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50 दिन के रूस- यूक्रेन जंग का दुनिया पर असर:10 देशों से भास्कर रिपोर्ट; जानिए भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में क्या है हाल

4 महीने पहले

रूस-यूक्रेन जंग ने पूरी दुनिया का ताना-बाना बिगाड़ दिया है। इसने कोविड से उबरने की कोशिश कर रही दुनिया को महंगाई के भंवर में धकेल दिया है। खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन कीमतें आसमान छू रही हैं। कई देशों में महंगाई के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं और यह चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। UN की संस्था अंकटाड ने वैश्विक विकास दर का अनुमान 3.6% से 2.6% कर दिया है।

राहत की बात यह है कि इन सबका भारत पर कम ही असर पड़ा है। वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने से कच्चे तेल समेत कमोडिटी के दाम बढ़े हैं लेकिन कृषि उत्पादन पर कम निर्भरता से भारत पर कम ही प्रभाव पड़ा है।

जर्मनी, इटली और स्पेन समेत कई यूरोपीय देशों में सनफ्लावर ऑयल और आटे का स्टॉक खत्म हो रहा है। लोग घबराहट में खरीदारी कर रहे हैं। स्पेन में जरूरी सामानों की बिक्री में 14% उछाल आया है। पैनिक बाइंग रोकने और सामान का स्टॉक बनाए रखने के लिए जर्मनी, स्पेन, इटली के सुपर मार्केट ने ग्राहकों को सीमित मात्रा में सामान देने का नियम लागू किया है।

यहां एक ग्राहक सनफ्लावर ऑयल की एक ही बॉटल खरीद सकता है। सुपर स्टोर्स में सनफ्लावर ऑयल के शेल्फ खाली मिलते हैं। सरसों या ऑलिव ऑयल जैसे महंगे तेल खरीदने पड़ रहे हैं। मार्च में स्पेनिश उपभोक्ता कीमतों में 9.8% का इजाफा हुआ, जो 1985 के बाद सबसे अधिक है। यूरोप के बाकी देशों में भी ऐसा ही ट्रेंड है।

यूरोप में जरूरी सामान 20% महंगा
यूरोप में एक साल पहले की तुलना में बुनियादी सामानों की खरीद पर 20% अधिक खर्च करना पड़ रहा है। बार्सिलोना बिजनेस स्कूल एसेड के प्रोफेसर जुआन अजनर बताते हैं कि कंज्यूमर सेलेक्टिव हो गए हैं और सस्ते विकल्पों की तलाश में अधिक समय खर्च कर रहे हैंं।

यूरोप में नेचुरल गैस के दाम 62% बढ़ गए हैं। पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट होने वाले सनफ्लावर ऑयल का 46% हिस्सा यूक्रेन और 23% हिस्सा रूस उपलब्ध करवाता है। वहीं रूस दुनिया में गेहूं का सबसे बड़ा निर्यातक है। दोनों ही देशों के जंग में होने के कारण अन्य देशों के पास कोई बड़ा विकल्प मौजूद नहीं है। ये दोनों ही उत्पाद, यूरोप के हर घर में इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए ज्यादा परेशानी हो रही है।

एल्युमिनियम की सप्लाई रुकने से इंडस्ट्री पर असर
कम उपलब्धता का असर कई देशों के रेस्टोरेंट और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पर भी हो रहा है। जंग के कारण इंडस्ट्रियल कम्पोनेंट्स और मटेरियल्स का ट्रांसपोर्टेशन बाधित होने और महंगी एनर्जी का असर यूरोप के उद्योगों पर भी आएगा।

जानकारों के मुताबिक स्टील, निकल और एल्युमिनियम की बड़ी मात्रा में सप्लाई रूस से होती है। ऐसे में मेन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। ऑटोमोबाइल कंपनियों ने रूस में अपने उत्पाद बेचना बंद कर दिए हैं। इससे उनकी सेल भी प्रभावित होगी।

टूरिज्म वाले देशों में सैलानी कम हुए
कोविड के बाद सबसे ज्यादा उम्मीद यूरोप के टूरिज्म इंडस्ट्री को थी, लेकिन सैलानियों की तादाद बढ़ते ही जंग शुरू हो गया। नई अंतरराष्ट्रीय बुकिंग रोक दी गई। अकेले जंग के पहले सप्ताह में, यूरोप के भीतर एयरलाइन बुकिंग 23% गिर गई और यूरोपीय देशों में ट्रांस-अटलांटिक बुकिंग 13% गिर गई। स्पेन, ग्रीस, इटली और क्रोएशिया सहित कई यूरोपीय देश टूरिज्म पर अधिक निर्भर हैं।

इन्होंने महामारी से राजस्व के नुकसान का सपना संजोया था, लेकिन अब भरपाई असंभव लग रही है। अब तक सबसे ज्यादा प्रभावित देश पोलैंड, बुल्गारिया, क्रोएशिया, एस्टोनिया और हंगरी सहित यूक्रेन के पड़ोसी देश हैं, जहां बुकिंग में 50% की कमी देखी गई है। एक सर्वे के मुताबिक 47% अमेरिकी ने यात्रा टाल दी है। इटली के पर्यटन मंत्री मास्सिमो गारवाग्लिया ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, अगर आधे अमेरिकी यूरोप नहीं आते हैं, तो हालात बहुत भयावह होने जा रहे हैं।

