हमास को जवाब:इजराइल ने आतंकी संगठन के इलाके में एयरस्ट्राइक की, एक दिन पहले हमास ने रॉकेट दागे थे

यरूशलम8 महीने पहले
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इजराइल के हमले के बाद गाजा पट्टी में उठतीं आग की लपटें। - Dainik Bhaskar
इजराइल के हमले के बाद गाजा पट्टी में उठतीं आग की लपटें।

इजराइल और हमास के बीच तनाव फिर बढ़ने लगा है। इजराइल का आरोप है कि हमास ने नए साल के पहले दिन उसके रिहायशी इलाकों में रॉकेट से हमला किया। कुछ ही घंटे बाद इजराइल के फाइटर जेट्स गाजा पट्टी के ऊपर उड़ रहे थे। हमास के कब्जे वाले इलाकों पर बम बरसाए। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि गाजा पट्टी में कितना नुकसान हुआ। हालांकि, गाजा पट्टी के इलाके में आग की लपटें साफ दिखाई दीं। दोनों ही पक्षों ने अब तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

इजराइल पर हमला
हमास ने रविवार तड़के इजराइल की समुद्री सीमा के करीब सेंट्रल पॉइंट पर रॉकेट दागे थे। इसमें कुछ लोग घायल हुए थे। इसके बाद इजराइली डिफेंस मिनिस्ट्री ने साफ शब्दों में कहा था कि इसे देश पर आतंकी हमला माना जा रहा है और इसका माकूल जवाब दिया जाएगा। हालांकि, अब तक यह भी साफ नहीं हुआ कि हमले से इजराइल में किसी तरह का नुकसान हुआ या नहीं। लेकिन, हमेशा की तरह इजराइल ने जवाब देने का फैसला किया।

रविवार तड़के हमास ने इजराइल के इसी इलाके में रॉकेट दागे थे।
रविवार तड़के हमास ने इजराइल के इसी इलाके में रॉकेट दागे थे।

रॉकेट फैक्ट्री पर हमला
‘अरब न्यूज’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली फाइटर जेट्स ने रविवार दोपहर गाजा पट्टी पर हमले शुरू किए। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल ने गाजा पट्टी में मौजूद हमास के उस ठिकाने को निशाना बनाया जहां रॉकेट बनाए जाते हैं। इजराइली इंटेलिजेंस ने कुछ दिन पहले ही साफ कर दिया था गाजा पट्टी के इलाके में हमास बड़े पैमाने पर रॉकेट बना रहा है और इनका इस्तेमाल इजराइल के खिलाफ किया जाएगा।

मई के बाद से लगभग शांति
मई में इजराइल और फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के बीच 11 दिन तक जंग चली थी। इस दौरान दुनिया की बड़ी ताकतों ने दखल दिया और किसी तरह बड़ी जंग को टाला गया था। इसके बाद सितंबर में सिर्फ एक बार तनाव बढ़ा, जब हमास ने एक रॉकेट इजराइल पर दागा। यह भी मिसफायर हो गया था। इस बार कई रॉकेट दागे गए और इजराइल ने जवाबी हमला किया।

पिछले हफ्ते ही इजराइल के डिफेंस मिनिस्टर बेनी गेंट्ज और फिलिस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास के बीच लंबी बातचीत हुई थी। इसमें शांति बनाए रखने पर समझौता हुआ था। फिलिस्तीन सरकार की दिक्कत यह है कि वो हमास पर काबू नहीं कर पाती और इसका खामियाजा कई बार पूरे फिलिस्तीन को उठाना पड़ता है।