PAK में हिंदुओं की आवाज उठाने वाला जर्नलिस्ट गिरफ्तार:अल्पसंख्यकों को फ्लड रिलीफ कैम्प्स से निकाला, सिर्फ मुस्लिमों को जगह

कराची5 महीने पहले
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पाकिस्तान में बाढ़ पीड़ित हिंदुओं की आवाज उठाने वाले जर्नलिस्ट नसरल्लाह गडानी को सिंध पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गडानी ने कुछ दिन पहले बाढ़ राहत शिविरों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने अप्पसंख्यकों के साथ फ्लड रिलीफ कैम्पों में हो रहे भेदभाव को उजागर किया था। उनका आरोप था कि शिविरों में सिर्फ मुस्लिमों को जगह दी जा रही है। इसके अलावा राहत सामग्री भी अल्पसंख्यकों को नहीं मिल रही है।

पाकिस्तान में बाढ़ से अब तक करीब 1300 लोगों की मौत हो चुकी है। 6 हजार से ज्यादा घायल हैं। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 3.5 करोड़ लोग बेघर हो चुके हैं। सिंध प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित है।

रिलीफ कैम्प्स के वीडियो से बवाल
गडानी ने पिछले हफ्ते सिंध के मीरपुर माथेलो शहर के एक राहत शिविर का दौरा किया था। एक वीडियो में उन्होंने दिखाया था कि किस तरह वहां माइनोरिटीज भेदभाव का शिकार हो रहे हैं। इस वीडियो में राहत शिविरों से बाहर किए गए हिंदुओं के दर्द को दिखाया गया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बाद में सरकार ने इसे हटवा दिया। सभी हिंदू बागरी कम्युनिटी के गरीब थे।

इस वीडियो के बाद गडानी को पुलिस ने पेश होने का नोटिस भेजा। जब वे पूछताछ के लिए पहुंचे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गडानी का दावा था कि हिंदुओं के पास पीने के लिए पानी और खाना तक नहीं है। उनके भूख से मरने का खतरा है। खास बात यह है कि हिंदुओं के मंदिरों में मुस्लिमों को शरण दी जा रही है, लेकिन रिलीफ कैम्प्स से हिंदुओं को निकाला जा रहा है।

पत्रकार नसरल्ला गडानी ने एक राहत शिविर का दौरा किया था। एक वीडियो में उन्होंने दिखाया था कि किस तरह वहां माइनोरिटीज भेदभाव का शिकार हो रहे हैं।
पत्रकार नसरल्ला गडानी ने एक राहत शिविर का दौरा किया था। एक वीडियो में उन्होंने दिखाया था कि किस तरह वहां माइनोरिटीज भेदभाव का शिकार हो रहे हैं।

फिर भारी बारिश का खतरा
खतरा इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि पाकिस्तान का मौसम विभाग कह रहा है कि आने वाले हफ्तों में फिर भारी बारिश हो सकती है। अगर यह आशंका सच साबित होती है तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं। मुल्क करीब दो महीने तक भारी बारिश से जूझता रहा। इस दौरान सिंध और बलूचिस्तान के बड़े-बड़े होटल्स तक नहीं बचे। लाखों लोग बेघर हो चुके हैं, उनके पास न भोजन है और न सिर छिपाने के लिए छत। दुनिया से मदद के तौर पर जो टैंट्स मिले हैं, उनमें ये परिवार रह रहे हैं। पाकिस्तान की सरकार बाढ़ का कारण क्लाइमेट चेंज बता रही है।

पाकिस्तान का मौसम विभाग कह रहा है कि आने वाले हफ्तों में फिर भारी बारिश हो सकती है। अगर यह आशंका सच साबित होती है तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं।
पाकिस्तान का मौसम विभाग कह रहा है कि आने वाले हफ्तों में फिर भारी बारिश हो सकती है। अगर यह आशंका सच साबित होती है तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं।

कई हिस्से अब भी डूब में
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार अब तक यही तय नहीं कर पाई है कि कितना नुकसान हुआ है। शहबाज ने कुछ दिनों पहले कहा था कि 10 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। उनके प्लानिंग मिनिस्टर ने भी यही आंकड़ा बताया। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि अभी तो नुकसान का आंकड़ा तय ही नहीं किया जा सकता, क्योंकि कई हिस्से अब भी पानी में डूबे हैं।

पाकिस्तान के लिए हालात इसलिए भी खतरनाक हैं, क्योंकि वो दिवालिया होने की कगार पर था। IMF ने भी बमुश्किल डेढ़ अरब डॉलर का कर्ज दिया। महंगाई 18% पार कर चुकी है। इसके अलावा सियासी उठापटक और ज्यादा हालात खराब कर रही है। इमरान खान इस दौर में भी रैलियां कर रहे हैं।

लाखों लोग बेघर हो चुके हैं, उनके पास न भोजन है और न सिर छिपाने के लिए छत। दुनिया से मदद के तौर पर जो टैंट्स मिले हैं, उनमें परिवार रह रहे हैं।
लाखों लोग बेघर हो चुके हैं, उनके पास न भोजन है और न सिर छिपाने के लिए छत। दुनिया से मदद के तौर पर जो टैंट्स मिले हैं, उनमें परिवार रह रहे हैं।

गेहूं, कपास और चावल की फसलें तबाह

पाकिस्तान में गेहूं, कपास यानी कॉटन और चावल अच्छी तादाद में होता है। बाढ़ की वजह से यह फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। अफसर बताते हैं कि कपास का तो आधा उत्पादन भी नहीं हो सकता। इसका असर रेडिमेड गारमेंट सेक्टर पर पड़ेगा। इससे एक्सपोर्ट न के बराबर होगा। अमेरिका और चीन में भी इस बार कॉटन की फसल गर्मी की वजह से खराब हो चुकी है।

गेहूं और चावल की फसलें तबाह होने से भुखमरी का खतरा पैदा हो गया है। पाकिस्तान पहले ही इन चीजों को इम्पोर्ट कर रहा था, अब कंगाली में क्या करेगा, यह देखना होगा। मुल्क में ‘वर्ल्ड फूड प्रोग्राम’ के डायरेक्टर राठी पलाकृष्णन कहते हैं- हालात हकीकत में बेहद खराब हैं। खाने के लिए तो छोड़िए, अब तो किसानों के पास बीज तक नहीं है।