इमरान खान की पूर्व पत्नी बाइडेन पर भड़कीं:अमेरिकी राष्ट्रपति को सुनाई खरी-खोटी, जेमिमा गोल्डस्मिथ बोलीं- 9/11 हमले में एक भी अफगानी नहीं था शामिल

नई दिल्ली5 महीने पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक से 7 बिलियन अमरीकी डॉलर की फ्रीज हुई संपत्ति को युद्धग्रस्त देश में और 9/11 के आतंकी हमलों के पीड़ितों को मानवीय सहायता के लिए वितरित करने की अनुमति दी गई। व्हाइट हाउस ने यह जानकारी दी है। इस फैसले के बाद ब्रिटिश पटकथा लेखक और इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने अपनी नाराजगी दिखाई और इसकी कड़ी निंदा की।

वाशिंगटन ने अफगान फंड को कर दिया था फ्रीज
प्रधान मंत्री इमरान खान की पूर्व पत्नी गोल्डस्मिथ ने कहा, "9/11 में एक भी अफगानी शामिल नहीं था। तालिबान के सैन्य अधिग्रहण के बाद वाशिंगटन ने अफगान फंड को फ्रीज कर दिया, लेकिन नए प्रशासन को मान्यता दिए बिना पैसे जारी करने का एक तरीका खोजने के लिए दबाव का सामना करना पड़ा, जो कहता है कि यह उनका है। पिछले साल अगस्त में तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद अमेरिका में रखे गए फंड को फ्रीज कर दिया गया था। आधी संपत्ति (3.5 बिलियन अमरीकी डॉलर) - अफगानिस्तान के अंदर राहत प्रदान करने के लिए दी जाएगी।

फंड को 9/11 पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए होगा खर्च
इस आदेश के तहत अमेरिकी वित्तीय संस्थाओं को अफगानिस्तान में सहायता और बाकी बुनियादी जरूरतों के लिए 3.5 अरब डॉलर का फंड उपलब्ध करवाना होगा। बाकी की साढ़े तीन अरब डॉलर की राशि अमेरिका में ही रहेगी और इसे 9/11 पीड़ितों को मुआवजा देने में खर्च किया जाएगा। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह फैसला अफगानिस्तान की जनता तक फंड पहुंचाने के मद्देनजर लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि अफगान लोगों तक मदद पहुंचाने के साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि यह फंड तालिबान के हाथ ना लगे।
पैसों की कमी से अफगानिस्तान में बढ़ी गरीबी
उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान के लिए अंतराष्ट्रीय कोष उपलब्ध कराना स्थगित है और पिछले साल अगस्त में काबुल की सत्ता में तालिबान के काबिज हो जाने के बाद देश का अरबों डॉलर विदेशों में, विशेष रूप से अमेरिका में जब्त रखा गया है। अफगानिस्तान में पैसों की कमी के चलते गरीबी बढ़ी है और मानवीय सहायता समूहों ने मानव त्रासदी बढ़ने की चेतावनी दी है। सरकारी कर्मचारियों, चिकित्सकों से लेकर शिक्षकों तक और सिविल सेवा के अधिकारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है। इस बीच, बैंकों ने खाता धारकों के धन निकालने की सीमा निर्धारित कर दी है।

व्हाइट हाउस के प्रेस रिलीज में कहा गया है कि शेष 3.5 बिलियन अमरीकी डालर संयुक्त राज्य में रहेगा और इसका उपयोग आतंकवाद के शिकार अमेरिकी पीड़ितों द्वारा चल रहे मुकदमे की फंडिंग के लिए किया जाएगा। 9/11 आतंकी हमले में मारे गए लोगों के परिवार के कई सदस्यों ने तालिबान और अल-कायदा पर आतंकवादी हमले को अंजाम देने और योजना बनाने में उनकी भूमिका के लिए मुकदमा दायर किया है। इस हमले करीब 3,000 लोग मारे गए थे। व्हाइट हाउस की विज्ञप्ति में कहा गया है,“कार्यकारी आदेश को तालिबान और गलत हाथों से दूर रखते हुए, अफगानिस्तान के लोगों तक पैसा पहुंचने लिए एक रास्ते के रूप में डिजाइन किया गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ प्रतिबंध हैं।”