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बाइडेन को चैलेंज:तालिबान पाकिस्तान ने अल कायदा से हाथ मिलाया, अफगानिस्तान में खतरा बढ़ेगा

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद2 वर्ष पहले
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फोटो पिछले साल 5 अगस्त की है। तब तालिबानी नेताओं के डेलिगेशन ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से मुलाकात की थी। कुरैशी आतंकी संगठन के नेताओं को रिसीव करने के लिए विदेश मंत्रालय के गेट पर मौजूद थे। - Dainik Bhaskar
फोटो पिछले साल 5 अगस्त की है। तब तालिबानी नेताओं के डेलिगेशन ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से मुलाकात की थी। कुरैशी आतंकी संगठन के नेताओं को रिसीव करने के लिए विदेश मंत्रालय के गेट पर मौजूद थे।

पाकिस्तान में मौजूद तालिबान के हक्कानी नेटवर्क ने अफगानिस्तान में हमलों के लिए अल-कायदा से हाथ मिला लिया है। दोनों मिलकर एक नई यूनिट तैयार कर रहे हैं। यह खुलासा अमेरिकी वित्त विभाग ने किया है। एक हफ्ते पहले सत्ता संभालने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए यह बहुत बड़ा चैलेंज होगा, क्योंकि अफगानिस्तान में करीब तीन हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।

रिपोर्ट इसलिए अहम
अमेरिका और अफगानिस्तान हमेशा से पाकिस्तान पर आरोप लगाते रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना, ISI और वहां की सरकार हक्कानी नेटवर्क को मदद देते हैं। आरोप है कि हक्कानी नेटवर्क के यही तालिबानी आतंकी सीमा पार करने के बाद अफगानिस्तान में हमले करते हैं। हमलों के बाद यह आतंकी पाकिस्तानी सेना की मदद से अपनी पनाहगाहों में लौट जाते हैं।

पिछले साल मार्च में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सिखों पर हमला किया गया था। इस हमले का आरोप भी हक्कानी नेटवर्क पर लगा था और अफगान इंटेलिजेंस ने इसके सबूत अमेरिका, भारत और अपनी सरकार को सौंपे थे।

बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन की नजर
बाइडेन ने सत्ता संभालने के बाद यूएस-तालिबान डील रद्द कर दी थी। पाकिस्तान ने इसका विरोध किया था, क्योंकि वो इसमें मध्यस्थता कर रहा था। अब वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया है कि अमेरिका ने तालिबान से डील क्यों रद्द की। अमेरिका के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ माइक मुलेन के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया- तालिबान और ISI के रिश्तों के लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं है। दोनों एक सिक्के के ही पहलू हैं।

तालिबान का इनकार
अमेरिकी वित्त विभाग की रिपोर्ट को तालिबान ने खारिज कर दिया। इसके प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा- हम इन आरोपों का खंडन करते हैं। तालिबान और अल-कायदा के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है। यह रिपोर्ट हमारे संगठन को बदनाम करने की अमेरिकी साजिश का हिस्सा है।