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‘ब्रेन का पेसमेकर’:यह अवसाद पैदा करने वाली गतिविधि रोक देता है, इसका स्कोर भी घटाता है; जहां सारे इलाज विफल, वहां पर ये कारगर

2 महीने पहलेलेखक: पैम बेलुक
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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इनोवेटिव डिवाइस बनाया है। मस्तिष्क में छोटे-छोटे कंपन से यह उपचार करता है। - Dainik Bhaskar
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इनोवेटिव डिवाइस बनाया है। मस्तिष्क में छोटे-छोटे कंपन से यह उपचार करता है।

‘बात करीब दो साल पहले की है। मैं ऑफिस से घर जा रही थी...इस दौरान पूरे रास्ते रोती रही। ऐसे ख्याल आ रहे थे कि कार को किसी खाई या दलदल में गिराकर खुद को खत्म कर लूंं। किसी तरह मैं घर पहुंची। दोस्त मुझे डॉक्टर के पास ले गए। जैसे ही मैंने अपनी समस्या बताई, डॉक्टर ने मुझे तुरंत माता-पिता के पास शिफ्ट होने की सलाह दी।

आखिर मुझे नौकरी छोड़कर उनके पास जाना पड़ा...’ यह कहानी है उत्तरी कैलिफोर्निया की 38 वर्षीया सारा की। जो लंबे वक्त से अवसाद से जूझ रही थीं। हालांकि पिछले साल अगस्त के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। अब उन्हें खुदकुशी के ख्याल नहीं आते। डिप्रेशन भी काफी कम हो गया है। वह डेटा एनालिसिस की क्लासेस लेने लगी हैं। दुनिया को देखने का नजरिया बदल गया है।

माचिस की डिबिया जितना बड़ा है ‘ब्रेन पेसमेकर’
​​​​​​​यह सब संभव हो सका है सारा के दिमाग में इंप्लांट एक डिवाइस (न्यूरोपेस आरएनएस सिस्टम) के चलते। माचिस की डिबिया जितने बड़े इस डिवाइस को ‘ब्रेन पेसमेकर’ कहा जा रहा है। सारा यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को (यूसीएसएफ) के प्रयोगात्मक उपचार की पहली प्रतिभागी बनीं थीं। डिवाइस सक्रिय होने के 12 दिन बाद ही सारा के डिप्रेशन स्कोर 33 से घटकर 14 हुआ और कुछ महीनों में 10 तक पहुंच गया।

इस स्टडी की लेखक और यूसीएसफ में मनोचिकित्सा डॉ. कैथरीन स्केनगोस बताती हैं कि सारा के लिए जो पद्धति इस्तेमाल हुई वह कथित तौर पर डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) का एक प्रकार है। ब्रेन को स्टिमुलेट करने के लिए यह इंप्लांट किए गए इलेक्ट्रोड या पतले इंसुलेटेड तारों का इस्तेमाल करता है। इससे पहले कभी व्यक्तिगत थेरेपी नहीं की गई। इसके नतीजे भी बेहतर मिले।

इलाज के प्रचलित तरीकों में चार से आठ हफ्तों के बाद प्रभाव पता चलते हैं, जबकि इस पद्धति में तत्काल पता चल जाते हैं। स्केनगोस कहती हैं कि एक शख्स का डिप्रेशन दूसरे अवसादग्रस्त व्यक्ति से बहुत अलग दिख सकता है। यही ध्यान में रखते हुए सारा के लिए व्यक्तिगत थेरेपी अपनाई गई।

डिप्रेशन का पैटर्न दिखते ही 6 सेकेंड का स्टिमुलेशन देता है डिवाइस
इस डिवाइस के लगने से पहले सारा 20 तरह की दवाइयों से उपचार, महीनों तक अस्पताल में रहना, ईसीटी (शॉक थेरेपी) जैसे प्रचलित तरीकों की मदद ले चुकीं थी, पर सारी कोशिशें विफल रही। इस प्रयोग के दौरान विशेषज्ञों ने सारा के मस्तिष्क में डिप्रेशन से जुड़े पैटर्न को पहचानने के लिए लगातार 10 दिनों तक इलेक्ट्रोड्स लगाकर जांच की। अलग-अलग स्थानों पर स्टिमुलेशन देने के बाद सारा से उनकी भावनाओं के बारे में पूछा गया। डिवाइस को इस तरह सेट किया गया कि डिप्रेशन का पैटर्न दिखते ही वह सिर्फ 6 सेकेंड स्टिमुलेशन दे। इससे डिप्रेशन पैदा करने वाली एक्टिविटी बाधित हो जाती है।