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बाइडेन-जिनपिंग की 2 घंटे लंबी वर्चुअल मीटिंग:चीनी राष्ट्रपति ने US प्रेसिडेंट से कहा- जो लोग आग से खेलते हैं, अकसर जल जाते हैं

वॉशिंगटन/बीजिंग2 महीने पहले

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार देर रात चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। इस दौरान दोनों लीडर्स फेस-टू-फेस मिलने के लिए सहमत हुए। बाइडेन के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद दोनों नेताओं की ये पहली व्यक्तिगत बैठक होगी। हालांकि बैठक कब और कहां होगी, इस बारे में फिलहाल जानकारी नहीं दी गई है।

जो बाइडेन और शी जिनपिंग की ये तस्वीर 24 सितंबर 2015 की है। जिनपिंग US विजिट पर आए थे। उस समय बाइडेन वाइस-प्रेसिडेंट थे।
जो बाइडेन और शी जिनपिंग की ये तस्वीर 24 सितंबर 2015 की है। जिनपिंग US विजिट पर आए थे। उस समय बाइडेन वाइस-प्रेसिडेंट थे।

जिनपिंग ने दे दी बाइडेन को धमकी
न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, ताइवान में अमेरिकी दखलंदाजी से नाराज चीनी राष्ट्रपति ने बाइडेन को एक तरह से सीधी धमकी दे दी। जिनपिंग ने कहा- मैं आपसे सिर्फ इतना कहूंगा कि जो लोग आग से खेलने की कोशिश करते हैं, वो जल जाते हैं।

इस वॉर्निंग के सीधे मायने ये हैं कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट तेजी से बढ़ रही है। चीन को यह कतई मंजूर नहीं है कि अमेरिका और बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ताइवान की मदद करे।

28 जुलाई को देर रात हुई बाइडेन और जिनपिंग की बातचीत करीब 2 घंटे 17 मिनट चली। इस दौरान जिनपिंग का रवैया काफी तल्ख रहा।
28 जुलाई को देर रात हुई बाइडेन और जिनपिंग की बातचीत करीब 2 घंटे 17 मिनट चली। इस दौरान जिनपिंग का रवैया काफी तल्ख रहा।

जिनपिंग की तल्खी की वजह क्या है
माना जा रहा है कि अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी अगले हफ्ते ताइवान के दौरे पर जा रही हैं। 25 साल बाद अमेरिका का कोई इतना बड़ा नेता ताइवान की ऑफिशियल विजिट पर जा रहा है। यह चीन के लिए साफ संकेत है कि अमेरिका अब ताइवान को अकेले नहीं छोड़ेगा और उसको हर स्तर पर मदद देगा। चीन को यह सख्त नामंजूर है। यही वजह है कि चीन कई दिनों से अमेरिका को नतीजे भुगतने की धमकी दे रहा है।

दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी साफ कर दिया है कि वो किसी सूरत में कदम पीछे नहीं खींचेगा। 23 मई को बाइडेन ने चीन के खिलाफ मिलिट्री एक्शन लेने की चेतावनी दी थी। गुरुवार को बाइडेन-जिनपिंग की मुलाकात में भी रिश्तों की यह तल्खी साफ दिखी।

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कहा जा रहा है कि अमेरिकी फौज ने नैंसी पेलोसी को फिलहाल, ताइवान न जाने की सलाह दी है। फौज का मानना है कि यूक्रेन और रूस के बीच जंग चल रही है और ऐसे में अगर ताइवान में कोई संघर्ष होता है तो यह मामला बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

ताइवान को लेकर क्यों आमने-सामने हैं US और चीन
चीन वन-चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश की तरह देखता है। चीन का लक्ष्‍य ताइवान को उनकी राजनीतिक मांग के आगे झुकने और चीन के कब्‍जे को मानने के लिए ताइवान को मज‍बूर करने का रहा है।

इधर, अमेरिका भी वन चाइना पॉलिसी को मानता है, लेकिन ताइवान पर चीन का कब्जा नहीं देख सकता। बाइडेन ने 2 महीने पहले कहा था- हम वन चाइना पॉलिसी पर राजी हुए, हमने उस पर साइन किया, लेकिन यह सोचना गलत है कि ताइवान को बल के प्रयोग से छीना जा सकता है। चीन का ये कदम न केवल अनुचित होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा।

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ताइवान को अमेरिकी हथियार
बुधवार को पहली बार ताइवान मिलिट्री के तीनों विंग्स ने वॉर एक्सरसाइज की। इस दौरान सिर्फ चीन से निपटने की स्ट्रैटेजी पर फोकस किया गया। ताइवान मिलिट्री ने अमेरिका से खरीदी गईं मिसाइलों का टेस्ट किया। इन्हें वॉरशिप और फाइटर जेट्स पर लगाकर भी देखा गया। इसके अलावा अमेरिकी ड्रोन भी इस्तेमाल किए गए।

वन चाइना पॉलिसी के तहत US ताइवान को कूटनीतिक रूप से मान्यता नहीं देता है। लेकिन अमेरिका लोकतांत्रिक रूप से ताइवान को हथियार बेचता है ताकि वह अपनी रक्षा कर सके।
वन चाइना पॉलिसी के तहत US ताइवान को कूटनीतिक रूप से मान्यता नहीं देता है। लेकिन अमेरिका लोकतांत्रिक रूप से ताइवान को हथियार बेचता है ताकि वह अपनी रक्षा कर सके।

मार्च के बाद दूसरी बार बातचीत
बाइडेन और जिनपिंग ने मार्च में भी 2 घंटे तक इसी तरह वर्चुअल मीटिंग की थी। तब यूक्रेन और रूस की जंग पर बातचीत हुई थी। बाइडेन के सत्ता में आने के बाद जिनपिंग से उनकी पांच बार बातचीत हो चुकी है। हालांकि, ट्रेड और ताइवान समेत किसी भी मुद्दे पर दोनों नेता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। बहरहाल, व्हाइट हाउस ने गुरुवार की बातचीत के बारे में अब तक कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी नहीं किया है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की एक और बातचीत होगी, लेकिन इसके पहले विदेश मंत्री मुलाकात करेंगे।