जापान ने रूस को मोस्ट फेवर्ड नेशंस से बाहर किया, पर ईंधन के मामले में हाथ तंग
जापान ने रूस को मोस्ट फेवर्ड नेशंस की सूची से बाहर कर दिया है। इससे रूसी आयात महंगा हो गया है। पुतिन और उनके करीबियों के ऐसेट सीज किए हैं। रूस को 266 वस्तुओं और टेक्नोलॉजी के निर्यात पर रोक लगाई है। फिर भी ईंधन के मामले में रूस के हाथ तंग हैं।

जापान ने रूसी ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा निवेश किया है, जो अब देश के कच्चे तेल का 4% और एलएनजी की 9% जरूरतों को पूरा करता है। जापान के 17 परमाणु संयंत्रों में से छह चालू हैं और उद्योग को टिके रखने के लिए तेल और तरल प्राकृतिक गैस के आयात को कम करना पड़ा है।

चीन ने जंग से पहले रूस से 6 लाख करोड़ रु. का तेल-गैस सौदा कर नुकसान कम किया
चीन में भी ईंधन कीमतें बढ़ी हैं। लेकिन जंग शुरू होने से पहले बीजिंग ने रूस के साथ 6 लाख करोड़ रु. का तेल-गैस सौदा कर इस नुकसान को कम किया हैै। उसकी चिंता जंग के चलते यूरोप में आई आर्थिक सुस्ती है। कुल इंपोर्ट का 15% हिस्सा यूरोपियन यूनियन को जाता है।

रूस-यूक्रेन के साथ चीन का व्यापार 11.2 लाख करोड़ व 8.45 लाख करोड़ रु. का है। लंबे संघर्ष से चीन को व्यापार घाटा होगा। चीन यूरोपियन यूनियन का बड़ा साझेदार है। यूरोप आर्थिक संकट में है। 1 पॉइंट जीडीपी घटने से चीन को 0.3% का घाटा होगा।

अमेरिका में महंगाई से घर का बजट बिगड़ा
अमेरिका में रूस से फर्टिलाइजर का एक्सपोर्ट रुकने से खेती पर भी असर पड़ेगा। इससे खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है। अमेरिकी कृषि कंपनियों में छंटनी के बादल मंडरा रहे हैं। 2014 के बाद से तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। ये कीमतें नियंत्रण में नहीं आती हैं तो महंगाई 10% पहुंच सकती है, जो 1981 के बाद सबसे अधिक होगी।

अमेरिका पर रूसी साइबर अटैक का खतरा है। एफबीआई ने चेतावनी दी है कि रूसी हैकर 5 एनर्जी कंपनियों के नेटवर्क को स्कैन कर रहे हैं।

ब्रिटेन में घर की औसतन आय 2.11 लाख रु. घट जाएगी, फर्टिलाइजर 5 गुना महंगे
यूक्रेन-रूस को ‘द ब्रेड बॉस्केट ऑफ यूरोप’ कहा जाता है। जंग के बाद अनाज के दाम 40.6% बढ़ गए हैं। सीईबीआर के मुताबिक यूके में घर की आय औसतन 2.11 लाख रुपए घट जाएगी। फर्टिलाइजर के दाम पांच गुना बढ़ चुके हैं। इससे खाद्य संकट पैदा होगा। पेट्रो कीमतें 35% बढ़ गई है। गैस की कीमतें दो साल पहले की तुलना में 20 गुना है।

मिडिल ईस्ट में जंग जोखिम भरे प्रभाव, लेन-देन के अवसर लेकर भी आया
खाड़ी के लिए जंग जोखिम भरे प्रभाव, लेन-देन के अवसर और सौदेबाजी के मौके लाया है। 300 पश्चिमी कंपनियों ने रूस से नाता तोड़ लिया है। यूरोपीय देश रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम कर रहे हैं और मिडिल ईस्ट एक विकल्प बन सकता है।

खाड़ी देश बढ़ती तेल और गैस कीमत से लाभार्थी हुए हैं। खाड़ी देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए पश्चिमी दबाव का विरोध किया है। मिडिल ईस्ट तेल कीमतों में 13% कमी करने में सक्षम। ऐसा न करके उसने वॉशिंगटन को एक संदेश भेजा, ताकि वो अपने साथी पर ध्यान दे।

ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल दोगुना महंगा हुआ, महंगाई मुद्दा बना तो राहतें भी दे रहे
ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल कीमतें दोगुनी हो गई हैं। महंगाई चुनावी मुद्दा बन गया है। लिहाजा फेडरल सरकार ने निम्न-मध्य वर्ग के हर परिवार को 19 हजार रुपए और इनकम टैक्स में 1.14 लाख रुपए की राहत दी है। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने रूस-चीन दोस्ती को नापाक कहा है।

चीन ऑस्ट्रेलिया के नजदीक सोलोमन द्वीप पर सेना तैनात करने के लिए वहां की सरकार से करार करने जा रही हैै। ऑस्ट्रेलिया ने आशंका व्यक्त की है कि ऐसा करके चीन ऑस्ट्रेलिया या आसपास के देशों में रूस जैसी हरकत करना चाहता है।