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नई रिसर्च:दस करोड़ वैक्सीनेटिड लोगों में केवल 0.01% को इंफेक्शन ; बीमार पड़ने पर हालत गंभीर नहीं होगी

3 महीने पहलेलेखक: एलिस पार्क
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अमेरिका में बड़ी स्टडी में कोरोना वायरस की वैक्सीनों के बहुत अधिक असरकारक होने का प्रमाण। - Dainik Bhaskar
अमेरिका में बड़ी स्टडी में कोरोना वायरस की वैक्सीनों के बहुत अधिक असरकारक होने का प्रमाण।

कोरोना वैक्सीन के असर पर लगातार रिसर्च जारी है। विशेषज्ञों का कहना है, वैक्सीन लगने के बाद किसी व्यक्ति का संक्रमित होना आश्चर्यजनक नहीं है। वैक्सीन न लगवाने लोगों की तुलना में वे लोग कम संक्रमित हुए हैं जिन्हें वैक्सीन लग चुकी है। अमेरिका में जनवरी से 30 अप्रैल के बीच वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके दस करोड़ दस लाख लोगों के अध्ययन में पाया गया कि दस हजार 262 लोग संक्रमित हुए। यह केवल 0.01% है। एक अन्य स्टडी से पता लगा कि वैक्सीन लगवा चुके 90% हेल्थ वर्कर इंफेक्शन से बचे रहे।

एमोरी यूनिवर्सिटी में संक्रामक बीमारियों के प्रोफेसर डॉ.कार्लोस डेल रियो कहते हैं, इंफेक्शन की इतनी कम दर से प्रमाण मिलता है कि वैक्सीन असर कर रही हैं। कोई भी वैक्सीन लोगों का इंफेक्शन से 100% बचाव नहीं करती है। अमेरिका में तीन वैक्सीनों- फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन को इंफेक्शन से नहीं बल्कि कोविड-19 के लक्षणों से लोगों के बचाव की क्षमता के आधार पर मंजूरी मिली है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि वैक्सीन लगवा चुके लोगों में इंफेक्शन दर कम रही। बीमारी नियंत्रण केंद्रों (सीडीसी) ने बताया कि लगभग चार हजार हेल्थ केयर वर्कर्स की स्टडी से सामने आया कि फाइजर, मॉडर्ना की वैक्सीन 90% असरदार हैं।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. बोनी मेलडोनाडो कहती हैं,दस करोड़ से अधिक लोगों की नई स्टडी के नतीजे आश्चर्यजनक हैं। केवल 0.01 इंफेक्शन की दर और अधिक लोगों का गंभीर रुप से बीमार ना पड़ना वैक्सीनों के जादुई असर का संकेत है। शोधकर्ताओं ने वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमित हुए 5% मामलों के सैंपल की जांच की है।

पता लगा कि आधे से अधिक इंफेक्शन सबसे पहले ब्रिटेन में पाए गए बी.1.1.7 वेरिएंट से हुए हैं। एक चौथाई इंफेक्शन में कैलिफोर्निया वेरिएंट की भूमिका है। वैक्सीनेटिड लोगों के संक्रमित होने का प्रतिशत कम होने से साफ है कि दूसरे वेरिएंट के खिलाफ भी वैक्सीनों की इम्यूनिटी काम करती है। यदि इंफेक्शन हुआ भी तो बहुत मामलों में बीमारी कम गंभीर होगी।

स्टडी के लेखकों का कहना है चूंकि संक्रमण की जानकारी देना स्वैैच्छिक है इसलिए वैक्सीनेटिड लोगों में इंफेक्शन होने की वास्तविक संख्या सामने नहीं आई होगी। इसके अलावा पॉजिटिव हो चुके कई लोगों में लक्षण नहीं उभरे। लिहाजा, उन्होंने टेस्ट नहीं कराया होगा। विशेषज्ञों का कहना है, वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण की दर निश्चित रूप से बहुत कम है।

पिछड़े इलाकों के लोगों को कम वैक्सीन लगी

अमेरिका में वैक्सीन असमानता सामने आई है। सामाजिक, आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों के लोगों में वैक्सीनेशन की दर कम है। सीडीसी शोधकर्ताओं के अनुसार कमजोर क्षेत्रों के 42% लोगों को वैक्सीन लगी है। दूसरी ओर कम कमजोर और साधनहीन क्षेत्रों के 60.1% लोग वैक्सीन के दायरे में आ चुके हैं।

सीडीसी अमेरिका की काउंटियों का सामाजिक, आर्थिक स्तर, नस्ल, परिवारों की स्थिति, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाओं के आधार पर इंडेक्स बनाती है। पिछले साल दिसंबर तक शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में संक्रमण से मरने वालों की दर अधिक है।

  • 1.86% रही ग्रामीण इलाकों में प्रति 100 संक्रमित व्यक्तियों पर मृत्यु दर।
  • 1.26% रही शहरी इलाकों में प्रति 100 संक्रमित व्यक्तियों पर मृत्यु दर।
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