हिन्द महासागर में चीन ने भेजा जासूसी जहाज:भारत के मिसाइल टेस्ट की जानकारी ट्रैक कर सकता है, बाली तट के करीब पहुंचा

बीजिंग3 महीने पहले

भारत 10-11 नवंबर को व्हीलर आइलैंड (ओडिशा का अब्दुल कलाम द्वीप) से बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट करने वाला है। चीन ने इस मिसाइल टेस्ट से पहले हिंद महासागर में अपने जासूसी जहाज युआन वांग-6 को डिप्लॉय किया है। चीनी नौसेना का ये जासूसी जहाज वांग-5 कैटेगरी का है, जिसे अगस्त 2022 में श्रीलंका के हंबनटोटा में भेजा गया था। श्रीलंका में जहाज 6 दिनों तक तैनात था।

भारत को इस बात की चिंता है कि चीन अब उस मिसाइल को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है जिसका टेस्ट होने वाला है। चीन इन जहाजों की मदद से मिसाइल की ट्रैजेक्टरी, स्पीड, रेंज और एक्यूरेसी से जुड़ी अहम जानकारियां हासिल कर सकता है।

भारत के चिंता की वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस स्पेशियलिस्ट डेमियन साइमन ने बताया है कि भारत 10-11 नवंबर के बीच ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से एक मिसाइल टेस्ट कर सकता है। इस मिसाइल की फ्लाई रेंज 2,200 किमी की हो सकती है।

भारत ने इस मिसाइल टेस्ट को लेकर 10-11 नवंबर को बंगाल की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर तक नो फ्लाय जोन बनाए जाने की घोषणा की थी। इसलिए वेस्ट में श्रीलंका और ईस्ट में इंडोनेशिया के बीच उस एरिया को ब्लॉक कर दिया गया है, जो मिसाइल की टेस्टिंग रेंज में है।

बाली के तट पर पहुंच गया है वांग-6
युआन वांग-6 अब हिंद महासागर में आगे बढ़ गया है। समंदर में शिप्‍स के मूवमेंट को ट्रैक करने वाली मरीन ट्रैफिक के मुताबिक चीन का जासूसी जहाज युआन वांग-6 अब हिंद महासागर पार कर चुका है। फिलहाल वह बाली के तट के करीब है।

श्रीलंका ने नहीं मानी थी वांग-5 को एंट्री नहीं देने की अपील
इससे पहले अगस्त 2022 में वांग-5 भी दक्षिण चीन सागर में लौटने से पहले 6 दिनों तक श्रीलंका के हंबनटोटा में रुका था। जासूसी के खतरे को देखते हुए ही भारत ने श्रीलंका से इस शिप को हंबनटोटा में एंट्री न देने को कहा था, लेकिन बाद में श्रीलंका सरकार ने उसे एंट्री दे दी थी।

सैटेलाइट ट्रैकिंग में महारथी है चीनी जहाज
चीनी जासूसी शिप युआन वांग-5 को स्पेस और सैटेलाइट ट्रैकिंग में महारत हासिल है। चीन युआन वांग क्लास शिप के जरिए सैटेलाइट, रॉकेट और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM की लॉन्चिंग को ट्रैक करता है। इससे पहले चीन ने 2022 में जब लॉन्ग मार्च 5B रॉकेट लॉन्च किया था, तब यह शिप निगरानी मिशन पर निकला था। यह चीन के तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के पहले लैब मॉड्यूल की लॉन्चिंग की समुद्री निगरानी में भी शामिल था।

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भारत की टोह लेना आसान होगा

युआन वांग-5 मिलिट्री नहीं बल्कि पावरफुल ट्रैकिंग शिप है। ये शिप अपनी आवाजाही तब शुरू करते हैं, जब चीन या कोई अन्य देश मिसाइल टेस्ट कर रहा होता है। यह शिप लगभग 750 किलोमीटर दूर तक आसानी से निगरानी कर सकता है। 400 क्रू वाला यह शिप पैराबोलिक ट्रैकिंग एंटीना और कई सेंसर्स से लैस है। पढ़ें पूरी खबर...