खुलासा / लाहौर के महाराजा ने इंग्लैंड की महारानी को तोहफे में नहीं, दबाव में दिया था कोहिनूर

महारानी के ताज में लगा कोहिनूर इस समय करीब 106 कैरेट का है, जब इसकी खोज हुई थी तो इसका वजन करीब 700 कैरेट के आसपास था। महारानी के ताज में लगा कोहिनूर इस समय करीब 106 कैरेट का है, जब इसकी खोज हुई थी तो इसका वजन करीब 700 कैरेट के आसपास था।
कोहिनूर हीरा ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के ताज में लगा दिया गया था। कोहिनूर हीरा ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के ताज में लगा दिया गया था।
भारत, ब्रिटिश सरकार से कई बार कोहिनूर लौटाने का अनुरोध कर चुका है। हालांकि, 2013 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने इस मांग को ख्रारिज कर दिया था। भारत, ब्रिटिश सरकार से कई बार कोहिनूर लौटाने का अनुरोध कर चुका है। हालांकि, 2013 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने इस मांग को ख्रारिज कर दिया था।
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महारानी के ताज में लगा कोहिनूर इस समय करीब 106 कैरेट का है, जब इसकी खोज हुई थी तो इसका वजन करीब 700 कैरेट के आसपास था।महारानी के ताज में लगा कोहिनूर इस समय करीब 106 कैरेट का है, जब इसकी खोज हुई थी तो इसका वजन करीब 700 कैरेट के आसपास था।
कोहिनूर हीरा ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के ताज में लगा दिया गया था।कोहिनूर हीरा ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के ताज में लगा दिया गया था।
भारत, ब्रिटिश सरकार से कई बार कोहिनूर लौटाने का अनुरोध कर चुका है। हालांकि, 2013 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने इस मांग को ख्रारिज कर दिया था।भारत, ब्रिटिश सरकार से कई बार कोहिनूर लौटाने का अनुरोध कर चुका है। हालांकि, 2013 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने इस मांग को ख्रारिज कर दिया था।

  • भारत सरकार ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कोहिनूर हीरा ईस्ट इंडिया कंपनी को भेंट किया गया था
  • आरटीआई के जवाब में कहा गया- अंग्रेजों ने लाहौर संधि के जरिए जबरन लिया था कोहिनूर

Oct 16, 2018, 11:58 AM IST

नई दिल्ली. दुनियाभर में मशहूर कोहिनूर हीरा न तो ईस्ट इंडिया कंपनी को तोहफे में दिया गया था और न ही चोरी हुआ था। बल्कि लाहौर के महाराजा दलीप सिंह को हीरा दबाव में इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के सामने सरेंडर करना पड़ना था। यह खुलासा एक आरटीआई के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने किया है। 

लाहौर संधि के तहत देना पड़ा कोहिनूर

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, एएसआई ने जवाब के लिए लाहौर संधि का जिक्र किया। इसमें बताया गया कि 1849 में ईस्ट इंडिया कंपनी के लॉर्ड डलहौजी और महाराजा दलीप सिंह के बीच संधि हुई थी। इसमें महाराजा से कोहिनूर सरेंडर करने के लिए कहा गया था। 

एएसआई ने साफ किया है कि संधि के दौरान दलीप सिंह (जो कि उस वक्त सिर्फ नौ साल के थे) ने अपनी मर्जी से महारानी को हीरा भेंट नहीं किया था, बल्कि उनसे कोहिनूर जबरन लिया गया था। 

2016 में भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोहिनूर हीरा न तो अंग्रेजों ने जबरदस्ती लिया था और न ही यह चोरी हुआ था। सरकार ने कहा था कि पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी ने एंग्लो-सिख युद्ध के खर्च के बदले 'स्वैच्छिक मुआवजे' के रूप में अंग्रेजों को कोहिनूर भेंट किया था। 

कोहिनूर पर जानकारी के लिए कार्यकर्ता रोहित सभरवाल ने आरटीआई डाली थी। उन्होंने इसका जवाब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से मांगा था। आरटीआई में पूछा था कि आखिर किस आधार पर कोहिनूर ब्रिटेन को दिया गया।

पीएमओ ने उनकी अपील भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेज दी। आरटीआई एक्ट के मुताबिक, एक लोक प्राधिकरण जानकारी के लिए आरटीआई को दूसरे प्राधिकरण के पास ट्रांसफर कर सकता है।

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