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बाइडेन प्रशासन सुस्त:भारतीयों के लाखों ग्रीन कार्ड के आवेदन बर्बाद, देरी के चलते लाखों भारतीय लोगों का भविष्य संकट में

5 दिन पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली
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10 लाख से अधिक कार्ड्स की प्रोसेसिंग नहीं होने से पेशेवर परेशान हैं। - Dainik Bhaskar
10 लाख से अधिक कार्ड्स की प्रोसेसिंग नहीं होने से पेशेवर परेशान हैं।

अमेरिकी सिस्टम में सुस्ती का खामियाजा अमेरिका में काम कर रहे लाखों भारतीयों को भुगतना पड़ रहा है। इस सुस्ती की वजह से लाखों ग्रीन कार्ड आवेदन रद्दी के टोकरे में चले गए हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में 10 लाख से अधिक ग्रीन कार्ड आवेदन की प्राेसेसिंग ही नहीं हो पाई। इसके चलते इन लोगों को ही नहीं, बल्कि उन कंपनियों को भी परेशानी उठानी पड़ी हैं, जिसमें ये लोग काम करते रहे हैं।

मौजूदा वक्त में 6,32,219 भारतीय अप्रवासी और उनके परिवार के आवेदन लंबित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस देरी के कारण अमेरिकी इकोनॉमी को भी दिक्कतें पेश आ रही हैं, क्योंकि भारत के डॉक्टर-नर्सेज और सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैसे प्रोफशनर्स की अमेरिका में मांग बहुत ज्यादा है। वॉशिंगटन स्थित कैटो इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ डेविड जे बीअर का कहना है कि जिस रफ्तार से अभी ग्रीन कार्ड आवंटित हो रहे हैं, सारे एडवांस प्रोफेशनल लोगों को वीसा मिलने में 151 साल लगेंगे।

क्यों हो रही है ग्रीन कार्ड के प्रोसेसिंग में देरी

अमेरिकन इमीग्रेशन लायर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर शेव दलाल धेइनी ने दैनिक भास्कर को बताया कि अमेरिकी संसद ने प्रति वर्ष ग्रीन कार्ड के पारिवारिक आवेदन की संख्या 2,26,000 तय की है, जबकि नौकरी करने वालों की संख्या 1,40,000 रखा है। यदि आंकड़ा पूरा नहीं होता तो काफी अगले साल जुड़ता है।

2020 में कोरोना के कारण तय संख्या में ग्रीन कार्ड आवेदन की प्रोसेसिंग नहीं हो पाई थी। इसके चलते 2021 में तय संख्या में एक लाख से ज्यादा आवेदन जुड़ गए थे। इनकी प्रोसेसिंग सितंबर माह तक होनी थी, लगता है ये बर्बाद हो गए।

टिम कुक को आशंका, कहा- कंपनियों को पेशेवरों की कमी पाटने में दिक्कत आएगी

एपल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने बड़ी तादाद में भारतीय अप्रवासी अमेरिका में रहते हुए सेवाएं दे रहे हैं। अगर इन लोगों के आवेदन पर कार्रवाई नहीं होती है तो इन कंपनियों के कामकाज पर विपरीत असर पड़ता है। परिस्थिति इतनी विकट हो गई है कि एपल सीईओ टिम कुक की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन को पत्र लिखे पत्र में कहा है- ‘सिस्टम ने विदेशी मूल के पेशेवरों को अधर में छोड़ दिया है और यदि समस्या जल्द नहीं सुलझी तो काबिल पेशेवरों की कमी आएगी।’

बीमार माता-पिता से मिलने नहीं जा पा रहे; डर- कहीं अमेरिका वापस ही नहीं आने दें

कैलिफोर्निया में क्रिटिकल केयर डॉक्टर श्रीराम चहल का कहना है कि वे 10 साल से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। वे कहते हैं- ‘2020 में कोरोना वायरस से संबंधित प्रसंस्करण देरी के बाद इस साल अतिरिक्त 122,000 रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड बने। कम से कम एक लाख ग्रीन कार्ड बर्बाद हो गए। हम 10 साल से भारत में अपने बीमार माता-पिता से नहीं मिले हैं, इस डर से कि हमें अमेरिका वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी।’ चहल का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि आगे क्या होगा।