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  • Minister Zabiullah Mujahid Said – ISIS Is Not A Threat To Us, But A Headache; Take Immediate Action And Drive It Out

तालिबान के लिए गले की फांस बना ISIS:मंत्री जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा- हमारे लिए आतंकी संगठन ISIS खतरा नहीं, बल्कि सिरदर्द है

काबुलएक वर्ष पहले
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अफगानिस्तान में तालिबान जल्द ही ISIS समेत कई संगठनों पर लगाम लगाएगा। इसको लेकर तालिबान ने अफगानिस्तान में एक अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत ISIS और खुरासान संगठनों के 3 आतंकियों को मार गिराया था। ये बात मंत्री जबीउल्लाह मुजाहिद ने अफगानिस्तान की मीडिया से कही हैं।

मुजाहिद ने कहा- हम ISIS को खतरा नहीं मानते हैं, बल्कि इसे सिरदर्द मानते हैं। ये संगठन कुछ जगहों पर सिरदर्द पैदा करता है लेकिन हर घटना में तुरंत एक्शन लेकर उसे खदेड़ दिया जाता है। इसमें हमे सफलता मिली है।

ISIS और खुरासान के 3 आतंकवादी मार गिराया
तालिबान का दावा है कि काबुल के उत्तरी क्षेत्रों में कथित तौर पर एक अभियान चलाया था, जिसमें ISIS-K और खुरासान संगठनों के 3 आतंकवादी मारे गए थे। अफगानिस्तान की स्थानीय मीडिया के मुताबिक, तालिबान ISIS-K के ठिकानों का भंडाफोड़ करने के लिए अभियान चला रहा है।

ये ऑपरेशन एक मस्जिद में आत्मघाती हमला के बाद शुरू किया गया है। जहां जबीउल्लाह मुजाहिद की मां को श्रद्धांजलि देने के लिए सभा का आयोजन किया था। इसमें तालिबानी नेता और नागरिक शामिल थे। इस विस्फोट में कथित तौर पर दस से अधिक लोग मारे गए थे और 20 से अधिक घायल हो गए थे।

फिर सक्रिय हो सकता है ISIS
वहीं मार्क मिले ने कहा था कि अल कायदा और ISIS अगले 6 से 36 महीनों में अफगानिस्तान में फिर से सक्रिय हो सकता है। हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई में मिले ने कहा- इस समय अफगानिस्तान से आतंकवादी खतरा 9/11 की तुलना में कम है, लेकिन अल कायदा और ISIS फिर से इस तरह के हमले को अंजाम देने का प्लान बना सकता है।

क्या है ISIS-K
ISIS-K का नाम उत्तरपूर्वी ईरान, दक्षिणी तुर्कमेनिस्तान और उत्तरी अफगानिस्तान में आने वाले क्षेत्र के नाम पर रखा गया है। यह संगठन सबसे पहले 2014 में पूर्वी अफगानिस्तान में सक्रिय हुआ। यहां से इसने बेरहमी और क्रूरता की पहचान बनाई।

कहां हुई ISIS-K की शुरुआत
पाकिस्तान के सैकड़ों तालिबानी इस संगठन के साथ जुड़े और चरमपंथी हमलों को अंजाम दिया। जब सेना की मदद से इन्हें निकाला गया तो ये अफगानिस्तान की सीमा पर आ गए और फिर यहीं से ऑपरेट करने लगे। ताकत इसलिए बढ़ती गई, क्योंकि तालिबान पश्चिमी देशों और सोच के प्रति नरम होता गया। ऐसे में तालिबान के असंतुष्ट लड़ाके ISIS-K में जाने लगे।

क्या है खुरासान
ISIS और तालिबान दोनों ही कट्‌टर सुन्नी इस्लामिक आतंकी हैं, ISIS-K और तालिबान के बीच कई मुद्दों पर असहमति है। ISIS ने तालिबान पर आरोप लगाया है कि उसने जिहाद को लेकर कई समझौते किए हैं।