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राष्ट्रपति बनने के बाद बाइडेन का पहला विदेश दौरा:यूरोपीय देशों का फिर भरोसा जीतना होगा, चीन के खिलाफ रणनीति बनाने पर फोकस

वॉशिंगटन12 दिन पहले
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बाइडेन G7 समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। (फाइल) - Dainik Bhaskar
बाइडेन G7 समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। (फाइल)

जो बाइडेन राष्ट्रपति बनने के करीब पांच महीने बाद पहले विदेशी दौरे पर जा रहे हैं। यह दौरा मोटे तौर पर यूरोप और ब्रिटेन तक सीमित रहेगा। बाइडेन और अमेरिका दोनों के लिए इसके बेहद खास मायने हैं। कोविड-19 के बाद से दुनिया में कई बड़े बदलाव आए हैं। चीन इस वक्त अमेरिका को हर मोर्चे पर चैलेंज करता दिख रहा है। इससे भी बड़ी दिक्कत यह है कि डोनाल्ड ट्रम्प के दौर में अमेरिका के कई साथी, खासतौर पर यूरोपीय देश उससे दूर हुए या नाराज हुए। बाइडेन इन्हें फिर साथ लाने को कोशिश करेंगे। जिनेवा में वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मिलेंगे। इस पर दुनिया की निगाहें रहेंगी।

चीन और रूस : दो बड़े चैलेंज
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक, अमेरिका के सामने अब हालात पहले जैसे नहीं रहे। उसको चीन और रूस से हर मोर्चे पर तगड़ी चुनौतियां मिल रही हैं। बाइडेन चाहते हैं कि अमेरिका और रूस के बीच किसी मुद्दे पर टकराव न हो। चीन के खिलाफ तो उनका प्रशासन शुरू से ही तैयारी कर रहा है। बाइडेन ने 20 जनवरी को शपथ के बाद अपने भाषण में कहा था- अमेरिका वापस आ चुका है। अमेरिका में वैक्सीनेशन प्रोग्राम कामयाब रहा है और इकोनॉमी भी तेजी से सुधर रही है। ऐसे में बाइडेन घर से मजबूत होकर निकल रहे हैं। चीन से मुकाबले के मुद्दे पर डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन एक पेज पर खड़े हैं।

बाइडेन के तीन अहम प्रोग्राम
दुनिया की सात बड़ी इकोनॉमीज यानी G 7 की मीटिंग में हिस्सा लेंगे। फिर नाटो और यूरोपीय यूनियन के नेताओं से मिलेंगे। आखिर में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत होगी। नाटो और यूरोपीय यूनियन से रिश्ते मजबूत करना बड़ा काम है। ट्रम्प के अड़ियल रवैये की वजह से यह देश अमेरिका से दूर होने लगे थे। बाइडेन को इन देशों के शक और शंकाएं दूर करना होंगी।

बाइडेन चाहेंगे कि यूरोपीय देश चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को रोकने में अमेरिका की मदद करें। हालांकि, उनके लिए यह बहुत मुश्किल नहीं होना चाहिए। क्योंकि, स्वाभाविक और परंपरागत तौर पर यूरोपीय देश हमेशा अमेरिका के साथ रहे हैं। तुर्की ने कुछ अलग चलने की कोशिश की थी, लेकिन वो भी बहुत हद तक अमेरिका पर निर्भर है।

ट्रम्प आज भी खतरा हैं
ट्रम्प साफ कर चुके हैं कि वे 2024 में फिर राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय देशों को लगता है कि अगर ट्रम्प की वापसी हुई तो फिर अमेरिका और रूस के रिश्तों दूरियां आ सकती हैं। व्हाइट हाउस के अफसर भी मानते हैं कि वे 2025 के बारे में कोई गारंटी नहीं दे सकते।

बाइडेन-पुतिन मुलाकात में कई विवादित मुद्दे उठ सकते हैं। लेकिन, ट्रम्प के मुकाबले बाइडेन काफी शांत और अनुभवी हैं। वे जानते हैं कि रूस और चीन को एकसाथ दुश्मन बना लेना अमेरिका के हित में नहीं होगा।

वैक्सीन डिप्लोमैसी
चीन अपनी वैक्सीन के जरिए कई देशों के करीब आने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कई बड़े देश ऐसे हैं, जिन्होंने चीन की वैक्सीन पर सवालिया निशान लगाए हैं। बाइडेन ने पिछले दिनों 8 करोड़ वैक्सीन डोनेट करने का ऐलान किया था। इसका प्लान अभी आना बाकी है। लेकिन, यह तय है कि दुनिया का कोई भी देश चीन के मुकाबले अमेरिकी वैक्सीन पर ही भरोसा करेगा। लिहाजा, बाइडेन इस मामले में बढ़त बना सकते हैं।