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पाकिस्तान / 12 साल के बच्चे के लिए भारत-पाक ने प्रोटोकॉल तोड़े, पाक से आया बच्चा हार्ट सर्जरी के बाद लौटा; पिता बोले- भारत ने दिल जीत लिया

साबीह अपने माता-पिता के साथ। साबीह अपने माता-पिता के साथ।
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साबीह अपने माता-पिता के साथ।साबीह अपने माता-पिता के साथ।

  • अटारी में दो दिन तक फंसे रहने के बाद भारत-पाकिस्तान के पत्रकारों की मदद से कराची पहुंचा परिवार
  • 18 मार्च को 12 साल का साबीह अटारी बॉर्डर पहुंचा, पर सीमा पार नहीं कर सका, फिर 20 मार्च को कराची जा सका

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 03:35 PM IST

इस्लामाबाद से हनीन अब्बास. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद शायद ही कोई दिन ऐसा बीता हो, जब भारत-पाकिस्तान के बीच गोलीबारी की खबरें न मिली हों। लेकिन पिछले हफ्ते अटारी बॉर्डर पर भारत-पाकिस्तान दोनों देशों की सरकार ने एक 12 साल के लड़के के लिए सारे प्रोटोकॉल तोड़ दिए। सारी दुश्मनी भुला दी। दरअसल, पाकिस्तान का 12 साल का साबीह शिराज हार्ट की सर्जरी के लिए पिछले महीने नोएडा स्थित जेपी अस्पताल आया। साबीह कराची में रहता है, 18 फरवरी को वह अपने माता-पिता के साथ नोएडा पहुंचा। 25 फरवरी को उसी सर्जरी हुई। 16 मार्च तक ऑब्जर्वेशन के लिए साबीह को अस्पताल में ही रखा गया। 18 मार्च को जेपी अस्पताल से साबीह को छुट्टी मिल गई। उसके बाद तीनों अस्पताल से अटारी बॉर्डर पहुंचे। लेकिन अटारी से पाकिस्तान पहुंचने में साबीह और उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

12 साल का साहीब 18 फरवरी को अपने माता-पिता के साथ नोएडा आया था।

साबीह के पिता शिराज अरशद ने सीमा पार (पाकिस्तान) जाने के लिए भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों से काफी गुजारिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। शिराज ने भास्कर से बातचीत में बताया, 'बॉर्डर क्रॉस करने के लिए मैंने अधिकारियों से काफी मदद मांगी। मैंने उन्हें अपने बेटे की हार्ट सर्जरी के बारे में भी बताया, लेकिन उन्होंने मेरी एक बात भी नहीं मानी। क्योंकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने 40 कश्मीरी लड़कियों को भारत भेजने से मना कर दिया था।'


अटारी बॉर्डर पर मौजूद भारतीय सुरक्षा अधिकारी ने शिराज को पाकिस्तान के इमिग्रेशन अधिकारियों से बात करने का सुझाव दिया, लेकिन वहां भी बात नहीं बन सकी। इसी बीच शिराज ने किसी तरह पाकिस्तान के एक पत्रकार से बात की और उसे अपनी आपबीती बताई। उसके बाद पाकिस्तानी पत्रकार ने अमृतसर के एक पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन से बात कर साबीह और उसके परिवार के मदद करने का अनुरोध किया। उसके बाद रविंदर अटारी बॉर्डर भी पहुंचे, लेकिन तब तक इमिग्रेशन अधिकारी वहां से जा चुके थे। फिर रविंदर ने साबीह और उसके परिवार को अमृतसर लेकर गए और वहां अपने घर पर ही उनके ठहरने का इंतजाम किया।

अगले दिन रविंदर ने अटारी बॉर्डर पर फंसे साबीह के परिवार की मदद के लिए भारतीय अधिकारियों से बात की। दूसरी ओर पाकिस्तानी पत्रकार ने भी पाकिस्तान के विदेश सचिव सोहैल महमूद से बात कर साबीह के बारे में बताया। उसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग को निर्देश दिया कि वे पाकिस्तानी परिवार की वापसी के लिए तुरंत भारतीय अधिकारियों से संपर्क करे। पाकिस्तानी उच्चायोग के अनुरोध पर भारतीय अधिकारियों ने सीमा पार करने के लिए साबीह और उसके परिवार के लिए स्पेशल पास जारी किया।


परिवार बोला- भारत में सभी से हमें प्यार और सहयोग मिला
शिराज अरशद (साबीह के पिता) ने फोन पर भास्कर को बताया, 'गुरुवार रात (19 मार्च) को जब हम रेस्ट हाउस (रविंदर के घर) पहुंचे, तो हमें भारत स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग से फोन आया और कहा कि कल दोपहर आपको अटारी बॉर्डर पहुंचना है। अगले दिन जब हम अटारी बॉर्डर पहुंचे, तो भारतीय अधिकारियों ने हमें प्रोटोकॉल के साथ सीमा पार भेजा।' शिराज ने मुश्किल वक्त में मदद करने के लिए रविंदर और भारतीय अधिकारियों का शुक्रिया अदा भी किया। उन्होंने कहा, 'हम बहुत चिंतित थे। लेकिन भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच आपसी सहयोग की वजह से हम अपने घर जा सके। मैं सभी का आभारी हूं। डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन ने हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया। हम 20 दिनों तक भारत में रहे और यहां सभी से हमें प्यार और सहयोग मिला। भारत एक महान राष्ट्र है। उन्होंने हमारा दिल जीत लिया।'

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