इजराइल में 1 नवंबर को चुनाव:भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भी नेतन्याहू सबकी पसंद, सदन में सबसे ज्यादा 57 सीट मिल सकती हैं

तेल अवीव2 महीने पहले
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इजरायल में 1 नवंबर को होने वाले आम चुनाव के लिए सियासी रस्साकशी उफान पर है। ताजा सर्वे बताते हैं कि यदि आज चुनाव हों तो पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 120 सीट वाले सदन में सबसे ज्यादा 57 सीट मिल सकती है।

दूसरी तरफ, लिकुड पार्टी के टॉप 30 पदों के लिए सैकड़ों दावेदार अपने-अपने पोस्टर बैनर के साथ मैदान में हैं। इनमें कुछ पद ऐसे भी हैं, जो पार्टी के सर्वमान्य नेता बेंजामिन नेतन्याहू की पसंद से भरे जाएंगे। इसके लिए दो प्रमुख दावेदार पहले से तय माने जा रहे हैं- अमिचाई चिकली और इदित सिल्मन। दोनों पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की यामीना पार्टी में थे। इनके बागी होने से गठबंधन सरकार गिर गई और चुनाव की नौबत आ गई।

22 जून को संसद में नेतन्याहू। उन्होंने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा था- बेनेट सरकार इजराइल के इतिहास की सबसे घटिया और कमजोर सरकार थी।
22 जून को संसद में नेतन्याहू। उन्होंने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा था- बेनेट सरकार इजराइल के इतिहास की सबसे घटिया और कमजोर सरकार थी।

नेतन्याहू ने खुद को शक्तिशाली नेता के तौर पर स्थापित किया
लिकुड प्राइमरी के लिए नेतन्याहू को लड़ने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं। बीते कुछ सालों में नेतन्याहू ने लिकुड पार्टी पर अपना नियंत्रण मजबूत किया है। उन्होंने अपने मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को आंतरिक चुनावों में हराकर या उन्हें राजनयिक नियुक्तियों पर भेजकर या पार्टी से बाहर कर खुद को शक्तिशाली नेता के तौर पर स्थापित किया है।

नेतन्याहू की शक्ति उनकी चुनावी सफलता का परिणाम
व्यक्तिगत दानदाताओं के एक छोटे समूह के दम पर नेतन्याहू स्वतंत्र राजनीतिक अभियान चलाने में सक्षम हैं। उनके संबंध अरबपति एडेलसन परिवार से हैं। कट्टर ऑनलाइन समर्थकों का समूह उनके विरोधियों को परेशान करता है, लेकिन लिकुड के अंदर नेतन्याहू की शक्ति का एक बड़ा हिस्सा उनकी चुनावी सफलता का परिणाम है। उन्होंने खुद को एक ‘रहस्यमय जादूगर’ के रूप में विकसित किया, जो किसी भी स्थिति को अपने पक्ष में बदलने में सक्षम है। कुल मिलाकर इजराइल का चुनाव नेतन्याहू के पक्ष और विपक्ष का चुनाव बन गया है।

नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के मामले भारी पड़ सकते हैं
नेतन्याहू के लिए कुछ परेशानियां हैं। उनके खिलाफ धोखाधड़ी, घूस लेने जैसे आरोपों पर केस चल रहे हैं। आरोप है कि सिगार और शैंपेन जैसी चीजों को घूस के तौर पर लिया और खबर प्रकाशित करने के एवज में मीडिया के लोगों को राजनीतिक लाभ दिया।

नेतान्याहू तमाम आरोपों से इनकार कर चुके हैं और कोर्ट ने भी माना है कि नेतन्याहू के खिलाफ पेश सबूत बहुत भरोसेमंद नहीं हैं।
नेतान्याहू तमाम आरोपों से इनकार कर चुके हैं और कोर्ट ने भी माना है कि नेतन्याहू के खिलाफ पेश सबूत बहुत भरोसेमंद नहीं हैं।

अगर नेतन्याहू चुनाव जीत जाते हैं तो ऑफिस चलाने के साथ-साथ उन्हें बार-बार कोर्ट में पेश होना होगा। अगर दोषी पाए गए तो सजा होगी। ऐसे में उनकी पार्टी की चाहत है कि चुनाव जीतने के बाद ऐसा कानून पास करा लिया जाए, जिससे सारे केस रद्द हो जाए। हालांकि, ये कदम काफी विवादित हो सकता है।