यूके / पेड़ों को बचाने के लिए 34 साल की महिला ने पेड़ से शादी की



केट कंनिंघम ने एल्डर प्रजाति के पेड़ से शादी की है। केट कंनिंघम ने एल्डर प्रजाति के पेड़ से शादी की है।
Kate Cunningham 'marries' a tree, bizarre wedding ceremony was held in a Merseyside park
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केट कंनिंघम ने एल्डर प्रजाति के पेड़ से शादी की है।केट कंनिंघम ने एल्डर प्रजाति के पेड़ से शादी की है।
Kate Cunningham 'marries' a tree, bizarre wedding ceremony was held in a Merseyside park

  • लिथरलैंड के रिमरोज घाटी पार्क के पेड़ों को बचाने के लिए महिला ने अपना सरनेम भी बदला
  • पिता ने किया शादी समारोह का आयोजन, बॉयफ्रेंड के साथ बच्चे भी शादी समारोह में शामिल हुए 
  • इंग्लैंड राजमार्ग लिवरपूल पोर्ट में यातायात के दवाब को कम करने के लिए घाटी में बायपास बनाना चाहता है

Dainik Bhaskar

Sep 15, 2019, 10:45 AM IST

लिथरलैंड (लिवरपूल).  पेड़ों के प्रति लोगों में जागरुकता लाने और उन्हें बचाने के लिए शनिवार को पर्यावरण संरक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता केट कंनिंघम ने एल्डर प्रजाति नाम के एक पेड़ से शादी कर ली। इतना ही नहीं केट ने अपना सरनेम भी बदलकर केट रोज एल्डर कर लिया है। उनके नए पार्टनर चुनने में उनके परिवार ने भी पूरा सहयोग किया।

 

मर्सीसाइड पार्क में हुए शादी समारोह में केट के पिता, ब्रॉयफ्रेंड और बच्चों के साथ कई लोग शामिल हुए। केट ने बताया, उनके बॉयफ्रेंड ने उनके फैसले पर पूरा सहयोग किया जबकि उनका एक बेटा पहले शर्म महसूस कर रहा था, लेकिन वह भी शादी समारोह में शामिल हुआ। शादी समारोह का आयोजन केट के पिता ने किया।

रिमरोज घाटी पार्क के पेड़ों को बचाना मकसद

  1. 34 साल की दुल्हन केट कंनिंघम ने लिथरलैंड के रिमरोज घाटी पार्क में स्थित पेड़ से शादी की। शादी का मकसद लोगों को पेड़ों का महत्व बताना है। कंनिंघम इस क्षेत्र के पेड़ों को बचाने के लिए एक अभियान भी चलाएंगी जो नए बायपास के निर्माण में काटे जा सकते हैं।

  2. केट ने कहा, हमारा मकसद स्थानीय लोगों के साथ मिलकर रिमरोज घाटी से गुजरने वाले लगभग 9 किलोमीटर लंबे बायपास प्रोजेक्ट को बंद कराने के लिए अभियान चलाना हैं। बायपास का प्रस्ताव इंग्लैंड राजमार्ग द्वारा दिया गया है। इसका उद्देश्य पोर्ट ऑफ लिवरपूल में यातायात के दवाब को कम करना है।

  3. केट ने कहा, यह स्थान मुझे बहुत पसंद है। मेरी मां की मौत अस्थमा से हुई थी। मैं खुद फेफड़ों की बीमारी ब्रोन्किइक्टेसिस से पीड़ित हूं। इस जगह को तबाह कर एक सड़क बनाने का कोई मतलब नहीं है। हमारे इलाके में पहले से ही काफी प्रदूषण है। यदि इस जगह के पेड़ों को काटकर सड़क बनाई जाती है तो यह सीधा-सीधा हम सभी के स्वास्थ्य पर हमला है।

     

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