ईरान में पहली बार हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारी को होगी फांसी:शख्स पर दंगे भड़काने का आरोप, तेहरान कोर्ट ने सुनाया फैसला

तेहरान7 महीने पहले
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ईरान में 16 सितंबर को शुरू हुआ हिजाब विरोधी प्रदर्शन अब भी जारी है। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पहली बार विरोध प्रदर्शन में शामिल एक शख्स को फांसी की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा 5 लोगों को 10 साल की सजा सुनाई गई है।

तेहरान कोर्ट ने जिस शख्स को सजा देने का फैसला किया गया है उस पर सरकारी इमारतों में आग लगाने, दंगे भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश करने के आरोप हैं। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सजा पाने वाले सभी लोग कोर्ट को चुनौती दे सकते हैं।

ईरान में हिजाब पहनना मैंडेटरी है। महिलाएं इसका विरोध कर रही हैं।
ईरान में हिजाब पहनना मैंडेटरी है। महिलाएं इसका विरोध कर रही हैं।

तीन प्रांतों के 750 लोगों पर आरोप
आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को प्रदर्शन में शामिल तीन प्रांतों के 750 से ज्यादा लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले सितंबर में प्रदर्शन शुरू होने के बाद से राजधानी तेहरान में 2,000 से ज्यादा लोगों को आरोपित किया जा चुका है।

वहीं दक्षिणी प्रांत होर्मोज़गन के ज्यूडिशियल चीफ मोजतबा घरेमानी ने बताया कि 164 लोगों पर हाल के दंगों के बाद आरोप लगाया गया था। उन पर हत्या के लिए उकसाने, सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने, शासन के खिलाफ प्रचार और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे कई आरोप थे।

करीब 100 गिरफ्तार किए गए लोगों को इस बुनियाद पर रिहा कर दिया गया कि वह भविष्य में कभी भी किसी भी विरोध और दंगों में शामिल नहीं होंगे। इसके लिए उन लोगों से साइन भी करवाए गए हैं।
करीब 100 गिरफ्तार किए गए लोगों को इस बुनियाद पर रिहा कर दिया गया कि वह भविष्य में कभी भी किसी भी विरोध और दंगों में शामिल नहीं होंगे। इसके लिए उन लोगों से साइन भी करवाए गए हैं।

कब और किस वजह से शुरू हुआ हिजाब विवाद
16 सितंबर को पुलिस कस्टडी में 22 साल की महसा अमिनी की मौत के बाद लोग सड़कों पर उतर आए। दरअसल, 13 सितंबर को महसा अपने परिवार से मिलने तेहरान आई थी। उसने हिजाब नहीं पहना था। पुलिस ने तुरंत महसा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के 3 दिन बाद उसकी मौत हो गई।

अमिनी की मौत का कारण सिर पर चोट लगने से बताया जा रहा था, लेकिन उनके परिजनों का दावा था कि उन्हें पहले से कोई बिमारी नहीं थी। महसा के पुलिस स्टेशन पहुंचने और अस्पताल जाने के बीच क्या हुआ यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया। इसके बाद से ही मामला सुर्खियों में आया और लोग इसे लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।

दावे- पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों की हत्या की
महसा अमिनी जैसे कई लोगों के साथ ऐसा हुआ। हिजाब के विरोध में शामिल होने पर कई लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट्स में दावे किए गए की विरोध करने वालों को गिरफ्तार कर उनकी हत्या की गई है, लेकिन पुलिस ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया।

वहीं महसा अमिनी के केस में पुलिस का कहना था कि पुलिस ने महसा के साथ कोई मारपीट नहीं की। 13 सितंबर को कई लड़कियों को गिरफ्तार किया गया था। उनमें से एक अमिनी थी। उसे जैसे ही पुलिस स्टेशन ले जाया गया वो बेहोश हो गई।

राजधानी तेहरान के कई इलाकों में प्रदर्शन का असर दिख रहा है। जगह-जगह आगजनी की घटनाएं हुई हैं। आंदोलन का नेतृत्व महिलाएं और पुरुष दोनों कर रहे हैं।
राजधानी तेहरान के कई इलाकों में प्रदर्शन का असर दिख रहा है। जगह-जगह आगजनी की घटनाएं हुई हैं। आंदोलन का नेतृत्व महिलाएं और पुरुष दोनों कर रहे हैं।
सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के जवाब में हिजाब समर्थक महिलाएं रैलियां निकाल रही हैं। इनमें ज्यादातर 40 साल से ज्यादा उम्र की हैं।
सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के जवाब में हिजाब समर्थक महिलाएं रैलियां निकाल रही हैं। इनमें ज्यादातर 40 साल से ज्यादा उम्र की हैं।

