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मौलाना फजल-उर-रहमान ने कहा- इमरान पहले सिलेक्टेड पीएम थे, अब रिजेक्टेड हो गए हैं

9 महीने पहले
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सोमवार रात समर्थकों को संबोधित करते मौलाना फजल-उर-रहमान।
  • पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ का दावा- आजादी मार्च में 25 लाख लोगों की भागीदारी
  • मंत्रियों का दल आज मौलाना की अगुवाई वाली रहबर कमेटी से फिर बातचीत करेगा
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इस्लामाबाद. आजादी मार्च निकाल रहे मौलाना फजल-उर-रहमान ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री इमरान खान के इस्तीफे पर अड़े मौलाना ने सोमवार रात कहा- इमरान पहले तो सिलेक्टेड पीएम थे, अब वो रिजेक्टेड भी हो गए हैं। लिहाजा, उन्हें घर जाना चाहिए। इस बीच, सरकार ने सुलह की कोशिशें तेज कर दी हैं। इमरान ने मौलाना से बातचीत के लिए मंत्रियो की एक टीम बनाई है। यह मंगलवार दोपहर या शाम को उनसे मिलने जाएगी। आजादी मार्च में शिरकत करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ ने सोमवार को दावा किया कि आंदोलन में 25 लाख लोग शिरकत कर रहे हैं। 
 

पहले इस्तीफा दें, फिर बातचीत होगी
मौलाना ने इमरान को इस्तीफे के लिए सोमवार तक का अल्टीमेटम दिया था। इसके खत्म होने के बाद अब विपक्ष के साथ मिलकर वो नई रणनीति बना रहे हैं। सोमवार रात उन्होंने कहा, “सिलेक्टेड पीएम तो अब रिजेक्टेड भी हो चुका है। वो मंत्रियों को किसलिए भेज रहे हैं? बातचीत के लिए? अगर हां, तो पहले अपने प्रधानमंत्री का इस्तीफा लेकर आएं। हम बातचीत के लिए तैयार हैं। इससे कम पर बात नहीं बन पाएगी। हम तो फैसला कर चुके हैं, अब सरकार अपनी सोचे।”
 

25 लाख लोगों की सुनें इमरान खान
आजादी मार्च को नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टो की पार्टियों का भी समर्थन हासिल है। इसके कई नेता मार्च में शामिल भी हुए। इन्हीं में से एक हैं पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ। उन्होंने कहा, “इमरान को भूलने की बीमारी है। वो तो 100-200 को लेकर नवाज शरीफ के इस्तीफे पर अड़ गए थे। हमारे साथ तो 25 लाख लोग हैं। अब वो कुर्सी छोड़ने में वक्त क्यों लगा रहे हैं?” 
 

सेना की हालात पर नजर
आजादी मार्च में लोगों की बढ़ती तादाद को लेकर सेना भी सक्रिय हो गई है। इस्लामाबाद में खुफिया तंत्र को अलर्ट पर रखा गया है। सोमवार रात कई जगहों पर बैरीकेड्स लगा दिए गए। यहां पुलिस के बजाए फौजी तैनात हैं। सरकारी इमारतों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राजधानी में कई देशों के दूतावास हैं। यहां सुरक्षा ज्यादा सख्त है। प्राईवेट गाड़ियों को शहर की सीमा पर ही रोका जा रहा है। सैन्य प्रवक्ता ने सोमवार को कहा- हमारी हालात पर नजर है। सेना किसी राजनीतिक आंदोलन के समर्थन या विरोध को बढ़ावा नहीं दे सकती। हमारी जिम्मेदारी अवाम के प्रति है। इसे निभाने के लिए हम तैयार हैं। 

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