इमरान को बचाने वाले की कहानी:गोली मारने जा रहा था हमलावर, इब्तिसाम फरिश्ता बन आ गए

इस्लामाबाद3 महीने पहले
वीडियो में लाल रंग की शर्ट पहने हुए इब्तिसाम हैं। उन्होंने हमलावर को पकड़ा और इमरान की जान बचाई।

गुजरांवाला में 3 नवंबर को रैली के दौरान हुई फायरिंग में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बाल-बाल बच गए। उनके पैर में गोलियां लगी हैं। इस फायरिंग में इमरान की जान भी जा सकती थी, लेकिन उनके कंटेनर से सिर्फ 10 फीट की दूरी पर मौजूद इब्तिसाम ने अनहोनी को रोक दिया।

इमरान की जान बचाने में इब्तिसाम का बहुत बड़ा रोल है। इमरान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने भी इब्तिसाम का शुक्रिया किया है।

इब्तिसाम ने खुद बताया कि किस तरह उन्होंने इमरान की जान बचाई। पूरी कहानी जानने से पहले आप हमारे पोल में हिस्सा ले सकते हैं...

इमरान को 3-4 गोलियां लगीं, खतरे से बाहर...

इमरान खान के पैर में तीन-चार गोलियां लगीं। निशाना चूकने के बाद हमलावर वहां से तुरंत भागा, लेकिन समर्थकों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी। उसे बाद में सुरक्षाकर्मियों ने अरेस्ट कर लिया। घटना तब हुई, जब गुजरांवाला में रैली के दौरान इमरान कंटेनर पर खड़े होकर समर्थकों का अभिवादन कर रहे थे। गोली लगते ही इमरान खान गिर पड़े।

3 अक्टूबर को रैली के दौरान जब इमरान पर गोली चली तो वे तुरंत गिर पड़े।
3 अक्टूबर को रैली के दौरान जब इमरान पर गोली चली तो वे तुरंत गिर पड़े।

इमरान अभी अस्पताल में हैं। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। उनके डॉक्टर फैसल सुल्तान ने बताया कि इमरान खान के पैर के टिबिया बोन में गोली लगी है। ऑपरेशन कर इसे निकाला जाएगा। इस घटना की पूरी डिटेल्स के लिए आप यहां क्लिक करें...

इमरान की जान बचाने वाले ने बताई पूरी कहानी...

इमरान जब कंटेनर पर खड़े थे, तब वहीं इब्तिसाम भी मौजूद थे। इसी वक्त हमलावर इमरान पर फायरिंग करने जा रहा था।
इमरान जब कंटेनर पर खड़े थे, तब वहीं इब्तिसाम भी मौजूद थे। इसी वक्त हमलावर इमरान पर फायरिंग करने जा रहा था।
तस्वीर में काले रंग के कपड़ों में हमलावर है, जिसे पीछे खड़े इमरान के समर्थक ने पकड़ लिया।
तस्वीर में काले रंग के कपड़ों में हमलावर है, जिसे पीछे खड़े इमरान के समर्थक ने पकड़ लिया।

इब्तिसाम भी वहीं खड़े थे, जहां हमलावर मौजूद था। इब्तिसाम ने कहा, "मैं कंटेनर से 10 फीट दूर था। तभी हमलावर आया। उसने बर्स्ट फायर करने वाली ऑटोमेटिक पिस्टल में मैग्जीन लोड की। जैसे ही उसने दोनों हाथ ऊपर कर फायर किया, मैंने उसे नीचे की तरफ दबाया। उसके हाथ से पिस्टल छूट गई और निशाना गलत हो गया। वह भागा। मैंने पीछा कर उसे पकड़ लिया। हमलावर ने गोली चला ही दी थी। मैं हाथ न मारता तो इमरान बच नहीं पाते। मैंने देखा कि हमलावर अपनी बंदूक लोड कर रहा है। मैंने उसका हाथ पकड़कर नीचे कर दिया।"

इमरान ने शुक्रिया अदा किया, पूर्व पत्नी जेमिमा ने हीरो बताया
इमरान खान ने जान बचाने पर इब्तिसाम का शुक्रिया अदा किया है। इमरान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने उनकी जान बचाने वाले शख्स की तारीफ की। उन्होंने इस शख्स को हीरो बताया। जेमिमा ने ट्वीट किया- शुक्र है कि वो (इमरान) ठीक हैं। उनके बेटे उस बहादुर शख्स (हीरो) के आभारी हैं जिसने हमलावर को पकड़वाया और उनके पिता की जान बचाई।

साल 1995 में 42 साल की उम्र में इमरान खान ने 21 साल की जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी की। उनकी ये शादी 1995 से 2004 तक चली। दोनों के दो बेटे हैं।
साल 1995 में 42 साल की उम्र में इमरान खान ने 21 साल की जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी की। उनकी ये शादी 1995 से 2004 तक चली। दोनों के दो बेटे हैं।

सोशल मीडिया पर इब्तिसाम सुपरस्टार
सोशल मीडिया पर इब्तिसाम को 'सुपरस्टार ऑफ द डे' कहा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा- पाकिस्तान का रियल हीरो, जिसने अकेले ही इमरान खान की जिंदगी बचाई। एक दूसरे यूजर ने कहा- इस लाल शर्ट पहने शख्स ने इमरान खान की जान बचाई है। हम हमेशा आपके कर्जदार रहेंगे।

इमरान खान के एक समर्थक ने लिखा- यह वही फरिश्ता है, जिसने हमलावर की बंदूक नीचे की।

आरोपी बोला- इमरान नमाज के वक्त DJ बजाते थे, यह मंजूर नहीं था

हमलावर की ये तस्वीर पुलिस कस्टडी में बनाए गए वीडियो से ली गई है। पुलिस ने अभी इसका नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
हमलावर की ये तस्वीर पुलिस कस्टडी में बनाए गए वीडियो से ली गई है। पुलिस ने अभी इसका नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

इमरान पर गोली चलाने वाले ने पुलिस को हमले की वजह बताई है। उसने कहा, "मैंने यह काम (इमरान पर फायरिंग) इसलिए किया, क्योंकि इमरान लोगों को गुमराह कर रहा है। मुझसे ये चीज देखी नहीं गई और मैंने उसको जान से मारने की कोशिश की। मैं तो सिर्फ इमरान खान को मारने आया था। मैं उसे इसलिए मारना चाहता था, क्योंकि इधर अजान होती रहती थी और उधर खान DJ लगाकर शोर करता रहता था। ये मेरे जमीर को गवारा नहीं था।

मैंने यह फैसला अचानक किया। इसके लिए पहले से कोई प्लानिंग नहीं थी। जिस दिन यह लॉन्ग मार्च लाहौर से शुरू हुआ था, उसी दिन मैंने फैसला कर लिया था कि इमरान को मैं छोड़ूंगा नहीं। मेरे पीछे कोई नहीं है, मैंने अकेले ही इस काम को अंजाम दिया। मैं बाइक से आया था और उसे अपने मामू की दुकान पर खड़ा कर दिया था।" इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

भास्कर एक्सप्लेनर में जानिए इमरान की जान पर क्यों बन आई

दरअसल इमरान की दो मांगें थीं। पाकिस्तान में चुनाव और आर्मी पर कंट्रोल। उन्होंने 3 लोगों पर हमले की साजिश का शक जाहिर किया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की आर्मी नहीं चाहती थी कि इमरान गुजरांवाला में रैली करें। भास्कर एक्सप्लेनर में जानिए इमरान का प्लान और आर्मी का रोल...