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80 हजार अफगानी अमेरिका पहुंचे:अमेरिका पहुंचे हर अफगानी रिफ्यूजी को 30 दिन सैन्य बेस पर रख गहन जांच, सही निकले तो 1200 डॉलर की एकमुश्त मदद

एक महीने पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली
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पेंटागन जांच में जुटा-किसी ‘गलत’ व्यक्ति को एंट्री न मिले। - Dainik Bhaskar
पेंटागन जांच में जुटा-किसी ‘गलत’ व्यक्ति को एंट्री न मिले।

अफगानिस्तान से आखिरी अमेरिकी विमान भी निकले हुए अब करीब एक हफ्ता बीत चुका है। इस अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच अमेरिका के सामने अब एक चुनौती यह भी है कि जिन अफगानी नागरिकों को वह बतौर रिफ्यूजी अफगानिस्तान से निकालकर लाया है, उन्हें कैसे बसाए। बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक इन अफगानी रिफ्यूजियों की संख्या 80 हजार से ज्यादा है।

शरणार्थियों को स्पेशल इमिग्रेंट वीसा दिया जा रहा
देश में बसाने से पहले इन रिफ्यूजियों की गहन जांच की जा रही है, जिसके लिए पेंटागन के 4 सैन्य बेस के अलावा कुछ और जगहों को भी तैयार किया गया है। इस जांच के बाद ही उन्हें स्पेशल इमिग्रेंट वीसा दिया जा रहा है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जांच में सही पाए जाने के बाद भी वीसा की शर्तें पूरी नहीं कर पाते हैं। इन्हें ह्यूमैनिटेरियन पैरोल पर देश में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

शरणार्थियों की बायोमीट्रिक जांच भी हो रही
बाइडेन प्रशासन के अधिकारी कहते हैं कि अफगानिस्तान से जो लोग अमेरिका पहुंच रहे हैं उन्हें पहले सैन्य बेस पर रखा जा रहा है। 30 दिनों तक उनकी गहन जांच हो रही है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि रिफ्यूजियों का पूरा इतिहास खंगालने के साथ ही बायोमीट्रिक जांच भी हो रही है। कुछ लोगों को इस जांच के सिलसिले में कतर व म भी ले जाया गया है। जांच के लिए पेंटागन ने अपने 4 सैन्य बेस तय किए हैं।

न्यूजर्सी में मैक्ग्वायर-डिक्स-लेकहर्स्ट जॉइंट बेस, वर्जीनिया में फोर्ट ली, टेक्सास में फोर्ट ब्लिस और विस्कॉन्सिन में फोर्ट मैक्कॉय में रिफ्यूजियों की प्रोसेसिंग हो रही है। वर्जीनिया में क्वांटिको स्थित मरीन कोर बेस और वॉशिंगटन डीसी के निकट डलस एक्सपो सेंटर को भी इस काम में जोड़ा जा रहा है।

अमेरिकी संस्कृति भी समझाई जा रही
सूत्रों के मुताबिक न्यूयॉर्क के जेएफके एयरपोर्ट पर एक कार्गो बिल्डिंग को भी रिफ्यूजियों के अस्थायी आवास में बदला जा रहा है। सैन्य बेस पर जांच के साथ ही रिफ्यूजियों को कागजात दिलाने में मदद की जा रही है। उन्हें अमेरिकी संस्कृति समझाने के लिए ओरिएंटेशन कोर्स भी कराए जा रहे हैं। हर रिफ्यूजी की कोविड जांच भी हो रही है।

डलस एक्सपो सेंटर में एक वैक्सीनेशन कैंप भी चल रहा है। इन रिफ्यूजियों के रिसेटलमेंट में एनजीओ व धार्मिक एजेंसियां भी लगी हैं। सैन्य बेस पर जांच पूरी होने के बाद इन्हीं समूहों से बात कर यह तय किया जा रहा है कि रिफ्यूजी परिवारों को कहां भेजा जाए।

यूएस कॉन्फ्रेंस ऑफ कैथोलिक बिशप्स में माइग्रेशन एंड रिफ्यूजी सर्विसेज के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बिल कैनी कहते हैं कि यह सभी परिवार अमेरिका के प्रति वफादार हैं। इन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। रिसेटलमेंट एजेंसियां इन परिवारों के रहने-खाने के साथ ही उनके लिए रोजगार की भी व्यवस्था कर रही हैं।

5 लोगों के परिवार को मिल जाती है करीब 4.4 लाख रु. की सरकारी मदद
सरकार की तरफ से हर रिफ्यूजी के लिए 1200 डॉलर यानी करीब 88 हजार रुपए की एकमुश्त स्टायपेंड दी जाती है। यह राशि बड़ों और बच्चों के लिए एकसमान है। यानी 5 लोगों के परिवार को 6 हजार डॉलर यानी करीब 4.4 लाख रुपए की एकमुश्त राशि मिलती है। इसे 90 दिन के भीतर खर्च करना होता है।

रिसेटलमेंट एजेंसियां इसी राशि से परिवारों के लिए घर, फर्नीचर व अन्य सामान का बंदोबस्त करती हैं। ऐसी ही एक संस्था राइसेस की वाइस प्रेसिडेंट मैरीसोल गिरेला कहती हैं कि हमारा प्रयास इस सरकारी मदद का एक हिस्सा परिवारों को नकद देने का होता है। लोग जितना ज्यादा दान देते हैं, उतना ज्यादा सरकारी पैसा परिवार के लिए बचता है।

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