हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच रूस से परमाणु पनडुब्बी लेगा भारत

3 वर्ष पहले
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  • दोनों देशों ने गुरुवार को परमाणु पनडुब्बी को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए
  • इसके तहत सबमरीन को 21 हजार करोड़ रुपए में 10 साल के लिए लीज पर लिया जाएगा

नई दिल्ली. भारत और रूस के बीच गुरुवार को समुद्री सुरक्षा से जुड़ा एक अहम सौदा हुआ। नौसेना की मजबूती के लिए भारत अब रूस से परमाणु क्षमता वाली सबमरीन 10 साल की लीज पर लेगा। न्यूज एजेंसी ने सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि दोनों देशों के बीच करीब 3 अरब डॉलर (करीब 21 हजार करोड़ रुपए) में यह समझौता हुआ। 

 

श्रीलंका के पास हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए पिछले काफी समय से सरकार इस सौदे को पक्का करने की कोशिश में जुटी थी। दोनों देशों के बीच सौदे की रकम को लेकर महीनों लंबी बातचीत हुई। इसके बाद यह समझौता हुआ। इस सौदे के तहत रूस को 2025 तक अपनी अकुला क्लास सबमरीन भारतीय नौसेना को सौंपनी होगी। इसे चक्र-3 नाम दिया गया है। 

 

रूस से दो सबमरीन लीज पर ले चुका है भारत 

रूस इससे पहले भी भारत को अपनी दो परमाणु क्षमता वाली सबमरीन लीज पर दे चुका है। इनमें सबसे पहली आईएनएस चक्र 1988 में तीन साल की लीज पर ली गई थी। इसके बाद दूसरी आईएएस चक्र 2012 में 10 साल की लीज पर ली गई। चक्र-2 की लीज 2022 में खत्म हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारत इसे भी बढ़ाना चाहता है। 

 

भारत में बनेंगी रूस की एके-203 रायफल
हाल ही में रूस और भारत के बीच अमेठी स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में एके-203 असॉल्ट रायफल के निर्माण पर सहमति बनी थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का शुक्रिया भी जताया था। भारत में करीब 7.5 लाख एके-203 का उत्पादन होना है। इससे पहले अक्टूबर में दोनों देशों के बीच एस-400 एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम को लेकर भी समझौता हो चुका है। 

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