वक्त का सितम:अफगानिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री खालिद पाएंदा अब US में कैब ड्राइवर; पहले लाखों डॉलर संभाले, अब गुजर मुश्किल

वॉशिंगटन9 महीने पहले

खालिद माने स्थायी, लेकिन अफगानिस्तान के फाइनेंस मिनिस्टर रहे खालिद पाएंदा के जीवन में अब कुछ स्थायी नहीं है। पिछले साल अगस्त तक जो शख्स मुल्क के 6 अरब डॉलर का खजाना संभालता था, आज वो अमेरिका में पेट भरने के लिए कैब ड्राइवर बन चुका है।

मुल्क पर तालिबान का कब्जा हो गया। अमेरिकी सेना अफगानिस्तान छोड़कर चली गई। प्रेसिडेंट अशरफ गनी और उनके मंत्री आवाम को बेचारगी में छोड़कर विदेश चले गए। खालिद भी उनमें से एक हैं, लेकिन, उनके हालात गनी की तरह नहीं हैं। वो अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में कैब चलाकर गुजारा कर रहे हैं।

बोनस के लिए मशक्कत
‘वॉशिंगटन पोस्ट’ से बातचीत में खालिद कहते हैं- अगले दो दिन में मुझे 50 ट्रिप्स पूरी करनी हैं। इसके बदले मुझे 95 डॉलर का बोनस मिलेगा। घर में पत्नी और चार बच्चे हैं। कुछ सेविंग्स थीं। उससे भी काम चल रहा है। मेरे मुल्क अफगानिस्तान में हालात बेहद बदतर हैं। महामारी तो थी ही, अब सूखा भी पड़ रहा है। दुनिया ने तमाम पाबंदियां लगा दी हैं। इकोनॉमी तबाह हो चुकी है और तालिबान ने महिलाओं की जिंदगी बदतर कर दी है।

जो बाइडेन ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का ठीकरा वहां की सरकार पर फोड़ दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था- हमने अफगानिस्तान की सरकार को हर चीज मुहैया कराई। हर मौका दिया ताकि वे अपना भविष्य बेहतर बनाएं।

खालिद कहते हैं- कभी मैं इंटरनेशल ऑफिसों में गेस्ट हुआ करता था। अब वहां पैसेंजर्स को पिक एंड ड्रॉप करता हूं।
खालिद कहते हैं- कभी मैं इंटरनेशल ऑफिसों में गेस्ट हुआ करता था। अब वहां पैसेंजर्स को पिक एंड ड्रॉप करता हूं।

कहीं का नहीं रहा
खालिद कहते हैं- मेरी जिंदगी का एक हिस्सा अफगानिस्तान में गुजरा। अब मैं अमेरिका में हूं। सच कहूं तो मैं अब कहीं का नहीं रहा। अपने मुल्क लौट नहीं सकता और यहां का कोई ठिकाना नहीं। आज मुझे चार डॉलर की टिप मिली।

खालिद बताते हैं कि तालिबान के कब्जे के कुछ दिन पहले उन्होंने अफगानिस्तान के वित्त मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके मुताबिक- लेबनान की एक कंपनी का पेमेंट नहीं हो पाया था और इसी वजह से राष्ट्रपति गनी मुझसे नाराज थे। उन्होंने मुझे खूब खरीखोटी सुनाईं।

वॉशिंगटन डीसी में खालिद एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते हैं। यहां उनके साथ पत्नी और चार बच्चे भी रहते हैं।
वॉशिंगटन डीसी में खालिद एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते हैं। यहां उनके साथ पत्नी और चार बच्चे भी रहते हैं।

15 अगस्त के पहले ही मुल्क छोड़ दिया
पाएंदा का परिवार अगस्त के पहले हफ्ते में ही अफगानिस्तान से अमेरिका पहुंच चुका था। वो भी 15 अगस्त के पहले वॉशिंगटन पहुंच चुके थे। खालिद कहते हैं- दुनिया ने हमें 20 साल दिए। हर तरह की मदद दी। बदकिस्मती से हम नाकाम रहे। करप्शन की वजह से हमारा सिस्टम ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। सच्चाई ये है कि हमने अपनी आवाम को धोखा दिया। मिनिस्टर्स जानते थे कि तालिबान मुल्क पर कब्जा कर लेगा। वो वॉट्सएप पर मुल्क छोड़ने के मैसेज एक्सचेंज कर रहे थे।

खालिद के मुताबिक, वो अफगानिस्तान वापस जा नहीं सकते और अमेरिका में कब तक रह पाएंगे, कह नहीं सकते।
खालिद के मुताबिक, वो अफगानिस्तान वापस जा नहीं सकते और अमेरिका में कब तक रह पाएंगे, कह नहीं सकते।

जख्मों को कुरेदना सही नहीं
आखिर अफगानिस्तान में हुआ क्या था? इस सवाल पर खालिद कहते हैं- यह जख्मों को कुरेदने जैसा होगा। खास बात यह है कि फिलहाल, मोहम्मद उमर तालिबान हुकूमत में वित्त मंत्री हैं और वो खालिद के बचपन के दोस्त हैं।

किसी वक्त पाकिस्तान में वक्त गुजारने वाले खालिद ने अफगानिस्तान में पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाई थी। वो मानते हैं कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में लोकतंत्र, महिला अधिकार और मानवाधिकार की लंबी लड़ाई लड़ी। 2008 में खालिद पहली बार अमेरिका आए थे। अमेरिका के कहने पर ही अशरफ गनी ने 2016 में उन्हें डिप्टी फाइनेंस मिनिस्टर बनाया था। काबुल में उनकी मां कोरोना से हार गई थीं। उनके दोस्त और पत्नी नहीं चाहती थीं कि खालिद वित्त मंत्री बनें, क्योंकि उस वक्त तालिबान तेजी से बढ़ रहा था।

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