2030 तक वनों की कटाई होगी बंद:अमेरिका सहित 100 से अधिक देशों के नेताओं ने वनों की कटाई पर रोक लगाने का लिया संकल्प

3 महीने पहलेलेखक: कार्टिन ईनहॉर्न/क्रिस बुकले
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28 देश वनों की कटाई से जुड़ी चीजों के आयात को बंद करेंगे। - Dainik Bhaskar
28 देश वनों की कटाई से जुड़ी चीजों के आयात को बंद करेंगे।

ग्लासगो जलवायु सम्मेलन में अमेरिका सहित 100 से अधिक देशों के नेताओं ने 2030 तक वनों की कटाई बंद करने का संकल्प लिया है। दुनिया के कुल जंगलों में से संयुक्त रूप से इन देशों का 85% हिस्सा है। संकल्प के तहत छह सूत्री एजेंडा रखा गया है, जिसे वन संरक्षण की दिशा में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी (पीपीपी) से पाने का प्रयास करना है।

सरकारों ने अगले 5 साल में वन हानि को कम करने और रोकने के लिए सार्वजनिक निधि में 12 अरब डॉलर (करीब 90 हजार करोड़ रु.), जबकि निजी कंपनियों ने 7 अरब डॉलर (करीब 37 हजार करोड़ रु.) देने का ऐलान किया। दोनों को मिलाकर 1.27 लाख करोड़ रुपए आएंगे। 30 से ज्यादा वित्तीय संस्थानों ने कहा कि उन कंपिनयों में निवेश नहीं करेंगे, जो जंगलों के विनाश में भागीदार हों। 28 देश वनों की कटाई से जुड़ी चीजों के आयात को बंद करेंगे।

इसमें पाम तेल, सोया और कोकोआ शामिल है। साथ ही वनों का विनाश और उसकी सप्लाई चेन को खत्म करने के लिए नई गाइडलाइन बनाई जाएगी। घोषणा के मुताबिक इस संकल्प पर अमल से वन और भूमि उपयोग पर 1.3 करोड़ वर्ग मील से अधिक के जंगलों को बचाया जा सकेगा। दूसरी तरफ, वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट के फ्रांसिस सीमोर ने कहा, ‘वित्तीय उपायों के ऐलान का स्वागत है, पर वनों को बचाने के लिए यह बहुत मामूली है।

न्यूयॉर्क में करार से दूर रहे थे ब्राजील और रूस
पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि ऐसे वादों से वनों की कटाई नहीं रुकने वाली। वनों का विनाश रोकने के लिए 2014 में न्यूयॉर्क में ऐसा ही करार हुआ था। पर बाध्यकारी नहीं था। इसमें साल 2020 तक वनों की कटाई आधी और 2030 तक पूर्ण पाबंदी का लक्ष्य था। 40 देशों ने इस पर दस्तखत भी किए थे। लेकिन वनों से समृद्ध चीन, रूस जैसे देशों ने इस करार पर दस्तखत नहीं किए। इन्हीं वजहों से करार 2019 में नाकाम हो गया।

हर मिनट काटे जा रहे 27 फुटबॉल मैदान जितने वन

  • इंडोनेशया दुनिया का सबसे बड़ा पाम तेल निर्यातक देश है। इस तेल का इस्तेमाल शैम्पू से लेकर बिस्कुट तक हर चीज में होता है। पाम के उत्पादन से वनों के विनाश के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए संकट खड़ा करता है।
  • अमेजन के जंगल दुनिया के सबसे विशाल वर्षावन है। इनकी 12 साल में तेजी से कटाई हो रही है। आग ने इस मुश्किल को और बढ़ा दिया। 2014 में जब जंगल बचाने की पहल हुई थी, तो ब्राजील ने करार पर दस्तखत नहीं किए।

माेदी बोले- ऊर्जा समस्या ग्रीन ग्रिड से हल होगी
ग्लासगो में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन ने कुछ देशों को समृद्ध तो किया, पर पर्यावरण को खराब कर दिया। सौर ऊर्जा स्वच्छ-टिकाऊ है। चुनौती यह है कि ये सिर्फ दिन में उपलब्ध होती है। ‘वन सन, वन वर्ल्ड एंड वन ग्रिड’और ‘ग्रीन ग्रिड’ इस समस्या का समाधान है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो दुनिया को सोलर कैलकुलेटर एप्लीकेशन उपलब्ध कराने जा रही है। मोदी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिग गेट्स से भी मिले। दोनों ने महामारी से लड़ने के बारे में बात की।