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  • More Than 11 Thousand Cases Of UK Variants Were Found In The US, The Most Dangerous Strain Of Infection; 25 Cases Of Blood Clot Surfaced After Vaccination In Britain

कोरोना दुनिया में:अमेरिका में UK वैरिएंट के केस 11 हजार के पार, ब्रिटेन में वैक्सीनेशन के बाद ब्लड क्लॉटिंग के 25 मामले सामने आए

न्यूयॉर्क6 महीने पहले
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अमेरिका में कोरोना संक्रमण के सबसे खतरनाक UK वैरिएंट B.1.1.7 के 11 हजार 500 मामले सामने आए हैं। इसे सुपर स्प्रेडर यानी तेजी से फैलने वाला माना जाता है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स को आशंका है कि देशव्यापी वैक्सीन ड्राइव के बीच इस वैरिएंट के केसेस का सामने आना चिंता की बात है। ऐसे में दुनियाभर में वैक्सीनेशन को पूरा करना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है। नहीं तो ऐसे स्ट्रेन उभर आएंगे, जो मौजूदा वैक्सीन को बेअसर कर देंगे।

फिलहाल न्यूयॉर्क, मिशिगन, विस्कोंसिन और अन्य अमेरिकी राज्यों में इसी स्ट्रेन के कारण संक्रमण के नए हॉटस्पॉट बन गए हैं। अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित कुल लोगों में 26 फीसदी इस स्ट्रेन के कारण बीमार हुए हैं। इस स्ट्रेन से संक्रमित लोगों की संख्या औसतन 7 से 10 दिन में दो गुनी हो रही है। कैलिफोर्निया में पाए गए संस्करण (B.1.427 और B.1.429) मूल कोविड-19 से 20 फीसदी ज्यादा खतरनाक है।

कोरोना संक्रमण के ये 5 स्ट्रेन हैं
कोरोना संक्रमण के अब तक पांच संस्करण सामने आए हैं।​ इनमें​​​​​​ B.1.1.7 (ब्रिटेन), P.1 (जापान/ ब्राजील), B.1.351 (दक्षिण अफ्रीका), B.1.427 (अमेरिका), और B.1.429 (कैलिफोर्निया) शामिल हैं। UK के B.1.1.7 स्ट्रेन को सुपर स्प्रेडर माना जा रहा है। यानी इसकी संक्रमण करने की क्षमता अधिक है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में हेल्थ मैट्रिक्स साइंस के प्रोफेसर अली मोकदाद के मुताबिक ये क्षमता 50 से 70 फीसदी तक अधिक देखी गई है। B.1.1.7 वैरिएंट ब्रिटेन में सबसे पहले पाया गया था। यह यूरोप के कुछ हिस्सों में कहर बरपा रहा है, और अगर अमेरिकी सावधानी नहीं बरतते हैं तो आने वाले समय में देश के हेल्थ एक्सपर्ट्स के लिए यह मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

ब्रिटेन में ब्लड क्लॉटिंग के 25 नए मामले
एस्ट्राजेनेका की डोज लेने के बाद ब्रिटेन में रेयर ब्लड क्लॉटिंग (खून के थक्के) के 25 नए मामले सामने आए हैं। रेगुलेटरी एजेंसी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि 24 मार्च के बाद रेयर ब्लड क्लॉटिंग के कुल मामले अब 30 तक पहुंच गए हैं। हालांकि, नियामक ने कहा कि जोखिमों के आगे ही वैक्सीन के फायदे मिलेंगे।

बता दें कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने विकसित किया है। इससे पहले वैक्सीन लगने के बाद सामने आए ब्लड क्लॉट के मामलों के मद्देनजर कई यूरोपियन देशों ने वैक्सीन लगाने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में यूरोपियन मेडिकल एजेंसी ने जांच के बाद वैक्सीन के प्रयोग को हरी झंडी दे दी।

वैक्सीन लगने के बाद सामने आए ब्लड क्लॉट के मामलों के मद्देनजर कई यूरोपियन देशों ने वैक्सीन लगाने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में यूरोपियन मेडिकल एजेंसी ने जांच के बाद वैक्सीन के प्रयोग को हरी झंडी दे दी।
वैक्सीन लगने के बाद सामने आए ब्लड क्लॉट के मामलों के मद्देनजर कई यूरोपियन देशों ने वैक्सीन लगाने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में यूरोपियन मेडिकल एजेंसी ने जांच के बाद वैक्सीन के प्रयोग को हरी झंडी दे दी।

