कदम है, क्योंकि आने वाले समय में भारत और दुनिया के अन्य देश आयात करने के बजाय वैक्सीन खुद बना सकेंगे। लेकिन एक ही चीज जो बाकी रह गई है, वो फाइजर मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन से वैक्सीन बनाने का लाइसेंस लेना, ताकि यह वैक्सीन भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों में भी बनाई जा सके।

भारत में रह रहे प्रेमा जयपाल के पिता को देनी पड़ी ऑक्सीजन

प्रेमा जयपाल के ऑफिस ने बताया कि भारत में रह रहे उनके माता-पिता दूसरी लहर की शुरुआत में संक्रमित हुए थे, जो तेजी से ठीक हो रहे हैं। प्रेमा भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद हैं जो हाल में भारत माता-पिता को देखने आईं थीं। उनके पिता 90 और मां 80 वर्ष की हैं। दोनों संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती किए गए थे और उनके पिता को ऑक्सीजन की आवश्यकता भी पड़ी थी।

रूस से आज भारत आएगी मदद की पहली खेप और अमेरिका से कल तक

नई दिल्ली | कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत की मदद के लिए अमेरिकी सहायता की पहली खेप गुरुवार-शुक्रवार के बीच आएगी। भारत ने इससे पहले अमेरिका के साथ एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खरीद और वैक्सीन के उत्पादन के लिए कच्चे माल की आपूर्ति का मुद्दा उठाया था। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने फोन पर कोरोना से पैदा हुए हालात पर चर्चा की है। उम्मीद है कि रूस से आने वाली मदद की पहली खेप भी आज आएगी।

डब्ल्यूएचओ का दावा- दुनिया के 17 देशों तक पहुंच गया है भारतीय वैरिएंट

भारत में कोरोना के तेजी से फैलने का सबसे बड़ा कारण डबल म्यूटेंट बताया जा रहा है। लेकिन अब भारत का ये वैरिएंट दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ये जानकारी दी है। डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि भारत का ये कोरोना म्यूटेंट दुनिया के करीब 17 देशों तक पहुंच चुका है। भारत के इस डबल म्यूटेंट को B.1.617 नाम दिया गया है। इस तरह का म्यूटेंट सबसे पहले भारत में मिला, इसीलिए इसे भारतीय म्यूटेंट कहा जा रहा है।

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