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इराक चुनाव:18 साल पहले अमेरिका के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने वाले शिया मौलवी जीत के करीब, ईरान के लिए भी खतरे की घंटी

बगदाद8 दिन पहले
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इराक में हुए आम चुनावों में अमेरिका के खिलाफ 18 साल पहले 2003 में आंदोलन खड़ा करने वाले शिया मौलवी मुक्तदा अल सद्र की पार्टी सदरिस्ट मूवमेंट जीतती नजर आ रही है। इराक में कुल 329 लोकसभा सीटें हैं। अल सद्र की पार्टी ने इसमें से 75 सीटें जीतने का दावा किया है।

इराक के सभी 18 प्रांतों में अल सद्र के ज्यादातर उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। हालांकि, चुनावों का नतीजा पूरी तरह से नहीं आया है। यहां 329 सीटों के लिए 3,449 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। अल सद्र के दावे के मुताबिक उनकी पार्टी अब तक के नतीजों में सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं। उनकी पार्टी ने 2018 में 54 सीटें जीती थीं।

चुनाव में सबसे कम 41% मतदान
इस बार के चुनाव में केवल 41% मतदान हुआ था। सद्दाम हुसैन की मौत के बाद अब तक हुए 5 चुनावों में यह सबसे कम है। चुनावी रुझानों के बाद अपने भाषण में अल सद्र ने कहा कि यह जीत भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गरीबी और अन्याय के खिलाफ लड़ाई का आगाज है।

राजनीति से लेकर व्यापार तक शिया मुस्लिमों का कब्जा
इराक में शिया मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। राजनीति से लेकर व्यापार पर भी ज्यादातर शिया मुस्लिमों का ही कब्जा है। यहां 66% शिया, 32% सुन्नी, 1.5% कुर्द (कबीला) और 0.5 % अन्य धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं।

ईरान समर्थित पार्टी को झटका
इराक के पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल मालिकी के नेतृत्व वाले दौलत अल कानून गठबंधन को इस चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उनकी पार्टी 48 सीटों से सिमट कर 14 पर आ गई है। इन्हें ईरान समर्थक माना जाता है। मालिकी ने इराक से इस्लामिक स्टेट को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2019 में उनकी सरकार के खिलाफ हुए प्रदर्शन में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 2 साल पहले बनी एमटिदाद पार्टी ने 9 सीटें जीती हैं।

सदरिस्ट मूवमेंट क्या है
सदरिस्ट मूवमेंट एक इराकी इस्लामिक आंदोलन है, जिसका नेतृत्व मुक्तदा अल-सदर कर रहे हैं। आंदोलन को पूरे इराक और खासतौर पर शिया मुस्लिमों का व्यापक समर्थन है। आंदोलन का लक्ष्य धार्मिक कानूनों और रीति-रिवाजों के बढ़ावा देना है।

शिया बहुल ईरान के क्यों विरोधी हैं अल सद्र
मुक्तदा अल सद्र सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि हर उस देश के खिलाफ हैं जो इराक के आंतरिक मसलों पर किसी तरह का हस्तक्षेप करने के मंसूबे रखता है। अल सद्र 2003 में इराक में अमेरिकी सेना की मौजूदगी का विरोध कर चर्चा में आए थे, लेकिन वे लगातार ईरान की भी आलोचना करते रहे हैं। दरअसल, इराक में अमेरिकी सेना पर हमला करने वाले कई आतंकी समूह हैं। ईरान इन समूहों को मदद मुहैया कराता है। अल सद्र इसका विरोध करते हैं।

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