अफगानिस्तान में बच्चों के पास पहुंचा स्कूल:मोबाइल स्कूल से तालीम देने की कोशिश, समाज को एजुकेट करना मकसद

4 महीने पहले
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अफगानिस्तान में बच्चे तालीम से महरुम हो गए हैं। तालिबान जब से यहां की सत्ता पर काबिज हुआ है, उसने एजुकेशन सिस्टम को इस्लामिक तरीकों से चलाने की कोशिश की है। इससे कई बच्चों को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, तो कई अपने स्कूलों के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अफगानिस्तान में अब स्कूल खुद गरीब और जरुरतमंद बच्चों तक पहुंच रहा है।

पेन फाउंडेशन कर रहा है बच्चों की मदद

दरअसल पेन पाथ नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन (NGO) फाउंडर मतिउल्लाह वेसा एक मोबाइल स्कूल वैन चला रहे हैं। जो दूर-दराज के इलाकों में जाकर बच्चों की पढ़ाई पूरी करने में मदद कर रहे हैं।

हर क्लास के बाद मतिउल्लाह कम्युनिटी लीडर से मिलकर लड़कियों को स्कूल भेजने की अपील करते हैं। वो कहते हैं कि लड़के-लड़कियों पढ़ने के समान अवसर मिल पाएं।
हर क्लास के बाद मतिउल्लाह कम्युनिटी लीडर से मिलकर लड़कियों को स्कूल भेजने की अपील करते हैं। वो कहते हैं कि लड़के-लड़कियों पढ़ने के समान अवसर मिल पाएं।

मीडिया से बात करते मतिउल्लाह ने कहा- हम मोबाइल स्कूल वैन के जरिए ऐसे बच्चों को तालीम देने की कोशिश कर रहे हैं। जो अभी स्कूल जाने की हालत में नहीं हैं।

तालिबान हायर एजुकेशन के खिलाफ
एक दशक से ज्यादा से चले संघर्ष की वजह से कई बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। तालिबान ने सत्ता में आने के बाद से ही हायर एजुकेशन के खिलाफ रहा है। तालिबान ने अब तक जो स्कूल खोले हैं, वो सभी प्राइमरी स्कूल हैं।

अवेयरनेस कैम्पेन चला रहा है NGO
पेन पाथ सिर्फ बच्चों को पढ़ा ही नहीं रहा बल्कि समाज में बच्चों और खासकर लड़कियों को शिक्षित करने के लिए अवेयरनेस कैम्पेन भी चला रहा है। मतिउल्लाह ने कहा- अगर हम अफगानिस्तान को एक मजबूत और शांतिपूर्ण देश बनाना चाहते हैं। साथ ही इंटरनेशनल लेवल पर दूसरे देशों के साथ अपने मुल्क को देखना चाहते हैं, तो हमें बच्चों को मॉडर्न एजुकेशन देनी होगी। खासकर लड़कियों की तालीम पर जोर देना होगा ।