हर 6 लाख लोगों में एक व्यक्ति में दिखा ब्लड क्लॉट
ब्रिटेन की रेगुलेटरी एजेंसी ने कहा कि 24 मार्च तक 1.81 करोड़ लोगों को एस्ट्राजेनेका वैक्सीन दी गई है। इसमें से केवल 30 लोगों में ब्लड क्लॉट के मामले देखने को मिले हैं। इससे पहले, एजेंसी ने 18 मार्च को बताया कि 1.1 करोड़ लोगों को वैक्सीन डोज देने के बाद केवल 5 लोगों में ब्लड क्लॉट का मामला सामने आया। इस नई रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लगने के बाद ब्लट क्लॉट के मामले की दर 6 लाख लोगों में सिर्फ एक है। वहीं, फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन लगने के बाद इस तरह के मामले सामने नहीं आए हैं।

जॉनसन एंड जॉनसन के वैक्सीन ट्रायल में 12 से 17 साल के टीनएजर्स शामिल
अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने अपने वैक्सीन ट्रायल में 12 से 17 साल के उम्र के टीनएजर्स को शामिल करने की घोषणा की है। कंपनी के रिसर्च और डेवलपमेंट के ग्लोबल हेड डॉ. मथाई ममेन ने बताया कि निकट भविष्य में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लेकर कंपनी ने स्टडी शुरू कर दी है। बच्चों को लेकर जल्द ही परिणाम सामने आएंगे।

फाइजर ने भी 12 से 15 साल के उम्र के लिए अपनी वैक्सीन को असरदार बताया
इससे पहले अमेरिका की ही कंपनी फाइजर ने कोरोना संक्रमण के टीकों को 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षित बताया था। कंपनी ने 12 से 15 साल के 2,260 वॉलंटिअर्स पर किए गए टेस्ट के डेटा में पाया कि पूरे वैक्सिनेशन के बाद कोरोना इन्फेक्शन का कोई केस नहीं पाया गया। यानी वैक्सीन 100% असरदार बताई गई।

कोरोना अपडेट्स

  • ब्राजील की हेल्थ रेगुलेटर (स्वास्थ्य नियामक) एनविसा (Anvisa) ने भारत में बने कोरोना संक्रमण के टीके कोवैक्सिन के मैन्यूफैक्चरिंग स्टैंडर्ड पर सवाल खड़ा किया है। एनविसा का कहना है कि भारत बायोटेक की वैक्सीन उसके मानकों को पूरा नहीं करती इसलिए इसका उपयोग संभव नहीं है।
  • कोरोना वैक्सीन बना रहीं फार्मा कंपनियों फाइजर-बायोएनटेक ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन 12 से 15 साल के बच्चों पर 100% इफेक्टिव है। CNN के मुताबिक, कंपनी ने बुधवार को एक बयान में कहा है कि अमेरिका में 2,250 बच्चों पर किए गए फेज थ्री ट्रायल्स में यह 100% असरदार रही।

अब तक 13.32 करोड़ लोग संक्रमित
दुनिया में अब तक 13.32 करोड़ लोग वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 10.78 करोड़ लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 28.42 लाख मरीजों की मौत हो गई। 2.24 करोड़ मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है। इनमें 97,014 मरीजों की हालत गंभीर है, जबकि 2.23 करोड़ मरीजों में कोरोना के हल्के लक्षण हैं।

टॉप-10 देश, जहां अब तक सबसे ज्यादा लोग संक्रमित हुए

देश

संक्रमितमौतेंठीक हुए
अमेरिका31,246,019566,61623,754,392
ब्राजील12,842,717325,55911,239,099
भारत12,303,131163,42811,525,039
फ्रांस4,695,08295,976296,166
रूस4,563,05699,6334,186,251
UK4,350,266126,7643,860,174
इटली3,607,083109,8472,933,757
तुर्की3,357,98831,7133,035,043
स्पेन3,291,39475,5413,054,725
जर्मनी2,854,13777,2442,548,200

(ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।)

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