अच्छी खबर:मर्क फार्मा ने कहा- कोविड-19 की दवा दूसरी कंपनियां भी बना सकेंगी, गरीब देशों को फायदा होगा

बर्लिन3 महीने पहले
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जर्मन दवा कंपनी मर्क ने कहा है कि वो अपनी कोविड-19 पिल (टैबलेट) दूसरी कंपनियों को भी बनाने की मंजूरी देगी। कंपनी के इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा उन गरीब मुल्कों को होगा, जो कोविड-19 के महंगे वैक्सीन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इन देशों के करोड़ों लोगों को इस फैसले से राहत मिलेगी। कंपनी के इस फैसले की जानकारी यूनाइटेड नेशन्स ने दी है।

लाइसेंस एग्रीमेंट भी तैयार
यूएन पब्लिक हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मेडिसिन पेटेंट पूल ने एक बयान में कहा- हमने मोल्नुपिराविर दवा के बारे में मर्क और उसकी पार्टनर कंपनी रिगेबेक के साथ एग्रीमेंट साइन किया है। इसके बाद कुछ कंपनियों को इस दवा तैयार करने की मंजूरी मिल जाएगी। इसके लिए किसी कंपनी को रॉयल्टी जमा कराने की जरूरत नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि इस दवा को ग्लोबल इमरजेंसी प्रोडक्ट्स की कैटेगरी में रखा गया है। मोल्नुपिराविर को कोरोना के इलाज में पहली कारगर दवा माना जा रहा है।

अब तक बेहतर नतीजे
मोल्नुपिराविर के बारे में मेडिसन पेटेंट पूल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर चार्ल्स गोर ने कहा- इस दवा के शुरुआती नतीजे शानदार रहे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि लाइसेंस एग्रीमेंट से दूसरी कंपनियों के लिए भी रास्ते खुलेंगे।

गोर के मुताबिक- अब तक तमाम कोशिशें की गईं कि वैक्सीन को लेकर भी इस तरह का कोई समझौता हो जाए, लेकिन कोई भी देश या कंपनी इसके लिए तैयार नहीं हुए। मर्क ने यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी से अपील में कहा है कि उसकी दवा को मंजूरी दी जाए। हालांकि, दोनों ही एजेंसियों ने इस पर फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है।

क्या फायदा होगा
मर्क ने इस महीने की शुरुआत में कहा था उसकी दवा से अस्पताल में भर्ती होने की आशंका कम होगी और मौतों को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। कोरोना के शुरुआती लक्षण नजर आने के बाद अब तक इस टैबलेट को काफी असरकारक माना गया है। डॉक्टर के कहने पर इस टैबलेट को घर पर ही लिया जा सकता है। इससे अस्पतालों पर मरीजों का बोझ कम होगा और सबसे बड़ा फायदा तो गरीब देशों को होगा।