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अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत के ऊपर व्यापार में अच्छा बर्ताव न करने का आरोप; क्या हैं भारत-अमेरिका के बीच कारोबारी तनाव की वजहें?

6 महीने पहले
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  • पिछले साल अमेरिका ने भारत को जीएसपी से बाहर करने के साथ स्टील और एल्युमीनियम पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई थी
  • भारत ने जवाब में बादाम, अखरोट, सेब और स्टील समेत 28 प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़ा दिया था
  • डेटा लोकलाइजेशन के मुद्दे पर गूगल, अमेजन, फेसबुक समेत दिग्गज अमेरिकी कंपनियां भारत पर दबाव बना रही हैं

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने पहले दौरे में भारत आ रहे हैं। इसमें भारत को व्यापारिक सहूलियतें मिलने की उम्मीद है। पिछले साल अमेरिका के कुछ तरह के स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच खटास बढ़नी शुरू हुई थी। इसके अलावा अमेरिका ने भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (जीएसपी) प्रोग्राम से भी बाहर कर दिया था। इस प्रोग्राम के तहत अमेरिका विकासशील देशों को निर्यात में छूट देता है। इस प्रोग्राम के तहत भारत ने अमेरिका को करीब 600 करोड़ डॉलर के उत्पादों का निर्यात किया था। बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वो भारत से बड़ा व्यापार समझौता करना चाहते हैं, लेकिन यह डील भविष्य के लिए बचा कर रखी है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत अमेरिका के साथ कारोबार के क्षेत्र में अच्छा बर्ताव नहीं करता, लेकिन वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काफी पसंद करते हैं और दोनों अच्छे दोस्त हैं। 
 
अमेरिका के इस कदम के बाद भारत ने जून 2019 में बादाम, अखरोट, सेब और स्टील समेत 28 प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़ा दिया था। इससे अखरोट पर ड्यूटी 120%, काबुली चने और कुछ दालों पर ड्यूटी 70% बढ़ गई। ट्रम्प ने हार्ले डेविडसन मोटरबाइक पर ज्यादा टैरिफ का भी मुद्दा उठाया था। अमेरिका को आईटी प्रोडक्ट्स पर लगने वाली ड्यूटी पर आपत्ति है। मेडिकल उपकरणों की कीमत नियंत्रण पर भी अमेरिका को ऐतराज है। डेटा लोकलाइजेशन को लेकर अमेरिकी कंपनियां लगातार शिकायत कर रही हैं।
 
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव की प्रमुख वजहें

  1. जीएसपी से हटाना : जीएसपी प्रोग्राम के तहत अमेरिका 129 विकासशील देशों को व्यापार में छूट प्रदान करता है। 2018 में इस प्रोग्राम से फायदा लेने वाले देशों में भारत पहले नंबर पर था।
  2. पोल्ट्री : अमेरिकी से आयातित चिकन पर प्रतिबंध लगाने से दोनों देशों के बीच खटास बढ़ी।
  3. स्टील और एल्यूमीनियम टैरिफ मुद्दा : अमेरिका ने भारत समेत 12 देशों से आयातित स्टील और एल्यूमीनियम प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़ाया। अमेरिका के इस कदम के खिलाफ भारत डब्ल्यूटीओ पहुंचा।
  4. भारत की व्यापारिक नीतियां : अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने भी 28 अमेरिकी प्रोडक्ट पर टैरिफ बढ़ा दिया। इससे विवाद को और बढ़ावा मिला।
  5. वीसा मुद्दा : अमेरिका ने एच1-बी वीसा देने पर शिकंजा कसा है। वीसा फीस को दोगुना करने के साथ योग्यता के लिए सालाना आय को भी बढ़ा दिया गया है। इससे भारतीयों के लिए अमेरिका में अवसर कम हुए हैं।
  6. सोलर विवाद : अमेरिका का कहना है कि सोलर उपकरणों के लोकल सोर्सिंग पर भारत डब्ल्यूटीओ निर्णय का नहीं मान रहा है। नेशनल सोलर मिशन के तहत भारत ऊर्जा सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
  7. निर्यात सब्सिडी : भारत की निर्यात सब्सिडी पर अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में विरोध जताया है। अमेरिका कहा कहना है कि कमजोर विकासशील देशों द्वारा दी जाने वाली निर्यात सब्सिडी योजना में भारत नहीं आता। अमेरिका को भारत के न्यूनतम समर्थन मूल्य सब्सिडी पर भी आपत्ति है।
  8. विकासशील देशों का मुद्दा : ब्यूनस आयर्स में डब्ल्यूटीओ की बैठक में अमेरिका ने कहा था भारत और चीन विकासशील देशों को दी जाने वाली सुविधाओं के हकदार नहीं हैं। भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
  9. डेटा लोकजाइजेशन : डिजिटल क्षेत्र में भारत डेटा लोकलाइजेशन को लेकर विदेशी आईटी कंपनियों पर लगातार दबाव बना रहा है। गूगल, अमेजन, फेसबुक, फ्लिपकार्ट समेत सभी बड़ी कंपनियां भारत के इस कदम का विरोध कर रही हैं।

अमेरिका और भारत के बीच व्यापार
चीन के बाद अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अमेरिका के लिए भारत नौंवा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। गुड्स और सर्विसेज में अमेरिका और भारत के बीच 2018 में 142.6 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। भारत ने अमेरिका को 83.9 अरब डॉलर का निर्यात किया जबकि 58.7 अरब डॉलर का आयात किया। अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के अनुसार भारत को गुड्स और सर्विसेज के निर्यात से अमेरिका में 1.97 लाख नौकरियां पैदा होती हैं।

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