प्रदर्शन दबाने के लिए 250 से ज्यादा अरेस्ट
कुर्द आबादी वाले शहरों में पुलिस ने 250 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार भी किया। सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे। घरों पर छापेमारी की जा रही थी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड भी ऑपरेशन में शामिल हैं।

एक कुर्द कार्यकर्ता ने बताया था कि सुरक्षा बल कुर्दों के लिए काम करने वाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसके बावजूद वहां के लोगों का कहना था कि जब तक महसा को इंसाफ नहीं मिलता, प्रदर्शन जारी रहेंगे। इसके बाद प्रदर्शन की स्थिति और ज्यादा भयानक हो गई, यहां तक की दंगे भी भड़क गए।

महिलाओं ने विरोध में अपने बाल काटे, हिजाब जलाए

महसा अमिनी की मौत और हिजाब मेंडेटरी होने का विरोध जताते हुए कई महिलाओं ने अपने बाल काट लिए। इतना ही नहीं हिजाब भी जला दिए। इसके सपोर्ट में एक महिला पत्रकार ने वीडियो के साथ लिखा- ईरान की महिलाएं पुलिस कस्टडी में 22 साल की महसा अमिनी की मौत और हिजाब पहनना मेंडेटरी होने का विरोध ऐसे ही बाल काट कर और हिजाब जला कर दिखा रही हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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महरशाद शाहिदी ईरान के बहुत ही फैमस शेफ थे।
महरशाद शाहिदी ईरान के बहुत ही फैमस शेफ थे।

ईरान के मशहूर शेफ महरशाद शाहिदी की हत्या कर दी गई थी। शाहिदी देश में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन का एक अहम चेहरा बन गए थे। इसकी वजह से वहां की सरकार और मॉरल पुलिस उनसे बेहद खफा थी। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 19 साल के शाहिदी को पिछले हफ्ते उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वो हिजाब विरोधी प्रदर्शन कर रहे थे। पढ़ें पूरी खबर...

बाद में पुलिस ने उनके परिवार को शाहिदी की डेडबॉडी सौंपी। शनिवार को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन 15 शहरों में फैला, विरोध को रोकने के लिए इंटरनेट बंद

ईरान में हिजाब के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। महिलाओं के साथ पुरुष भी प्रदर्शन में शामिल है। अब ये 15 शहरों में फैल गया है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें भी हो रही हैं। आंदोलन कर रहे लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाईं। पढे़ं पूरी खबर...

देश में हिजाब की अनिवार्यता कब से हुई लागू
ईरान में वैसे तो हिजाब को 1979 में मेंडेटरी किया गया था, लेकिन 15 अगस्त को प्रेसिडेंट इब्राहिम रईसी ने एक ऑर्डर पर साइन किए और इसे ड्रेस कोड के तौर पर सख्ती से लागू करने को कहा गया। 1979 से पहले शाह पहलवी के शासन में महिलाओं के कपड़ों के मामले में ईरान काफी आजाद ख्याल था।

  • 8 जनवरी 1936 को रजा शाह ने कश्फ-ए-हिजाब लागू किया। यानी अगर कोई महिला हिजाब पहनेगी तो पुलिस उसे उतार देगी।
  • 1941 में शाह रजा के बेटे मोहम्मद रजा ने शासन संभाला और कश्फ-ए-हिजाब पर रोक लगा दी। उन्होंने महिलाओं को अपनी पसंद की ड्रेस पहनने की अनुमति दी।
  • 1963 में मोहम्मद रजा शाह ने महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया और संसद के लिए महिलाएं भी चुनी जानें लगीं।
  • 1967 में ईरान के पर्सनल लॉ में भी सुधार किया गया जिसमें महिलाओं को बराबरी के हक मिले।
  • लड़कियों की शादी की उम्र 13 से बढ़ाकर 18 साल कर दी गई। साथ ही अबॉर्शन को कानूनी अधिकार बनाया गया।
  • पढ़ाई में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। 1970 के दशक तक ईरान की यूनिवर्सिटी में लड़कियों की हिस्सेदारी 30% थी।

1979 में शाह रजा पहलवी को देश छोड़कर जाना पड़ा और ईरान इस्लामिक रिपब्लिक हो गया। शियाओं के धार्मिक नेता आयोतोल्लाह रुहोल्लाह खोमेनी को ईरान का सुप्रीम लीडर बना दिया गया। यहीं से ईरान दुनिया में शिया इस्लाम का गढ़ बन गया। खोमेनी ने महिलाओं के अधिकार काफी कम कर दिए