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रूजवेल्ट की राह पर बाइडेन:अमेरिका को संकट से उबारने के लिए रूजवेल्ट की तरह 100 दिन के काम की लिस्ट बनाई, तेजी से ले रहे फैसले

3 महीने पहलेलेखक: पीटर बेकर
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अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले बाइडेन ने रूजवेल्ट (बाएं) से जुड़ी कई किताबें पढ़ी थी। - Dainik Bhaskar
अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने से पहले बाइडेन ने रूजवेल्ट (बाएं) से जुड़ी कई किताबें पढ़ी थी।
  • 10 दिन में 45 बड़े आदेश पर दस्तखत कर बाइडेन ने बनाया तेजी से काम का रिकॉर्ड

अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन को पद संभाले अभी दूसरा हफ्ता ही चल रहा है। इतने कम वक्त में उन्होंने ट्रम्प के फैसले पलटकर पेरिस समझौते में वापसी, एच-1बी समेत 45 बड़े आदेशों पर दस्तखत कर दिए। साथ ही तेजी से काम करने का रिकॉर्ड बनाया है। तेजी से फैसले करने की बड़ी वजह बाइडेन का होमवर्क है।

उन्हें जिस स्थिति में देश संभालना पड़ रहा है, हाल के 7-8 दशकों में ऐसे संकट का सामना अमेरिका के किसी और राष्ट्रपति को नहीं करना पड़ा। इसलिए उन्होंने पद संभालने से पहले कई हफ्ते तक पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट से जुड़ी किताबों, जीवनी और पहले 100 दिन के काम की प्राथमिकता का गहन अध्ययन किया। रूजवेल्ट के नक्शेकदम पर चलने की सबसे बड़ी वजह तब और आज के हालात लगभग एक जैसे होना है।

रूजवेल्ट की तरह ही बाइडेन अपनी रफ्तार जारी रखना चाहते हैं। यही वजह है कि फरवरी में जब संसद शुरू होगी, तो वह 1.9 लाख करोड़ (करीब 140 लाख करोड़ रुपए) के कोरोना पैकेज को सबसे पहले मंजूरी दिलाना चाहते हैं। रूजवेल्ट के पहले 100 दिनों के कामकाज पर लिखने वाले मैसाच्युसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के निदेशक अलसादेयर एस. रॉबर्ट्स ने बताया कि बाइडेन प्रशासन सत्ता संभालते ही बेहद अच्छे फैसले लिए हैं। प्राथमिकता के साथ तेजी से फैसलों से ट्रम्प के निर्णयों से जो नुकसान हुआ था, उसके भरपाई होना शुरू हो गई है।

रूजवेल्ट को फॉलो क्यों कर रहे?
रूजवेल्ट ने 1933 में जब देश की कमान संभाली, तब अमेरिका में भीषण मंदी थी। 20% से ज्यादा आबादी बेरोजगार थी। रूजवेल्ट ने ऐसे कई कार्यक्रम चलाए जिनसे लोगों को रोजगार दिया जा सके। उन्होंने आपातकालीन बैंकिंग, सामाजिक सुरक्षा कानून लागू कराया। उनके प्रयासों से अर्थव्यवस्था संभली भी।

ट्रम्प के सबसे बड़े मददगार ने कैपिटल में दंगों की रैली को दिया पैसा
ट्रम्प के सबसे बड़े दानदाता जूली जेंकिंस फैंसली ने ही कैपिटल हिल की रैली के लिए 3 लाख डॉलर (करीब 2.2 करोड़ रुपए) दिए थे। यह दावा वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में किया गया है। बाद ही में इसी रैली ने अमेरिकी राजधानी में दंगे किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक सुपर मार्केट चेन के मालिक जूली ट्रम्प के अभियान में सबसे बड़े दानदाताओं में से एक हैं। ट्रम्प पर आरोप लग रहे है कि व्हाइट हाउस में बने रहने के लिए उन्होंने अपने समर्थकों को उकसाया था। इसी कारण ये दंगे हुए थे।

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