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भास्कर एक्सप्लेनर:अब जकार्ता नहीं, नुसंतारा होगी इंडोनेशिया की नई राजधानी; 33 अरब डॉलर कंस्ट्रक्शन पर खर्च होंगे- जानिए खास बातें

5 महीने पहलेलेखक: त्रिदेव शर्मा

इंडोनेशिया अपनी राजधानी बदलने जा रहा है। नई राजधानी का नाम नुसंतारा होगा। इससे संबंधित बिल को इंडोनेशिया की संसद ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। नुसंतारा ईस्ट कालीमंतन इलाके में है, जो बोर्नियो द्वीप का हिस्सा है। एक अनुमान के मुताबिक, नई राजधानी के कंस्ट्रक्शन पर राष्ट्रीय खजाने से करीब 33 अरब डॉलर खर्च होंगे। केंद्र सरकार के तमाम मंत्रालय और फॉरेन मिशन-एम्बेसीज नुसंतारा ही शिफ्ट किए जाएंगे। हालांकि, नई राजधानी कब तक तैयार होगी? इस बारे में तस्वीर अभी साफ नहीं है। अलबत्ता ग्राउंड कंस्ट्रक्शन वर्क 2024 की पहली तिमाही, यानी मार्च तक शुरू हो जाएगा।

3 साल बाद मंजूर हुआ बिल
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो साल 2019 में पहली बार नई राजधानी बसाने से संबंधित बिल संसद में लाए थे। इस पर विचार करने के लिए स्पेशल कमेटी बनाई गई थी। इस प्रस्ताव को बिल की शक्ल दी गई। अब यह मंजूर हो गया है। नई राजधानी के एडमिनिस्ट्रेशन का जिम्मा स्टेट कैपिटल अथॉरिटी के चीफ के पास होगा। वैसे तो बोर्नियो बड़ा द्वीप है, लेकिन नुसंतारा को 256,142 हेक्टेयर में बसाया जाएगा।

नई राजधानी बसाने के खतरे भी कम नहीं
नुसंतारा बोर्नियो द्वीप के कालीमंतन का हिस्सा है। बोर्नियो द्वीप कुदरती तौर पर बेहद खूबसूरत है। यहां घने जंगल और छोटी नदियां हैं। ‘द गार्डियन’ के मुताबिक, नुसंतारा का जब कंस्ट्रक्शन होगा, तो इस हिस्से में हरियाली कम हो जाएगी और इससे ईको-सिस्टम पर असर पड़ेगा। पॉल्यूशन भी बढ़ेगा। बरसाती जंगल कम होंगे और इसकी वजह से जंगली जानवरों का रहना मुश्किल हो जाएगा। यहां भालू और लंबी नाक वाले बंदर ज्यादा पाए जाते हैं। इनका इलाका छिनेगा तो ये हिंसक भी हो सकते हैं।

एडमिनिस्ट्रेशन और बजट

  • नुसंतारा एक चीफ ऑफ अथॉरिटी के अंडर में होगी। इस चीफ का दर्जा कैबिनेट मिनिस्टर का होगा।
  • नई राजधानी को वर्ल्ड सिटी विजन के तहत तैयार किया जाएगा। जैसे दुबई या सिंगापुर।
  • संसद द्वारा पास किए गए बिल में टोटल बजट का जिक्र नहीं है।
  • माना जा रहा है कि यह खर्च करीब 33 अरब डॉलर होगा। यह पैसा राष्ट्रीय बजट से आएगा।
  • तमाम सरकारी ऑफिस और एम्बेसीज नुसंतारा ही शिफ्ट की जाएंगी।
जकार्ता में हर साल बाढ़ से कई लोग मारे जाते हैं। यहां पॉश इलाकों में भी पानी भर जाता है।
जकार्ता में हर साल बाढ़ से कई लोग मारे जाते हैं। यहां पॉश इलाकों में भी पानी भर जाता है।

राजधानी बदलने की जरूरत क्यों

  • जकार्ता की आबादी 1 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
  • यह दुनिया के सबसे ज्यादा पॉल्यूटेड शहरों में से एक है।
  • ट्रैफिक इतना खराब है कि मंत्री तक दफ्तर वक्त पर नहीं पहुंच पाते।
  • करीब 15 साल से दूसरे शहर को राजधानी बनाने की मांग उठ रही है।
  • राष्ट्रपति विडोडो के मुताबिक- यहां बिजनेस या ट्रेड के लिए जगह तक नहीं है।
  • 1949 में आजादी के बाद से जकार्ता ही इंडोनेशिया की राजधानी है।

जकार्ता क्यों नहीं...

  • जकार्ता देश की 60% आबादी वाले जावा द्वीप का हिस्सा है।
  • इसका क्षेत्रफल 661.5 वर्ग किलोमीटर है।
  • हर साल औसतन 1 से 15 सेमी. समुद्र में डूब रहा है।
  • साल 2050 तक बड़ा हिस्सा समुद्र में समा सकता है।
  • यहां पर 13 नदियां हैं और जमीन बेहद दलदली है।
  • इस एरिया में अक्सर बाढ़ आने का खतरा रहता है।
  • खराब ट्रैफिक की वजह से हर साल 6.8 अरब डॉलर का नुकसान।

नुसंतारा ही क्यों...

  • नुसंतारा उत्तरी कालीमंतन का हिस्सा
  • इसका क्षेत्रफल 127,346.92 वर्ग किमी
  • कालीमंतन जकार्ता से 2300 किमी. दूर
  • यह खूबसूरत बोर्नियो द्वीप के करीब
  • मलेशिया और ब्रुनेई की सीमाएं करीब

नुसंतारा नाम क्यों और कैसे
इंडोनेशिया के अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्टर सुरारसो मोनोरफा के मुताबिक- इंडोनेशियाई भाषा में नुसंतारा का मतलब ऐसी जगह से है, जो चारों तरफ पानी से घिरी हो। हमें 80 नाम मिले थे। इनमें से नुसंतारा फाइनली शॉर्ट लिस्ट किया गया। यह याद रखने में भी आसान है। इसके साथ ऐतिहासिक बातें भी जुड़ी हुई हैं और ये इस देश की पहचान हैं।

इससे पहले भी राजधानी बदल चुके हैं कई देश

  • ब्राजील की राजधानी रियो डि जेनेरियो थी। अब ब्रासीलिया है।
  • नाईजीरिया की पुरानी राजधानी लागोस थी। अब अबुजा है।
  • कजाकिस्तान की राजधानी अलमाती थी। अब नूर-सुल्तान है।
  • म्यांमार की पूर्व राजधानी रंगून थी। अब नेपीदा है।

हमारी राजधानी भी पहले कलकत्ता थी
अंग्रेजों के दौर में पहले भारत की राजधानी भी दिल्ली नहीं, बल्कि कलकत्ता (अब कोलकाता) थी। 11 दिसंबर 1911 को जॉर्ज पंचम ने इसे दिल्ली शिफ्ट करने का ऐलान किया। इस कवायद को पूरा होने में दो दशक लग गए। 13 फरवरी 1931 को दिल्ली देश की नई राजधानी बनी। हालांकि, दिल्ली को राजधानी बनाने की वजह अंग्रेजों का अपना नजरिया था। माना जाता है कि वे कोलकाता को सुदूर हिस्सा मानते थे और दिल्ली बहुत हद तक मध्य में था। अंग्रेजों का मानना था कि यहां से पूरे देश पर पकड़ रखना कोलकाता के बनिस्बत ज्यादा आसान होगा।